ट्रंप प्रशासन ने नया एच-1बी बिल पेश किया, भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स खतरे में, भारत ने उठाया मुद्दा

नई दिल्ली, 1फरवरी: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रूख अपनाते हुए 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों पर बैन के फैसले के बाद अमेरिका में दूसरे देशों से जॉब करने आने वाले प्रफेशनल्स पर भी गाज गिराने की तैयारी कर ली है। अपनी नई नीति ‘हायर अमेरिकन’ का अनुसरण करते हुए ट्रंप ने एच 1बी वीजा की शर्तों को सख्त करने के लिए एक बिल अमेरिकी संसद के पटल पर रखा है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर इसका बुरा असर पड़ने के आसार है।

भारत ने मंगलवार को कहा कि उसने अमेरिकी कांग्रेस में एच1बी वीजा नियमों में बदलाव के लिए पेश किए गए विधेयक से जुड़ी अपनी चिंताओं से अमेरिका को अवगत करा दिया है।

माना जा रहा है कि ऐसा कोई भी बदलाव भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग और अमेरिका में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे भारतीयों पर विपरीत असर डालेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा, “भारत के हितों और चिंताओं से अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस, दोनों को उच्चस्तर पर अवगत करा दिया गया है।”  

कैलिफोर्निया के सांसद जो लोफग्रेन ने प्रतिनिधि सभा में ‘हाई-स्किल्ड इंटीग्रिटी एंड फेयरनेस एक्ट 2017’ पेश किया है। इसमें एच1बी वीजाधारकों के मौजूदा न्यूनतम वेतन को 60000 डालर से बढ़ाकर 130,000 डालर करने का प्रस्ताव किया गया है। ऐसा होने पर इससे आईटी सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों पर विपरीत असर पड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि इतने वेतन पर कंपनियां उन्हें नियुक्त करने से हिचकेंगी।  विधेयक पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का हस्ताक्षर होने की संभावना है।

इसके बाद अमेरिकी कंपनियों के लिए यह मुश्किल हो जाएगा कि वे अमेरिकी कर्मियों को हटाकर उनकी जगह कम वेतन पर भारत समेत अन्य विदेशी कर्मियों को नियुक्त कर सकें।  ट्रंप एच1बी वीजा पर कार्यकारी आदेश जारी करने की तैयारी में हैं। इससे पहले इस आदेश की जानकारी कुछ वेबसाइट पर सोमवार को जारी हो गई।  

–आईएएनएस

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