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बंदी फॉर वोट : मोदी की नोटबंदी और नीतीश की शराबबंदी में हो गयी जुगलबंदी

गूगल साभार

पटना, 5 जनवरी:  सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली पटना में 350वें प्रकाशोत्सव के मौके पर गांधी मैदान में गुरुवार को आयोजित समागम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच साझा किया और दोनों ने एक-दूसरे की तारीफ में खूब कसीदे पढ़े। शुरुआत नीतीश ने की तो मोदी ने भी ‘रिटर्न गिफ्ट’ देने में देरी नहीं लगाई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिहार में प्रकाश पर्व का उत्साह देश के लिए न केवल प्रेरणा है, बल्कि यह उत्सव देश की एकता का प्रतीक भी है। इस मौके पर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य में की गई शराबबंदी और प्रकाशोत्सव को लेकर की गई तैयारी की जमकर तारीफ की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार इस बात का विशेष प्रयास कर रही है कि न केवल हिंदुस्तान में, बल्कि पूरे विश्व को इस बात का अहसास हो कि गुरु गोविंद सिंह जी जैसी दिव्य आत्मा का जन्म यहां हुआ।

प्रकाशोत्सव के सफल आयोजन को लेकर नीतीश की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “नीतीश जी ने काफी मेहनत से इस आयोजन को सफल बनाया है। पटना में प्रकाश पर्व की विशेष अहमियत है।”

मोदी ने कहा, “नीतीश कुमार स्वयं आयोजन की एक-एक छोटी-छोटी चीजों और तैयारियों को देखते रहे। चंपारण सत्याग्रह के संबंध में प्रस्तावित आयोजन के लिए भी मैं उनका आभार प्रकट करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने बिहार सरकार द्वारा राज्य में की गई शराबबंदी की तारीफ करते हुए लोगों का इसमें सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति अभियान केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए यह जन-जन का काम है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “समाज परिवर्तन का काम बहुत कठिन होता है। उसे हाथ लगाने का काम भी बहुत साहसपूर्ण होता है, लेकिन नीतीश कुमार ने शराबबंदी का काम कर दिखाया।”

उन्होंने कहा आगे कहा, “नीतीश ने जिस प्रकार बिहार में नशामुक्ति का अभियान चलाया है, उसके लिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं। उन्हें बधाई देता हूं। मैं बिहार की जनता और सभी राजनीतिक दलों से गुजारिश करता हूं कि यह सिर्फ नीतीश कुमार का काम नहीं है। यह जन जन का काम है। यदि इसे सफल बनाएंगे तो बिहार मिसाल बनेगा। मुझे विश्वास है कि बिहार देश की अनमोल शक्ति बनेगा।”

बिहार में पिछले साल अप्रैल से ही शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है।

मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में पंजाबी भाषा में पंज प्यारे का जिक्र करते हुए कहा, “पंज प्यारे ने भारत को एकता के सूत्र में बांधा। आज के समय में हम सब की जिम्मेदारी है कि हम उनके आदर्शो से सीखते हुए देश को एकता के सूत्र में बांधने का काम करें।”

इससे पहले नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज के इस अवसर को शराबबंदी और नशामुक्ति को समर्पित करें, इससे अपना देश नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा।

नीतीश ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप मोदी द्वारा शराबबंदी के लिए किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “वे 12 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और मजबूती से शराबबंदी को लागू रखा।”

नीतीश ने शराबबंदी को लेकर की गई खुद की पहल को महात्मा गांधी और गुरु गोविंद सिंह को श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने इस कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद भी दिया।

नीतीश ने कहा, “गुरु गोविंद सिंह एक आदर्श व्यक्तित्व थे। उनका संघर्ष दलित और मानवता की रक्षा के लिए था। हम गुरु गोविंद सिंह के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बेहतर बनाएंगे। बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित कई गुरुद्वारों को जोड़कर एक सर्किट बनाया जाएगा। इसके अलावा गुरु के बाग के पास बहुद्देशीय प्रकाश केंद्र एवं प्रकाश उद्यान बनाया जाएगा।”

इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह समाजवाद, मानव अधिकार और धार्मिक आजादी के सही मायनों में रक्षक थे। उन्होंने लोगों से जाति, रंग एवं नस्ल रहित समाज सृजन के लिए गुरु साहिब के बताए रास्ते पर चलने की अपील की।

उन्होंने कहा, “जुल्म के विरूद्ध संघर्ष के लिए दसवें गुरु ने खालसा पंथ की स्थापना की। उन्होंने गरीबों और लताड़े हुए लोगों को मुगलों के अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध संघर्ष करने के लिए शक्तिवान बनाया।”

प्रकाशोत्सव के मौके पर प्रधानमंत्री ने गुरु गोविंद सिंह से संबंधित एक डाक टिकट भी जारी किया।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी मैदान में बने अस्थायी गुरुद्वारे में मत्था टेका और गुरुवाणी सुनी। वह हवाईअड्डे से सीधे यहां पहुंचे। पटना हवाईअड्डे पर बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनका स्वागत किया।

समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, तख्त हरमंदिर साहिब प्रबंधन कमिटी के अधिकारी, बिहार सहित कई राज्यों के मंत्री और देश-विदेश से बड़ी संख्या में आए सिख संगतों ने भाग लिया।

–आईएएनएस

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समय धारा

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