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ALERT..! दशहरा स्पेशल : इस काल में घूमने-फिरने मत जाना..! हो सकता है बड़ा अनर्थ..!! जानिये शुभ मुहूर्त

दशहरा के दिन का शुभ समय और काल
दशहरे के दिन : दशहरे के दिन रावण को जलते देखना आधुनिक समाज में एक चलन सा बन गया है l पर इसके कितने विपरीत परिणाम हमें भुगतने होते है हम नहीं जानते चलिए आज हम बताते है क्यों नहीं देखना चाहिए रावण को जलते हुए l 
दशहरा (30 सितम्बर 2017)
शनिवार के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है |
उस समय घूमने-फिरने मत जाना | दशहरा मैदान मत खोजना … रावण जलाता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण मे होगा …. गंदा वो श्वास में लेना …. धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है |
ये दशहरे के दिन शाम को घर पे ही स्नान आदि करके, दिन के कपडे बदल के शाम को धुले हुए कपडे पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये | थोडा
 ” राम रामाय नम: ।  “
मंत्र जपते, विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन  गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए ये मंत्र जपते है –
“ॐ अपराजितायै नमः “
ये मंत्र 1-2  माला जप करना और इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-
“पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥”
पवन तनय समाना की भी 1 माला कर ले उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर ले । फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणामप देखने को मिल सकते है |

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समय धारा

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