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उम्मीद शायरी : अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदों,बहुत दर्द सह लिए मैंने बहुत दिन जी लिया मैंने

शायरी : आपकी दोस्ती की एक नज़र चाहिए, दिल है बेघर उसे एक घर चाहिए, बस यूँही साथ चलते रहो ऐ दोस्त, यह दोस्ती हमें उम्र भर चाहिए..

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अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदों,
बहुत दर्द सह लिए मैंने बहुत दिन जी लिया मैंने
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“आपकी दोस्ती की एक नज़र चाहिए,
दिल है बेघर उसे एक घर चाहिए,
बस यूँही साथ चलते रहो ऐ दोस्त,
यह दोस्ती हमें उम्र भर चाहिए..”
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