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Wednesday Thought : थकान रोज शाम को अपना घर मांगती है…

...और जिंदगी रोज नया सफ़र मांगती है. : सुविचार

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थकान 

रोज शाम को अपना 

घर मांगती है…

और जिंदगी 

रोज नया सफ़र मांगती है….

 

 

एक नींद है जो लोगों को

रात भर आती नहीं…

और एक जमीर है जो हर 

वक्त सोया रहता है… 

 

 

कभी पड़ोसी भी

घर का हिस्सा हुआ करते थे 

आज एक ही घर में ना जाने

कितने पड़ोसी रहते है ….

 

जीवन में हमेशा शांत रहिए
आप अपने आप को
बहुत मजबूत पाएंगे

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Dropadi Kanojiya

द्रोपदी कनौजिया पेशे से टीचर रही है लेकिन अपने लेखन में रुचि के चलते समयधारा के साथ शुरू से ही जुड़ी है। शांत,सौम्य स्वभाव की द्रोपदी कनौजिया की मुख्य रूचि दार्शनिक,धार्मिक लेखन की ओर ज्यादा है।

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