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और मै आम आदमी से, एलियन बन गया…!

समाज को यह क्या हो रहा है, हमने तो कभी यह सोचा ही नहीं, हम कहा से कहा जा रहे है, कुछ  दिनों पहले लोग कुछ थे अब कुछ और, शायद मेरी सोच ही गलत है, या में ज़माने के साथ अपने आप को सहेज महसूस नहीं कर रहा l क्या हो गया है मुझे..! सब लोग मुझे इस तरह से क्यु देख रहे है, क्या सच में में इतना अजीब हु या फिर कही कुछ छुट गया है, आप लोग बतैये में साधारण हु या असाधारण..?

आज में अपने परिवार के साथ एक साधारण से रेस्टोरेंट में खाना खाने आया , हमने आराम से खाने का ओर्डेर दिया, यहाँ वहा बहुत सारे मेरे जैसे दिखने वाले लोग अपने परिवार के साथ बेठे थे, कुछ जवान लोग, और एक कोने में एक बुजुर्ग भी थे, सब वहा थे पर वहा होकर भी वे वहा न थे, मेरी टेबल पर मेरा बेटा(उम्र 17वर्ष) भी अपनी माँ(उम्र 45वर्ष) यानि मेरी धर्मपत्नी तथा मेरी बेटी(उम्र 13वर्ष ) यह लोग भी यहाँ होकर भी यहाँ न थे..? आप सोच रहे होगे या तो में पागल हो गया हु या में अपने आपे में नहीं हु..? सब लोगो के वहा मौजद होने के बावजूद कैसे सारे लोग जिसमें मेरा अपना परिवार भी वहा नहीं थे.? हम 21 वि सदी के एक ऐसे समाज में जी रहे है जहा होना न होना किसी को कोइ असर नहीं करता सारे लोग साथ होकर भी साथ नहीं है या यु कहे की सब लोग सिर्फ दिखावे के लिए एक दुसरे के साथ है, पहले अगर पीछे मोहल्ले में, कोई बच्चा पैदा होता था तो तुरंत सबके घर खबर के साथ साथ मिठाईयां भी घर पहुच जाती थी और अब पडोश में अगर कोइ शादी भी है तो एक दिन पहले तक यह पता नहीं होता की हमें शादी में बुलाया जायेगा या नहीं…. हमने बहुत तरक्की कर ली है पर इस तर्क्क्की के बिच कही न कही हम हमारे मुस्कान पीछे छुट गयी है, अब लोग सेल्फी लेते हुए मुस्करायेंगे उन्हें मुस्कारने के लिए कहना पड़ता है और पहले वो मुस्कान दिल से निकलती थी….. छोड़ो, अगर बात करने बैठेगे तो बहुत सा वक़्त बीत जायेगा, और आप लोग कहोगे की यह कहा से कहा जा रहा है, हा तो में कहा था, रेस्टोरेंट में …… जहा हम सब खाना खा रहे थे, करीब करीब एक घंटे से एक सक्श मुझे घूरे जा रहा था, समझ में नहीं आया क्यु… क्या मैंने इसे पहले कही देखा था कोई जाना पहचाना चेहरा था यह, नहीं….? फिर क्यु यह घूरे जा रहा था … मेरा सयंम जवाब देने लगा था ….. तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसकी मैंने काल्पना भी न की थी…..

इस रेस्टोरेंट में बेठे सभी लोग मेरी और आ रहे थे, सब लोग मेरे साथ एक सेल्फी लेना चाहते थे, बस दूर थे तो मेरे अपने घर वाले, उन्हें शर्म महसूस हो रही थी, और में बेबस लाचार मूकदर्शक बना लोगो के साथ सेल्फी खीचा रहा था….. अचनक में उस रेस्टोरेंट का हीरो बन गया था, क्या हुआ ऐसा …..

पिछले 1 से 1.1/2 घंटे के दोरान जो चेहरा मुझे घुर रहा था वो एक नामी पत्रकार था, और इसलिए वो मुझे जाना पहचाना लग रहा था, मुझे घूरने का कारण – इस कलयुग में, में उसे एक  एलियन ( दूसरी दुनिया से आया हुआ व्यक्ती लग रहा था …उसने लोगो से कहा की आएये मिलये एलियन से … में गुस्से से उसे खा जाने वाली नजरो से देख रहा था और वो सब लोगो को मेरे बारे में बता रहा था, क्या…..? जानिए आप भी और बताएं की क्या में एलियन हु….. या समाज में मुझ जैसे लोग एलियन्स कहलाते है,…..? क्यु में मेरे जैसे लोग इस समाज में अलग यानि एलियन्स कहलाते है…?? निचे लिखी जाने वाली सभी बाते सच थी और इसी आधार पर एक नामी पत्रकार ने मुझे एलियन की उपाधि से नवाजा..!!!!

  • रेस्टोरेंट में मैंने एक बार भी जेब में हाथ नहीं डाला …?
  • रेस्टोरेंट में मैंने एक बार भी अपने मोबाइल को नहीं देखा …?
  • मैंने एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की, की किसी ने फेसबुक पर मुझे सन्देश तो नहीं भेजा…?
  • में सिर्फ खाना खा रहा था सिर्फ और सिर्फ खाना……?
  • मेरा व्यव्हार बीवी बक्चौ से अलग था…….?
  • मेरे पास कोइ भी गैजेट (यन्त्र) नहीं था …?
  • न मैंने न मुझे किसीने कॉल नहीं किया था ….?

और बहुत सी छोटी छोटी बाते जो मैंने नहीं की थी …और सिर्फ इसी वजह से कलयुगी पत्रकार ने मुझे एलियन बना दिया……….!!!!!

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समय धारा

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