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कभी थे राजा आज है रंक..!! अंबानी इस तरह से आये अर्श से फर्श पर

अब तेरा क्या होगा अंबानी, रह गयी मार्केट में तेरी वही पुरानीं कहानी, कर्ज चुकाने में याद आ गए नाना-नानी

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नई दिल्ली,(समयधारा ) : कहते है ना कभी भी किसी को किसी भी चीज का घमंड नहीं होना चाहिए l अर्श से फर्श पर आते हुए देर नहीं लगतीl

आज हम बात कर रहे है अंबानी परिवार के अनिल अंबानी की जो कभी विश्व के छठे सबसे बड़े अमीर व्यक्ति थे l यह बात थी सन 2008 कीl

अब 2019 चल रहा है और यह विश्व का छठां सबसे अमीर व्यक्ति इस समय अरबपति भी नहीं रहा l

शनिवार को उन्होंने अपनी मुख्य कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशन के डायरेक्टर के पद से भी इस्तीफा दे दिया। 

एक वक्त था जब RCom ने टेलिकॉम की दुनिया में क्रांति ला दी थी, आज कंपनी दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही है,

और कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने की नौबत है। आरकॉम पर करीब 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। 

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एक वक्त था जब RCom ने टेलिकॉम की दुनिया में क्रांति ला दी थी,

आज कंपनी दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही है और कर्ज चुकाने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने की नौबत है।

आरकॉम पर करीब 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। दूसरी तिमाही में आरकॉम को 30 हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है l 

रिलायंस समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों में 2005 में बंटवारे के बाद अनिल अंबानी को प्रॉफिट मेकिंग आरकॉम मिला था।

बंटवारे के समय यह समझौता हुआ था कि मुकेश अंबानी 2010 तक टेलिकॉम बिजनस में कदम नहीं रखेंगे।

आखिरकार यह मियाद खत्म हुई और 2016 में मुकेश अंबानी ने रिलायंस जियो को लॉन्च किया और टेलिकॉम इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया।

भले ही अनिल अंबानी ने टेलिकॉम क्रांति लाकर पिछड़ गए थे, लेकिन बड़े भाई मुकेश ने अन्य कंपनियों को बाहर कर दिया।

दोनों भाइयों में बंटवारे के बाद अनिल अंबानी के अधीन वाली रिलायंस ग्रुप कंपनीज का मार्केट कैप,

मार्च 2008 में 2 लाख 36 हजार 354 करोड़ था। फरवरी 2019 में घटकर यह 24 हजार 922 करोड़ पर पहुंच गया।

जून महीने में तो ग्रुप की छह कंपनियों का मार्केट कैप 6,196 करोड़ पर पहुंच गया था।

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उस दौरान कहा गया था कि अनिल अंबानी अब अबरपतियों की लिस्ट से बाहर हो गए हैं,

और उनकी निजी संपत्ति एक अरब डॉलर के नीचे पहुंच गई है।

(इनपुट ET से भी)

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन एक स्वतंत्र लेखक है और साथ ही समयधारा के को-फाउंडर व सीईओ है। लेखन के प्रति गहन रुचि ने धर्मेश जैन को बिजनेस के साथ-साथ लेख लिखने की ओर प्रोत्साहित किया।

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