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US-China Trade War भारत के लिए मौके ही मौके, विश्व अस्थिर-भारत स्थिर

भारत ज्यादा बड़ा व्यापार और विनिर्माण के ठिकाने के रूप में उभरेगा - अरुण जेटली

नई दिल्ली, 28 सितम्बर : 

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और चीन के बीच जारी

व्यापार युद्ध से भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा हालात में अस्थिरता आई है,

मगर भारत के लिए इससे धीरे-धीरे व्यापार के अवसर के द्वार खुलेंगे।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सालाना सत्र को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल का दाम बढ़ने से घरेलू अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी हुई

चुनौती के बावजूद भविष्य में भारत के विकास के लिए संभावित अवसर के द्वार खुलने वाले हैं। 

वित्तमंत्री ने कहा, “व्यापार युद्ध से शुरुआती दौर में अस्थिरता पैदा हुई है,

लेकिन इससे आखिरकार ज्यादा बड़ा बाजार खुल सकता है।

इससे भारत ज्यादा बड़ा व्यापार और विनिर्माण के ठिकाने के रूप में उभरेगा।

इसलिए हमें हालात पर नजर रखनी चाहिए कि कब चुनौती अवसर में बदलती है।”

अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध इस सप्ताह फिर गहरा गया,

क्योंकि दोनों आर्थिक शक्तियों ने एक-दूसरे पर फिर से भारी आयात शुल्क लगा दिया है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयातित 200 अरब डॉलर की वस्तुओं पर

10 फीसदी आयात शुल्क लगा दिया है, जो सोमवार से लागू है।

इन वस्तुओं में खाद्य पदार्थो के मसाले, बेसबॉल ग्लोव्स, नेटवर्क राउटर और औद्योगिकी मशीनरी के कल-पुर्जे शामिल हैं। 

अमेरिकी कार्रवाई का प्रतिकार करते हुए बीजिंग ने भी

60 अरब डॉलर मूल्य की अमेरिकी वस्तुओं पर आयात शुल्क लगा दिया है।

मौजूदा हालात में दोनों देशों में से किसी की ओर से पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं

और विवाद को सुलझाने के लिए आगे किसी प्रकार की व्यापारिक वार्ता का कोई कार्यक्रम तय नहीं है।

वैश्विक व्यापार की हालिया संरक्षणवादी नीतियों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से

भारतीय मुद्रा में इस महीने लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

रुपया 18 सितंबर को डॉलर के मुकाबले टूटकर 72.98 के स्तर पर आ गया था। 

कच्चे तेल के दाम में इजाफा होने से पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में जेटली ने कहा,

“इन चुनौतियों के बावजूद मुझे पक्का विश्वास है कि आने वाले दिनों

और वर्षो में भारत के लिए विकास के काफी अवसर हैं।”

आईएएनएस

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