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देश की सबसे बड़ी आईटी संस्था नैस्कॉम ने कहा-टीसीएस,इंफोसिस के महज 8.8 फीसदी कर्मचारियों को मिला एच-1बी वीजा

बेंगलुरू, 24 अप्रैल : देश के आईटी उद्योग की सर्वोच्च संस्था, नैस्कॉम ने कहा है कि दो शीर्ष कंपनियों -टीसीएस और इंफोसिस- को अमेरिका में अपने कर्मचारियों के प्लेसमेंट के लिए मात्र 8.8 प्रतिशत एच-1बी वीजा ही मिल पाए।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर सर्विसिस एंड कंपनीज (नैस्कॉम) ने यहां एक बयान में कहा, “छह आईटी कंपनियों में प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसिस) और इंफोसिस को वित्त वर्ष 2015 में 7,504 एच-1बी वीजा प्राप्त हुए थे।”

नैस्कॉम का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के एक अधिकारी ने पिछले सप्ताह भारतीय आईटी कंपनियों टीसीएस और इंफोसिस पर आरोप लगाया था कि उन्होंने गलत तरीके से एच-1बी वीजा का अधिकांश हिस्सा प्राप्त कर लिया था।

नैस्कॉम ने कहा कि वित्त वर्ष 2015 में एच-1बी वीजा प्राप्त करने वाली शीर्ष 20 प्रमुख कंपनियों में भारत की सिर्फ छह आईटी कंपनियां शामिल थीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसमें एच-1बी वीजा नियमों में सुधार करने की बात शामिल है।

नैस्कॉम ने कहा, “अमेरिका में प्रत्येक प्रतिष्ठित डेटा स्रोत ने कंप्यूटर साइंस की प्रमुख कंपनियों के लिए अमेरिकी श्रमशक्ति की मांग और आपूर्ति के बीच तेजी से बढ़ते अंतर को दिखाया है, खासतौर से क्लाउड, बिग डेटा, और मोबाइल कंप्यूटिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में।”

अमेरिकी श्रम विभाग का अनुमान है कि 2018 तक एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) में 24 लाख रिक्तियां रहेंगी, जिनमें से 50 प्रतिशत रिक्तियां आईटी संबंधित पदों की होंगी।

बयान में कहा गया है, “भारतीय आईटी कंपनियों के पास 20 प्रतिशत से भी कम एच-1बी वीजा है, यद्यपि भारतीय नागरिकों के पास 71 प्रतिशत एच-1बी वीजा मिल जाता है, जो उनके उच्च कौशल का प्रमाण है, खासतौर से अत्यंत मलाईदार एसटीईएम कौशल श्रेणी में।”

–आईएएनएस

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