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मोदीनॉमिक्स फेल! जीडीपी ग्रोथ घटकर हुई 5 फीसदी,6 साल में सबसे कम,सोशल मीडिया पर यूं फूटा गुस्सा

इस खबर के फैलते ही हैशटैग #EconomyCrisis और #EconomicSlowdown ट्रेंड करने लगा।

नयी दिल्ली,31अगस्त: India’s GDP growth rate slows 5 percent- भारत में आर्थिक मंदी (Economic recession) का हाहाकर मच चुका है। देश की जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 5 फीसदी (India’s GDP growth rate slows 5 percent) हो गई है।

यह आंकड़ा पिछले छह साल में सबसे निचले स्तर का (lowest in 6-year )है।

भारत की आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून तिमाही में गिरकर महज 5 प्रतिशत रह गई है।

इसकी जानकारी केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय ने शुक्रवार को दी है। सोशल मीडिया (Social media) पर

इस खबर के फैलते ही हैशटैग #EconomyCrisis और #EconomicSlowdown ट्रेंड करने लगा।

यदि सलाना आधार पर देखें तो देश की जीडीपी में तकरीबन 3 फीसदी की गिरावट है।

जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में GDP वृद्धि दर 8 फीसदी थी।

आर्थिक वृद्धि में मंदी का प्रमुख कारण कृषि उत्पादन में कमी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियो में अभूतपूर्व गिरावट को माना जा रहा है।

हालांकि आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार की जो हालत चल रही है उस हिसाब से आर्थिक वृद्धि दर में

गिरावट अपेक्षित ही थी। कई अर्थशास्त्रियों ने तो पहले ही देश में जीडीपी ग्रोथ के गिरने (GDP growth slips 5%) की संभावना जता दी थी।

 मोदीनॉमिक्स फेल!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा आर्थिक मोर्चे पर लिए गए कई फैसलों को लेकर इकनॉमिक्स एक्सपर्ट पहले ही उंगली उठाते रहे है

और अब आर्थिक वृद्धि दर छह साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचकर 5 फीसदी रह जाने को मोदीनॉमिक्स (Modinomics) का फेलियर बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार के किसी एक क्वार्टर में यह सबसे सुस्त रफ्तार है।

इससे पूर्व यूपीए सरकार के शासनकाल में किसी एक तिमाही में जीडीपी 4.9 फीसदी के निम्न स्तर पर थी।

तब वित्त वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि का यह निचला स्तर देखा गया था।

इतना ही नहीं, आरबीआई (RBI) ने भी वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अनुमान घटाकर 6.9 प्रतिशत रखा है।

जबकि पहले चालू वित्त वर्ष के लिए यह अनुमान 7 फीसदी रखा गया था।

वर्ष 2019-20 के अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 5 प्रतिशत होने से देश में आर्थिक मंदी (#EconomyCrisis) होने की पुष्टि हो चुकी है।

इसके कारण यूजर्स सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर एक से बढ़कर एक चुटीले और व्यंग्यकारी ट्वीट्स और इमोजी पोस्ट कर रहे है। आप भी देखें:

गौरतलब है कि आर्थिक वृद्धि दर का घटकर पांच प्रतिशत रह जाना, पिछले छह सालों से अधिक अवधि का

न्यूनतम स्तर है।

विनिर्माण क्षेत्र में गिरावट और कृषि उत्पादन की सुस्ती से जीडीपी वृद्धि में यह गिरावट आई है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है।

इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 की जनवरी से मार्च अवधि में देश की आर्थिक वृद्धि दर सबसे निचले स्तर 4.9 प्रतिशत पर रही थी। एक साल पहले 2018-19 की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर आठ प्रतिशत के उच्च स्तर पर थी। जबकि इससे पिछली तिमाही यानी जनवरी से मार्च 2019 में वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही थी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने जून में हुई मौद्रिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान सात प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया था। इसके साथ ही केन्द्रीय बैंक ने कुल मांग बढ़ाकर वृद्धि चिंताओं से निपटने पर जोर दिया था।

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर के 5.8 प्रतिशत से 6.6 प्रतिशत और दूसरी छमाही में 7.3 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान जताया है।

वर्ष 2019 की अप्रैल-जून अवधि में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही है जो पिछले 27 साल में सबसे कम रही।

(इनपुट एजेंसी से भी)

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