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मौन रहने वाले मनमोहन ने नोटबंदी पर खोला मुंह; नोटबंदी कानूनी डाका, भारतीय अर्थव्यवस्था गिर सकती है 2 फीसदी

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह(साभार-गूगल)

नई दिल्ली, 25 नवंबर: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि सरकार द्वारा की गई नोटबंदी एक ‘संगठित लूट व कानूनी डाका’ का मामला है तथा चेतावनी दी कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था में दो फीसदी की कमी आएगी। पूर्व प्रधानमंत्री ने यह कड़ी टिप्पणी तब की, जब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरोप लगाया कि भारत में अधिकांश काला धन साल 2004-14 के दौरान इकट्ठा हुआ, जब मनमोहन सिंह की गठबंधन सरकार थी।

पूर्व प्रधानमंत्री ने नोटबंदी तथा इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक असामान्य भाषण दिया।

ऑक्सफोर्ड तथा कैंब्रिज में शिक्षा पाने वाले अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह ने कहा, “जो भी किया गया है, उससे देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दो फीसदी तक कम हो सकता है। यह अनुमानित है और आंकड़ा इससे भी अधिक हो सकता है।”

उन्होंने कहा, “जो भी किया गया है, उससे देश के लोगों का करेंसी प्रणाली व बैंकिंग प्रणाली में विश्वास कमजोर व खत्म होगा।”

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रह चुके अर्थशास्त्री ने कहा, “यह अच्छी बात नहीं है कि बैंकिंग प्रणाली रोज एक नया नियम लेकर आए। इसका प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्री के कार्यालय तथा आरबीआई पर बुरा प्रभाव पड़ता है।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने मात्र सात मिनट तक संबोधित किया, जिसे पूरी राज्यसभा ने सुना, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व जेटली भी मौजूद थे। उनके संबोधन का विपक्ष ने स्वागत किया, जबकि सत्तापक्ष के कुछ लोगों ने भी अपना सिर हिलाकर उनका अभिनंदन किया।

उन्होंने कहा, “यह संगठित तथा कानूनी लूट का मामला है। मेरा इरादा इसपर हंगामे के लिए कारण ढूंढना नहीं है। मैं गंभीरतापूर्वक उम्मीद करता हूं कि देर होने के बावजूद प्रधानमंत्री एक समाधान ढूढेंगे।”

कई अर्थशास्त्रियों, विशेषज्ञों तथा थिंक टैंकों ने आने वाले वक्त में भारत के ग्रोथ के कम होने की आशंका जताई है और इस बीच मनमोहन सिंह की चिंता सामने आई है।

वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था 7.2 फीसदी रही, जबकि पूरे साल के हिसाब से यह 7.6 फीसदी रही।

उन्होंने सरकार को स्मरण कराया कि 90 फीसदी कार्यबल अनौपचारिक क्षेत्रों में हैं, जिनमें से 55 फीसदी कृषि क्षेत्र में हैं, जो फिलहाल बुरे दौर से गुजर रहा है।

उन्होंने कहा, “सहकारी बैंकिंग क्षेत्र कार्यरत नहीं है। जिस तरह से विमुद्रीकरण किया गया है, उससे कृषि व छोटे उद्योग प्रभावित होंगे।”

मोदी द्वारा लोगों को 50 दिनों तक बर्दाशत करने की अपील के खिलाफ उन्होंने जॉन मेनार्ड कींस की उक्ति का उद्धरण किया। उन्होंने कहा, “जो लोग कह रहे हैं कि दीर्घावधि के लिए नोटबंदी बढ़िया है, उन्हें यह बात याद रखनी चाहिए कि लंबे समय तक हम सब मारे जाएंगे।”

जेटली ने कहा, “यह निराशाजनक है कि यह बात वैसे लोग कह रहे हैं, जिनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा काला धन पैदा हुआ। उसी अवधि के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाल, 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला तथा कोयला ब्लॉक घोटाला हुआ।”

–आईएएनएस

 

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समय धारा

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