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34 साल बाद बदली शिक्षा नीति, “HRD मिनिस्ट्री” का नाम अब “शिक्षा मंत्रालय”

किसी कोर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ना संभव, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया

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नई दिल्ली (समयधारा) :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में कल शाम प्रधानमंत्री आवास पर केंद्रीय कैबिनेट (Union Cabinet) की बैठक हुई। 

इस बैठक में  34 साल बाद नई शिक्षा नीति (New Education Policy (NEP 2020)) को मंजूरी मिल गयी।

साल 2020 में वित्तीय बजट में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई शिक्षा नीति का ऐलान किया था।

उसी Education Policy को केंद्रीय कैबिनेट अनुमोदित कर सकती है।  इस नई शिक्षा नीति के तहत देश में शिक्षा के मायने को बदला जाएगा।

इससे न सिर्फ युवाओं को शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे, बल्कि रोजगार प्राप्त करने में भी आसानी होगी।

मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति पर मुहर लगा  दी l  34 साल बाद देश में (New Education Policy) आई है।

इस नयी शिक्षा नीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार है l 

#NEP2020 Targeting a 50% Gross Enrolment Ratio (GER) in higher #education by 2035. While a number of new institutions may be developed to attain these goals, a large part of the capacity creation will be achieved by consolidating/expanding/improving existing HEIs.
#NEP 2020

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  • किसी कोर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ना संभव होगा l 
  • शिक्षण संस्थाओं को दी जाएगी Graded Autonomy l
  • रुचि के हिसाब से हो सकेगा विषय का चुनाव l 
  • स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।
  • 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून
  • नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार (Right to Education) कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया

वित्त मंत्री ने कहा था कि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर शिक्षकों और अन्य सुविधाओं के लिए बड़े स्तर पर पूंजी जुटाई जाएगी।

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#NEP2020 Teachers will be recruited through robust and transparent processes. Promotions will be merit-based, and a mechanism will be developed for multi-source periodic performance appraisals.
#NEP 2020

इसी को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने एजुकेशन सैक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लाने का ऐलान किया था।

वित्त मंत्री ने बताया था कि मार्च 2021 तक देशभर में कुल 150 उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अपरेंटिसशिप प्रोग्राम (Apprenticeship Programe) शुरू किया जाएगा।

जहां तक शिक्षा में खेल को शामिल करने की बात है तो खेल मंत्री किरण रिजिजू ने अभी हाल में कहा था कि देश की नई शिक्षा नीति में खेल पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

HRD मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय  मानव संसाधन विकास मंत्रालय (Ministry of Human Resource and Development (MHRD)) ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि,

मंत्रालय का मौजूदा नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education (MoE)) कर दिया जाए।

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 Ministry of Human Resource Development ने रेगुलेटर बनाने का प्लान पहले ही तैयार कर लिया है।

#NEP2020 The medium of instruction (preferably) till Grade 8 & beyond, will be the home language/mother-tongue/local language/regional language. Starting from the Foundational Stage, children will be exposed to different languages with a particular emphasis on the mother tongue.
#NEP 2020

इस रेगुलेटर का नाम होगा- नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी अथॉरिटी (NHERA) या हायर एजुकेशन कमिशन ऑफ इंडिया।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण 1986 में किया गया था और 1992 में इसमें कुछ बदलाव किए गए थे।

इसके बाद तीन दशक गुजर गए हैं, लेकिन इसमें कुछ बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

यह 1986 की शिक्षा नीति की जगह लेगी। इसके तहत देश की शिक्षा व्यवस्था में अहम बदलावों को लागू किया जाएगा।

नई शिक्षा नीति में शिक्षा का अधिकार (Right to Eductaion) कानून के दायरे को व्यापक बनाया गया है।

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अब 3 साल से 18 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के अंदर लाया जाएगा।

इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा,

चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

अरसे बाद शिक्षा में बदलाव को लेकर सरकार ने बड़ी पहल की है और नई शिक्षा नीति को मंजूरी मिल गई है।

लेकिन ये नई शिक्षा नीति आपके और आपके बच्चों के लिए कैसे बड़े काम की है, 

कैसे युवाओं को इस नई नीति के तहत मिल पाएगी ग्लोबल लेवल की एजुकेशन।

#NEP2020 To provide equitable & inclusive education for all, Gender-Inclusion Fund will be set up by GoI. The fund will be available to States, to support & scale effective community-based interventions that address barriers to female & transgender children’s access to education.
#NEP 2020

नई शिक्षा नीति पर नजर डालें तो अब  किसी कोर्स की पढ़ाई बीच में छोड़ना संभव होगा।

छोड़ा हुआ कोर्स बाद में फिर किया जा सकेगा। बीच में पढ़ाई छोड़ने पर क्रेडिट प्वाइंट दिए जाएंगे।

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पढ़ाई दोबारा शुरू करने पर क्रेडिट प्वाइंट जुड़ेंगे। इसमें Multiple Entry Exit का प्रावधान होगा।

शिक्षण संस्थाओं को दी जाएगी Graded Autonomy

नई नीति में शिक्षण संस्थाओं को Graded Autonomy दिए जाने का प्रावधान है।

जितनी अच्छी ग्रेड, उतनी Autonomy दी जाएगी। उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ एक ही रेगुलेटर होगा।

डीम्ड और सेंट्रल यूनिवर्सिटी के लिए एक मानदंड होगा।

#NEP2020 In order to ensure equitable & inclusive education to all, tactical strategies will be made, and concrete steps will be taken for making quality higher education opportunities available to all individuals.
#NEP 2020

रुचि के हिसाब से हो सकेगा विषय का चुनाव

नई शिक्षा नीति  ने रुचि के हिसाब से विषय का चुनाव  किया जा सकेगा।

अब PCB या PCM का कॉम्बिनेशन जरूरी नहीं होगा।  शिक्षा में तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप भी होगा। GDP का 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। फीस की अधिकतम सीमा तय होगी।

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शिक्षा के लिए वर्चुअल लैब विकसित की जाएगी। देश की प्रमुख 8 भाषाओं में ई-कोर्स होंगे।शिक्षा पर खर्च करीब दोगुना करने का लक्ष्य है।

शिक्षा क्षेत्र में रेगुलेशन कम करने पर जोर दिया गया है। अलग-अलग रेगुलेटर की जगह सिर्फ एक रेगुलेटर होगा।

शिक्षा में तकनीक के ज्यादा इस्तेमाल पर जोर होगा।  5वीं तक अंग्रेज़ी की पढ़ाई नहीं होगी।

5वीं तक मातृभाषा, क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई होगी। 8वीं तक अंग्रेजी की पढ़ाई नहीं करने की छूट होगी।

नई नीति में क्या-क्या बदला इस पर नजर डालें तो..

अब PCB या PCM का कॉम्बिनेशन जरूरी नहीं होगा। 10+2 की बजाय अब 5+3+3+4 Curricular होगा।

यानी 9वीं से 12वीं तक एक तर्ज पर पढ़ाई होगी। साल में दो बार बोर्ड एग्जाम होंगे।

सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव दोनों तरह के सवाल होंगे। बोर्ड एग्जाम के सवाल व्यावहारिक ज्ञान पर  आधारित होंगे।

5वीं तक हिंदी या लोकल भाषा में पढ़ाया जाएगा। रिपोर्ट कार्ड में तीन तरह के मूल्यांकन होंगे।  प्ले स्कूल के लिए सिलेबस बनाया जाएगा।

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