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तमिल सिनेमा के शेर शिवाजी गणेशन लता जी के लिए भाई से बढ़कर थे

सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का कहना है कि ‘तमिल सिनेमा के शेर’  शिवाजी गणेशन उनके लिए सिर्फ भाई ही नहीं, बल्कि उससे बढ़कर थे। वह गायिका के पूरे परिवार को पसंद करते थे खासकर उनकी मां का  वह बहुत आदर करते थे।

दिवंगत अभिनेता को उनके 88 वें जन्मदिन पर याद करते हुए लता ने कहा, “वह मेरे लिए सिर्फ भाई ही नहीं थे, वह मेरे पूरे परिवार खासकर मेरी मां को बहुत मानते थे। 1960 के दशक में मेरे अधिकांश गीतों की रिकार्डिग चेन्नई में होती थी। मैं अक्सर वहां के स्टूडियो में रिकार्डिग करती थी। वह मेरे होटल में आकर अपने ड्राइवर से मेरा सामान उनके घर ले चलने के लिए कहते थे। मुझे उनके घर पर ठहरना पड़ता था। इस मामले में मेरे पास कोई विकल्प नहीं होता था। वह अद्भुत इंसान थे।”

गायिका ने बताया कि एक बार वह अपनी बहनों आशा, मीना, ऊषा और भाई हृदयनाथ के साथ चेन्नई के  मीनाक्षी मंदिर जाना चाहती थी। शिवाजी ने अपने मैनेजर, गाड़ी और ड्राइवर भेजकर सारा बंदोबस्त किया। उन्होंने उन लोगों को रात्रि भोजन पर आमंत्रित भी किया।

सुर साम्राज्ञी के मुताबिक, उनकी मां शिवाजी के हर नाटक का मंचन होने से पहले उनके लिए सूप भेजती थी और बदले में गायिका को अपने भाई बहन के साथ उनका नाटक देखने को मिल जाता था। एक बार वह अमेरिका जाने से पहले मुंबई आए और उनकी (लता जी की) मां ने उन्हें सोने की चेन दी थीं। वह उस सोने की चेन पहने हुए ही अमेरिका रवाना हो गए और देश लौटने पर सीधे उनके घर आए।

उन्होंने बताया कि होटल में रूकने पर भी उनके घर जाना और भोजन ग्रहण करना अनिवार्य था। कई बार वह गायिका को खुद या अपनी बेटी को भेज कर घर बुलाते थे। वह मंगेशकर परिवार के हर सदस्य के लिए हर साल दीवाली पर कपड़े भेजते थे। उन्होंने बताया कि अभिनेता को पिछली बार उन्होंने फिल्म ‘थेवर मगन’ (1992) में देखा था। अंतिम समय तक वह बेहतरीन अभिनेता रहें।

शिवाजी उनके खाने-पीने का खास ध्यान रखते थे। वह इस बात पर भी ध्यान देते थे कि गायिका को कौन सी चटनी डोसा के साथ परोसी जाएगी। शिवाजी अपने छोटे भाई के देहांत से बहुत दुखी रहने लगे थे। शिवाजी संयुक्त परिवार में यकीन करते थे। वह रूढ़िवादी भी थे। उनके छोटे बेटे प्रभु भी अपने पिता की तरह अभिनेता हैं।

यह पूछे जाने पर कि वह किस भाषा में बोलते थे तो लता ने बताया कि उनकी भाषा प्यार की भाषा थी, वह हिंदी ठीक-ठाक बोल लेते थे। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी पत्नी ने नौरत्न हार पहन रखा था और गायिका द्वारा प्रशंसा कर देने पर अभिनेता ने अपनी पत्नी से तुरंत ही वह हार उन्हें देने के लिए कह दिया । वह अभी भी उनका पसंदीदा आभूषण हैं और वह अक्सर उसे पहनती हैं।

फिल्म जगत में लता के रजत जयंती पूरी करने पर अभिनेता ने मुंबई जाकर उन्हें देवी सरस्वती की मूर्ति, एक सोने की चेन और एक विशेष फूलों की माला उपहार में दी थी।

गायिका को इस बात का अफसोस है कि वह शिवाजी से उनके निधन के पहले मुलाकात नहीं कर सकीं। भारत रत्न (2001) मिलने पर अभिनेता ने गायिका को फोन कर बधाई दिया था। उनके निधन की सूचना मिलने पर गायिका बेहद दुखी हुई उन्हें लगा कि उनका सब कुछ खो गया है।

जब भी वह मुंबई आते थे तो गायिका से ‘आनंद’  फिल्म का मराठी भक्ति गाना घनश्याम सुंदरा गाने के लिए कहते थे।

लता ने कहा, “उन्होंने कुछ फिल्मों में काम किया था, लेकिन वह अक्सर मुझसे कहते थे कि हिंदी फिल्म उनके लिए उपयुक्त नहीं है। वह हिंदी फिल्मों में असहज महसूस करते थे, हालांकि वह इससे दूर चले गए, लेकिन तमिल सिनेमा के वह शेर थे।”

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