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जानिए क्यों देखे दंगल

फिल्म दंगल (साभार-गूगल)

मुंबई २२ दिसंबर:   इस साल की सबसे चर्चित फिल्म है ‘दंगल’ l रेसलिंग चैंपियन की कहानी को सुनहरे परदे पर उतारा है आमिर खान ने l हमेशा से अपनी फिल्मो से समाज में एक मंगल काम की शुरवात या नीव रखी है आमिर खान ने और इस  फिल्म में गुमनामी के अँधेरे में खोये महिला रेसलिंग चैंपियन को समाज में एक उचित स्थान देने की कोशिश की है आमिर खान ने l और वह काफी हद तक कामयाब भी रहे है l 

फिल्म ‘दंगल’ की कहानी है हरियाणा के एक छोटे से गांव के भूतपूर्व नैशनल रेसलिंग चैंपियन महावीर सिंह फोगाट (आमिर खान) की। घर की कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से अपने रेसलिंग के करियर पर विराम लगा नौकरी चुनने वाले महावीर के सीने में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने की चाहत उसे हमेशा कचोटती है। अपनी गोल्ड मेडल जीतने की चाहत को वह अपनी बेटियों से पूरा करवाता है। पुरुष प्रधान समाज में बेटियों से पहलवानी करवाना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेटियों के गोल्ड मेडल जीतने की इस दिलचस्प कहानी में प्रेरणादायक मनोरंजन हैं l हमेशा से अपनी फिल्मो से समाज को एक नयी दिशा नयी सोच देने का काम किया है आमिर खान ने उनकी फिल्में हो या बहुचर्चित टीवी सीरियल ‘सत्यमेव जयते’ उन्होंने समाज की सोच को बदलने का काम किया है l

महावीर फोगाट की शादी शोभा कौर (साक्षी तंवर) से होती है। महावीर की चाहत है कि उसे एक बेटा हो, जो उनके लिए किसी इंटरनैशनल इवेंट से गोल्ड मेडल जीतकर ला सके। इसी चाहत में उन्हें चौथी बार भी बेटी ही होती है, जिसके बाद वह काफी दुखी हो जाता है। अचानक एक दिन उनकी दोनों बेटियां गीता ( ज़ायरा वसीम (बचपन का किरदार) और फातिमा सना शेख) और बबीता ( सुहानी भटनागर (बचपन का किरदार), सान्या मल्होत्रा) पड़ोस के बच्चों को बुरी तरह पीटकर आती है और यहीं से महावीर के मन में जगती है अपनी बेटियों को बेटा बनाने की चाहत। वह कहते नज़र आते हैं, ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम है के?’ यहीं से शुरुआत होती है उस लगन और मेहनत की जो महावीर को उसके मंजिल तक पहुंचाती है। हालांकि, यह सब कर पाना इतना आसान नहीं होता, काफी मुश्किलें सामने हैं, लेकिन महावीर हर परिस्थितियों पर बिल्कुल पहाड़ की तरह भारी नज़र आते हैं। उन्हें अपने चारों तरफ अपनी बेटियां और गोल्ड मेडल के आलावा कुछ और नहीं सूझता।

निर्देशक नितेश तिवारी ने महावीर फोगाट की बेटियों गीता और बबीता की ऐतिहासिक जीत की जगजाहिर कहानी के बावजूद फिल्म का बेहतरीन निर्देशन किया है। इसका स्क्रीनप्ले, डायलॉग और ट्रीटमेंट आपको पूरे समय बांधे रखता है। फिल्म के कई सीन जहां आपकी आंखों को नम कर देते हैं, वहीं बीच-बीच में इमोशन से भरपूर हरियाणवी डायलॉग हंसी और खुशी का सामंजस्य बना कर रखते हैं।

दंगल में आमिर खान ने महावीर फोगाट के रूप में जवान बेटियों के पिता बनने का किरदार बेहतरीन ढंग से निभाया है, उनकी बेटियों के किरदार में फातिमा सना शेख, सान्या मल्होत्रा, ज़ायरा वसीम और सुहानी भटनागर ने भी कमाल का अभिनय किया है। साक्षी तंवर और अपारशक्ति खुराना ने अपनी सहज अदाकारी से हर सीन में जान फूंक दी है।
फिल्म को देखने का एक सबसे बड़ा कारण है इंडिया l भारत में जहां पहलवानी पुरुष प्रधान खेल रहा है, वहीं रेसलिंग के इस खेल पर महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई यह बायॉपिक एक सराहनीय प्रयास है। इस फिल्म को बेहिचक पूरे परिवार के साथ देखा जा सकता है। शुरू में आमिर खान की ‘दंगल’ की तुलना सलमान खान की फिल्म सुल्तान के साथ की जा रही थी, जबकि सच यह है कि दोनों ही फिल्मों के बीच कोई तुलना नहीं है। यह फिल्म सलमान की फिल्म सुलतान से काफी अलग है l इस साल की सबसे अच्छी फिल्मो में अगर इस फिल्म का नाम लिया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होंगी l

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समय धारा

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