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Meena Kumari Birthday: Google Doodle ने मीना कुमारी को 85वें जन्मदिन पर सम्मानित किया,ऐसे बनी ‘ट्रेजडी क्वीन’

मीना कुमारी की पैदाइश के समय माता-पिता की माली हालत सही नहीं थी इसलिए जब वे पैदा हुई तो उनके पिता ने उन्हें मुस्लिम अनाथालय के बाहर छोड़ दिया

नई दिल्ली, 1 अगस्त: Meena Kumari  85th Birth Anniversary-  महान अभिनेत्री मीना कुमारी का आज 85वां जन्मदिन है और Google Doodle ने उन्हें याद करते हुए सम्मानित किया है। मीना कुमारी की अभिव्यक्तिपूर्ण आंखों और खूबसूरत चेहरे को कैप्चर करते हुए गूगल डूडल ने उन्हें समर्पित किया है।

मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त, 1933 (Meena Kumari  85th Birth Anniversary) को महाबिन बानो के रूप में हुआ था और उन्हें बॉलीवुड की ट्रेजडी क्वीन के रूप में जाना जाता है।

वह थिएटर कलाकारों के परिवार में पैदा हुई थी और चार साल की उम्र में ही अभिनय शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने करियर में लगभग 92 फिल्मों में अभिनय किया। पाकीजा, परिणीता, फुटपाथ, साहिब-बीबी और गुलाम व दिल एक मंदिर और काजल जैसी फिल्मों में उनका काम उल्लेखनीय है।

Meena Kumari 85th Birth Anniversary - Google Doodle remembers her
Meena Kumari Birthday: Google Doodle ने मीना कुमारी को 85वें जन्मदिन पर सम्मानित किया,ऐसे बनी ट्रेजडी क्वीन

मीना कुमारी की आवाज और आंखों में इतना दर्द था कि जब भी दर्शक पर्दे पर उन्हें रोता देखते तो उनकी आंखों से भी आंसू निकल आते थे। संभवत: इसी कारण उन्हें ट्रेजडी क्वीन कहा जाने लगा था।

मीना कुमारी की निजी जिंदगी भी कम दुखों से भरी नहीं रही। उन्होंने ताउम्र संघर्ष किया और दुख झेला। इसलिए ट्रेजडी क्वीन का टैग उनपर सटीक भी बैठता है।

अभिनेत्री मीना कुमारी का आज जन्मदिन है

साल 1962 में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘साहिब बीवी और गुलाम’ के लिए उन्होंने शराब पी थी और इसके बाद उन्होंने असल जीवन में भी बहुत शराब पीना शुरू कर दिया था। उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं थी और न पति और न ही पिता का प्यार नसीब हुआ था। इन्हीं वजहों ने उन्हें शराब की तरफ मोड़ा। बेइंतहा शराब की लत ने मीना कुमारी का स्वास्थ्य पूरी तरह बिगाड़ दिया और आखिरकार ये ट्रेजडी क्वीन देशभर को जिंदगीभर की ट्रेजडी देकर 31 मार्च 1972 को इस दुनिया को अलविदा कहकर चली गई। मीना कुमारी की मौत लीवर सिरोसिस के कारण हुई थी।

अभिनेत्री मीना कुमारी

मीना कुमारी की पैदाइश के समय माता-पिता की माली हालत सही नहीं थी इसलिए जब वे पैदा हुई तो उनके पिता ने उन्हें मुस्लिम अनाथालय के बाहर छोड़ दिया लेकिन फिर थोड़ी देर बाद जब उनको आत्मग्लानि हुई तो उन्होंने मीना कुमारी को कुछ घंटे बाद वापस वहां से उठा लिया। मीना कुमारी असल में मुस्लिम परिवार में जन्मी थी। उनके माता-पिता का नाम इकबाल बेगम और अली बक्श था। मीना कुमारी से पहले उनकी दो बड़ी बहनें इरशाद और मधु भी थी। मीना के जन्म के समय पिता के पास डॉक्टरों की फीस चुकाने के लिए भी पैसे नहीं थे इसलिए ही उन्होंने मीना को त्यागने का निर्णय लिया था जिसे बाद में वापस ले लिया था।

मीना कुमारी पढ़ना चाहती थी लेकिन पिता ने उन्हें बचपन से ही फिल्मी दुनिया में धकेल दिया था। उन्होंने पिता से कहा भी था कि मैं पढ़ना चाहती हूं लेकिन पिता ने महज 7 साल की उम्र में उन्हें कमाई का ज़रिया बना दिया। फिल्मों में आकर ही नन्हीं महजबीन मीना कुमारी बन गई।

फिल्म छोटी बहू के रोल के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला।

‘दिल एक मंदिर’ (1963), ‘काजल’ (1965), ‘फूल और पत्थर’ (1966) भी उनकी चुनिंदा सफल फिल्मों में से हैं. 1964 में पति कमाल अमरोही से तलाक के बाद उनकी शराब की लत और भी बढ़ गई. शराब के कारण 1968 में मीना कुमारी बहुत ज्यादा बीमार हो गईं और उन्हें इलाज के लिए लंदन व स्विटजरलैंड ले जाना पड़ा. बाद में ठीक होकर आने पर उन्होंने कैरेक्टर रोल करने लगीं।

मीना कुमारी की जिंदगी का दर्दनाक वाक्या यह है कि जिस तंगहाली से अपने परिवार को बाहर निकालने के लिए उन्होंने अपना बचपन खो दिया। फिल्मों में इतना नाम और शोहरत कमाने के बावजूद भी वे अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले ही वापस उस तंगहाली में पहुंच चुकी थी। आलम यह था कि आखिरी दिनों में जब उनकी मौत एक नर्सिंग होम में हुई तो अस्पताल का बिल चुकाने तक के पैसे नहीं थे।

अभिनेत्री के साथ ही वो एक अच्छी उर्दू शायरा भी थीं।

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