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6 दिसंबर, जिस तारीख ने बदला भारत का भविष्य

(6 दिसंबर 1992 – 6 दिसंबर 2016) :  24 साल गुजर गए l पर आज भी भारत माँ की धरती पर यह तारीख एक नासूर बन कर सीने में चुभती है l क्या हिन्दू क्या मुस्लिम सिर्फ इस दिन ने भारत की धर्मनिरपेक्षता पर गहरा व न मिटने वाला निशान छोड़ दिया l रह रह कर जब भी साल में यह दिन आता है न जाने क्यु दर्द छलक आता है l इतिहास  में ऐसी बहुत कम तारीखे होती है जो भविष्य को बदल सके और 6 दिसंबर भी उन्ही तर्खो में से एक है l

कभी कभी अपने आप को समझाता हु की तू हिन्दू होकर भी इतना दुखी क्यु है l हिन्दू लोग तो इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाते है और में दुखी हु…? पर यहाँ बात हिन्दू या मुसलमान से पहले यह आती है की में एक भारतवाशी हु l भारत का रहने वाला हु l और भारत के लोग तो धर्मनिरपेक्ष है फिर हिन्दू मुसलमान की बात क्यु..? किसलिए…? क्या कुछ लोगो की वजह से मेरे देश को पुरे विश्व में शर्मशार नहीं होना पड़ा…? और एक हिन्दुस्तानी होने की वजह से मुझे दुःख है l? और हम हिन्दू धर्म की कौनसी विरासत को संभल रहे है..? है बहुत से सवाल मेरे मन में आपके मन में…? जब कभी हम लेख लिखते है हमारे सोचने समझने की शक्ति एक उस शख्स की तरह हो जाती है जो शख्स इसे पड़ेगा और वह है कौन आप और हम मतलब एक हिन्दुस्तानी ….? त

जो में लिख रहा हु वह सच के कितना करीब है ..? क्या यह आपको हमको या पुरे हिन्दुतान के लोगो से इतेफाक रखता है …? शायद हा शायद नहीं l जवाब देना मुस्किल है फिर आ जाता हु में अपने मुद्दे पर क्यु 6 दिसंबर की व्याख्या को हम बदल ने दे कुछ ऐसा करे की हमें भारतीय(हिन्दुस्तानी) होने पर और गम हो एक सच्चा हिन्दुस्तानी एक भारतीय एक मुसलमान या हिन्दू नहीं होता l आज बहुत से लोग/लेख आपको इतिहास बताएँगे l यह बताएँगे की क्या हुआ था इस दिन सब अपनी सहूलियत के हिसाब से अपनी अपनी बात रखेंगे l पर सवाल वही है की 6 दिसंबर को हम क्यु बदल नहीं सकते l

समयधारा इस लेख के द्वारा आपको एक सुझाव देना चाहता हैl अगर आप सच में देश के लिए कुछ करना चाहते है तो कृपया करके 6 दिसंबर की यह तारीख को मुसलमान लोगो के दिल से निकाल दे l अगर आप किसी का अच्छा नहीं कर सकते तो आपको किसीका बुरा करने का कोई हक़ नहीं l ठीक उसी तरह आप अगर किसीको प्यार नहीं दे सकते तो उससे नफरत करने का भी आपको हक़ नहीं l बाबरी मस्जिद हो या राम लला मंदिर l सब बस एक है, क्या हासिल हुआ है हमें इन 24 सालो में कभी जाकर देखा है किसीने की अयोध्या का क्या हाल है l किसे पता है की वहा के लोगो के लिए किस तरह इस तारीख ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी…? बहुत से ऐसे पहलु है जिसे अब गौर करने की जरुरत है l मेरे प्यारे समझदार पाठको को समयधारा नम्र विनती करता है की कृपया करके आप कल के दिन को इतना ज्यादा न कुरेदे की फिर हम जहा से चले थे वही आ जाए l खुश रखोंगे तो कुश रहोगे l

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समय धारा

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