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लोकसभा चुनाव 2019: राजीव गांधी को मुद्दा बनाना मोदी की मजबूरी !

मोदी को उम्मीद है राजीव गांधी लगाएंगे बेड़ा पार!

Editor Opinion on Modi’s necessity to make Rajiv Gandhi political issue- लोकसभा चुनाव 2019 (LokSabha Election 2019) में छठे चरण का मतदान 12 मई रविवार को होने जा रहा है। मतदाताओं को लुभाने के लिए चुनावों में भाजपा,कांग्रेस,सपा,बसपा,आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर वार-प्रतिवार करते दिख रहे है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi political issue) को यकायक चुनावी मुद्दा बना डाला है।

पांच चरण के मतदान तक पीएम मोदी लोकसभा चुनाव सबसे पहले राष्ट्रवाद और फिर हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ रहे थे लेकिन छठा चरण आते-आते पीएम मोदी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर एक से बढ़कर एक गंभीर आरोप लगाते देखे-सुने जाने लगे। पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को घेरने के लिए उनके स्वर्गीय शहीद पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर कहा कि उनकी मौत एक भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में हुई।

इससे राहुल गांधी,प्रियंका गांधी आहत भी हुए और उन्होंने ट्वीट करके कहा भी कि अब पीएम मोदी के कर्म ही उन्हें जवाब देंगे। लड़ाई खत्म हो चुकी है। इतना ही नहीं, मोदी के इस आरोप से देश की जनता और विभिन्न दलों के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के बीच भी खासी नाराजगी और असहमति है।

चूंकि राजीव गांधी की हत्या लिट्टे आतंकवादियों द्वारा आत्मघाती हमले के द्वारा की गई थी। ऐसे में एक शहीद प्रधानमंत्री पर उनके अंतिम दिनों को लेकर मोदी की बयानबाजी राजनीति के गिरते स्तर को तो दिखाती ही है साथ ही ये भी बताती है कि आखिर रोजगार,भ्रष्टाचार,विकास,आतंकवाद,महिला सुरक्षा और किसानों के मुद्दे छोड़कर केवल गांधी परिवार और राजीव गांधी को मुद्दा बनाना मोदी की कितनी बड़ी मजबूरी है।

जी हां, राजीव गांधी को चुनावी मुद्दा बनाना पीएम मोदी की राजनीतिक मजबूरी ही (Modi’s necessity to make Rajiv Gandhi political issue) है। अपनी इसी मजबूरी का निर्वाहन करते हुए मोदी यहीं तक नहीं रुके बल्कि दिल्ली में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि INS विराट युद्धपोत का इस्तेमाल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने परिवार व विदेशी मेहमानों के साथ पिकनिक मनाने के लिए एक ‘निजी टैक्सी’ की तरह किया था।

इस सनसनीखेज आरोप से राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच खलबली मच गई और इसी बीच पीएम मोदी के इस आरोप का मुंहतोड़ जवाब देने सामने आ गए पूर्व नेवी चीफ। पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास ने एक पत्र दिखाते हुए कहा कि पीएम मोदी का आरोप सरासर झूठा है और एक जुमला है।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी INS विराट पर सरकारी दौरे से गए थे न कि पिकनिक मनाने। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के साथ कोई विदेशी मेहमान नहीं था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी आईएनएस विराट पर राष्ट्रीय खेल पुरस्कार वितरण समारोह के लिए अपनी पत्नी श्रीमती सोनिया गांधी के साथ गए थे जोकि प्रोटोकॉल के अनुरूप ही था।

राजीव गांधी के किसी निजी कार्यक्रम के लिए आईएनएस विराट का निजी टैक्सी के रूप में इस्तेमाल नहीं किया गया। पीएम मोदी का आरोप सरासर जुमला है। पूर्व नेवी चीफ ने पीएम मोदी पर सेना के लिए निजी टैक्सी सरीखे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने पर भी नाराजगी जताई है।

खैर, पूर्व नेवी प्रमुख ने तो INS विराट को लेकर राजीव गांधी पर लगाएं गए पीएम मोदी के आरोपों को खारिज कर दिया। तो क्या अब पीएम मोदी या भाजपा स्वर्गीय राजीव गांधी पर राजनीति बंद कर देगी? बिल्कुल नहीं!

 Lok Sabha Elections 2019: Modi's necessity to make Rajiv Gandhi political issue!

नेवी प्रमुख का बयान सामने आने पर भले ही अभी भाजपा और मोदी बैकफुट पर दिख रहे है लेकिन उनके तेवर यहीं नहीं रूके चूंकि भाजपा ने इसके बाद 1984 सिख दंगों को लेकर भी राजीव गांधी पर आरोप मढ़े है और कहा है कि नानावटी आयोग की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 1984 में सिख विरोधी दंगों का आदेश पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ऑफिस से दिया गया था।

जबकि तथ्य और सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। नानावटी आयोग की रिपोर्ट में ऐसा कहीं भी नहीं कहा गया है। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘राजीव गांधी देश में सिख विरोधी हिंसा से चिंतित थे और उन्होंने या कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता ने सिख विरोधी दंगों को न तो संगठित किया और न ही इसका सुझाव दिया था। इस हिंसा में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का हाथ रहा और इसके पीछे उनकी अपनी राजनीतिक वजहें थी। इसलिए पीएमओ ऑफिस से सिख विरोधी दंगे प्राययोजित किए गए थे ये आरोप सरासर खारिज किया जाता है।’

अब सवाल उठता है कि जब खुद मोदी और भाजपा राजीव गांधी को लेकर अपने तकरीबन हर आरोप पर झूठी साबित होती दिख रही है तो फिर क्यों मोदी नित भाजपा बार-बार राजीव गांधी से जुड़े मुद्दों को वर्तमान के लोकसभा चुनाव (LokSabha Election 2019) का मुद्दा बना रही है?

क्या खुद भाजपा या मोदी को इसका आभास नहीं है कि इससे देश की जनता के बीच उनकी छवि एक जुमलेबाज और झूठे प्रधानमंत्री की बनती जा रही है?

तो विशेषज्ञों की राय में ऐसा नहीं है। मोदी अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत राजीव गांधी को वर्तमान की राजनीति का मुद्दा बनाएं हुए है।

क्या है ये रणनीति?-Editor Opinion on Modi’s necessity to make Rajiv Gandhi political issue

बिकाऊ मीडिया की बात छोड़ दी जाएं तो ये बात किसी से छिपी नहीं है कि मोदी सरकार तकरीबन हर क्षेत्र में नाकाम साबित हुई है। फिर चाहे कालेधन के नाम पर नोटबंदी की गई हो या फिर जल्दबाजी में जीएसटी लाकर देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ी गई हो। पुलवामा हमला भी सुरक्षा में चूक के चलते हुए और एक सोची-समझी रणनीति के तहत देश को युद्ध की आग में झोंकने की कोशिश हुई और सेना का श्रेय खुद मोदी ले गए।

इतना ही नहीं, देश को मजबूत बनाने वाले युवाओं को बेरोजगार करने में मोदी सरकार ने पिछले 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया और देश में पिछले 45 साल में बेरोजगारी इस समय सबसे उच्च रिकॉर्ड स्तर पर है। जबकि मोदी ने 2014 में प्रतिवर्ष 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था।

इतना ही नहीं,रसोई गैस के बढ़ते दाम,पेट्रोल-डीजल की कीमत को उस समय भी ऊंचा रखना जब विदेशी मार्केट में वे सस्ते दामों पर बेचे जा रहे थे और किसानों को फसलों का उचित मूल्य न दिला पाना…सरीखे बहुत से महत्वपूर्व मुद्दे है,जिनपर से मोदी सरकार देश की जनता और मीडिया का ध्यान हटाना चाहती है।

इन सभी मुद्दों में से एक सबसे विवादास्पद और महत्वपूर्ण मुद्दा है राफेल डील का। जिसे लेकर राहुल गांधी लोकसभा चुनावों में भी ‘चौकीदार चोर है’ के नारे लगवा रहे है और देश की जनता को बता रहे है कि कैसे अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाकर कथित ‘राफेल घोटाला’ किया गया…ये केस फिलहाल पुन: सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

ऐसे में मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अपना चुनावी मुद्दा पहले तो राष्ट्रवाद को बनाया और पुलवामा शहीदों व बालाकोट स्ट्राइक के नाम पर देश की जनता से वोटों की अपील की। जबिक उन्हें जवाब देना चाहिए कि 300किग्रा. से ज्यादा का आरडीएक्स सिविल गाड़ी में सीआरपीएफ कैंप के इलाके में पहुंचा कैसे? सुरक्षा एजेंसियों के अलर्ट करने पर भी पुलवामा में आतंकी हमला हुआ कैसे? ये सब इंटेलीजेंस फेलियर नहीं है तो क्या है?इसके बाद मोदी ने चुनावी मुद्दा हिंदुत्व को बनाया और आतंक की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से टिकट दे दिया।

अब छठे चरण के लिए पीएम मोदी और भाजपा ने मुद्दा राजीव गांधी को बनाया है ताकि देश की जनता, मीडिया और खुद विपक्ष भी मुख्य मुद्दों पर बात न करके अतीत की कब्रें ही खोदता रहें और पीएम मोदी अपनी इस रणनीति में काफी हद तक सफल होते भी दिख रहे है। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए जहां जनता,मीडिया और विपक्ष के बीच मुद्दे रोजगार,भ्रष्टाचार,विकास,सुरक्षा,किसान और जवान,महंगाई होने चाहिए वहां अब मुद्दा स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी बन गए है।

मोदी बड़ी ही चतुराई से 28-30 साल पुराने मुद्दों को लाकर देश की जनता का ध्यान प्रमुख मुद्दों से हटा रहे है और बहस के केंद्र में वे मुद्दे ला रहे है जिनका वर्तमान में देश की दिशा और दशा से कुछ लेना-देना नहीं है। मोदी का ऐसा करना उनकी राजनीतिक मजबूरी है चूंकि राजीव गांधी या गांधी परिवार पर निशाना साधकर ही वे अपनी नाकामियों को छिपा सकते है।

वर्ना एक ऐसा प्रधानमंत्री जिसे देश की जनता ने इतना प्यार दिया कि उसने 2014 में पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया। पूर्ण बहुमत के साथ विकास के नारे के दम पर सत्ता के सिंहासन पर बैठकर नरेंद्र मोदी एक से बढ़कर एक सराहनीय कार्य कर सकते थे लेकिन उन्होंने एक से बढ़कर एक असहनीय कार्य ही किए और अब जब पांच साल बाद खुद को मजबूत समझने वाले प्रधानमंत्री को अगले पांच सालों के लिए जनता से वोटों की भीख मांगनी है तो वो अपने पांच सालों के कार्यों के बल पर न मांगकर उन मुद्दों और राजीव गांधी पर मांग रहे है… जिनका अस्तित्व ही आज से तकरीबन 30-35 साल पहले खत्म हो चुका है।

मोदी ने जब पांच साल पहले 2014 में कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा था तो जनता ने उन्हें सिर-माथे पर बिठाकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचा दिया था लेकिन अब पांच साल का सफर तय करने के बाद भी जब मोदी के मुंह से केवल गांधी परिवार और राजीव गांधी सें जुड़े मुद्दों पर ही बयानबाजी होती दिख रही है तो इससे जनता उकता चुकी है। इतना ही नहीं अतीत के मुद्दों को उछालकर वर्तमान के मुद्दों पर ध्यान भटकाने की मोदी की रणनीति से स्प्ष्ट हो जाता है कि पीएम मोदी जानते है कि उन्होंने पांच साल देश में कुछ काम नहीं किया। दिल्ली के दिल में 1984 के दंगे वो जलता अंगार है जिसे वापस धधकाने पर ही मोदी को लगता है कि वे सत्ता हासिल कर सकेंगे। चूंकि उनका नफरत और हिंसा का गुजरात का मॉडल हमेशा काम करता रहा है।

और अब अपनी नाकामियों को छिपाने का चतुर तरीका है- गढ़े मुर्दे उखाड़ना, नफरत का मॉडल तैयार करना और देश की जनता,मीडिया और विपक्ष के बीच से आम आदमी से जुड़े मुख्य मुद्दों- बेरोजगारी, भ्रष्टाचार,व्यापार,हिंसा,महंगाई,किसान और विकास को गुल कर देना।

अब ये जनता पर है कि वे पीएम मोदी की ‘राजीव गांधी’ नामक फेंकी गई मुद्दाहीन बॉल पर खेलते है या फिर ‘वर्तमान के मुद्दों’ को यादकर उन्हें आउट कर देते है।

 

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