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विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस-क्या भारत में बुजर्गों की जगह है.? है तो कहाँ.?

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नई दिल्ली, 15 जून (समयधारा) : आज हम विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस मना रहे है l

यह विश्व के उन तमाम बुजुर्ग लोगों के लिए मनाया जाता है जिनके साथ दुर्व्यवहार होता है l

क्या हमारे महान भारत में बुजुर्गों की जगह है..? है तो कहाँ ..?

आज भारत विकसित देशों में शुमार हो गया है। वह विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है l

पर हमारे भारतीय समाज में बुजुर्गों की दुर्दशा उनके साथ दुर्व्यवहार भी बुरी तरह से हो रहा है l

कई सारे उदाहरण आपके सामने मैं अभी दूंगा l जिससे उनके साथ हुई नाइंसाफी साफ़ नजर आएगी l

चलियें शुरुआत करते है, सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी से। बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने

किसी भी बुजुर्ग सांसद या नेता को,  जो 70  साल से ऊपर है,  उन्हें टिकट नहीं दिया l

यहाँ पार्टी में उनके साथ हुआ दुर्व्यवहार कहा जा सकता है l

इसमें लालकृष्ण आडवाणी – मुरली मनोहर जोशी – सुमित्रा महाजन इत्यादि नाम शामिल है l

एक तरह से मोदी सरकार ने दुर्व्यवहार किया, यूँ कहे सम्मान के साथ दुर्व्यवहार किया l 

समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक शोषण किसे से छिपा नहीं है l

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अब बात करते है बिज़नेस घराने से तो अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत बड़े उद्योगपति को उसके बेटे ने घर से निकाल दिया l

आप समझ गए होंगे मैं किस की बात कर रहा हूँ … जी हाँ रेमंड ग्रुप के सिंघानिया घराने के विजयपथ सिंघानिया की।

वे आज मुंबई में एक किराये के घर में रह रहे है l उनके अपने बेटों ने उन्हें घर से अलग कर दिया..! अब वह क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे है l

और अगर बात करें हम जैसे-आप जैसे आम इंसानों की, तो कई किस्से सोशल मीडिया पर समाचारों में मिल जायेंगे l

पिछले दिनों गुजरात में एक बेटे ने अपनी बूढी माँ को छत पर से धक्का दे दिया l

एक बेटे-बेटी ने अपने बूढ़े माँ-बाप की सारी जायदाद अपने नाम कर उन्हें घर से निकाल दिया l

आप अगर किसी वृद्धा आश्रम में जायेंगे तो ऐसे कई सारे किस्सें मिल जायेंगे, जिससे  इन बुजुर्गों की हालत के बारें में आपको पता चलेगा l

आज मैं अपने एक जानने वाले का किस्सा सुनाता हूँ l

मेरी एक मित्र है जिसका नाम शिविका है (बदला हुआ नाम) l

शिविका के 8 भाई-बहन है l वह सबसे छोटी है,  मतलब की शिविका के परिवार में कुल 11 लोग है l

शिविका के मम्मी-पापा, दो भाई व शिविका को मिलाकर कुल 7 लड़कियां l

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वह दिल्ली के चांदनी चौक के एक घर में रहते थे l शिविका के पापा की एक छोटी सी दुकान थी l

जिससे, उसने अपने सभी बच्चों को अच्छी परवरिश व शिक्षा दी और उन्हें समाज में मान-सम्मान दिलाया l 

शिविका के पापा (हीरालाल) ने अपनी बड़ी बेटी-सीता, बेटे-सोहन, बेटी-हेमा, बेटी-लज्जों, बेटी-शांता व बेटी-अरुणा का विवाह कर दिया l 

समय का चक्र घुमा और शिविका के पापा का देहांत 1998 में हो गया l

पापा के देहांत के बाद शिविका व उसकी मम्मी पर जैसे दुखों को पहाड़ ही टूट गया l पापा के मरने से दुखी शिविका डिप्रेशन में चली गयी l

शिविका के बड़े भाई सोहन (बदला हुआ नाम) ने चांदनी चौक का घर अपनी एक बहन को दे दिया l

सोहन ने पापा की जमीनों को औने-पौने दामों में बेचकर शिविका व उसकी मम्मी (सुशीला) को कालकाजी में एक DDA का घर खरीदकर दे दिया l

व खुद दूर एक उत्तर प्रदेश में एक आलिशान कोठी में शिफ्ट हो गया l

शिविका अपनी मम्मी व एक बड़ा भाई व बहन के साथ कालकाजी के घर में शिफ्ट हो गयी l

शिविका डिप्रेशन में थी उसे पता ही नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है l सबसे पहले शिफ्ट होते ही उसकी बड़ी बहन रवीना ने शादी कर ली l

फिर उसके बाद उसका बड़ा भाई सुनील अमेरिका चला गया l अब शिविका और उसकी माँ सुशीला घर में अकेले रह गए l

जो बेटा सुनील अमेरिका चला गया,  वह कुछ सालों बाद शादी कर, अमेरिका अपनी पत्नी को लेकर चला गयाl 

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अब इस सच्ची कहानी की शुरुआत होती है l शिविका जो डिप्रेशन में थी वह करीब-करीब 10 साल तक डिप्रेशन में रही l

इन 10 सालों के दौरान उसकी खोज-खबर लेने कोई नहीं आया l वह अकेले ही अपनी माँ और खुद का ध्यान रखती थी l

हालात बदले शिविका डिप्रेशन से बाहर आई l उसने दुनियादारी सीखी, मम्मी और अपना और अच्छें से ध्यान रखना शुरू कर दिया l 

इस बीच उसकी मम्मी की हालात खराब हुई और मम्मी के घुटनों में प्रॉब्लम आ गयी l जिसके वजह से वह अपाहिज हो गयी l

वॉकर के बिना अब सुशीला का चलना मुश्किल था l शिविका के भाई-बहन सब अपनी-अपनी लाइफ में मस्त थे l

कोई भी शिविका की खबर लेने या वो क्या कर रही है इसके बारें में जानने को उत्सुक नहीं था l

शिविका ने एक बड़ी फर्म में काम करना शुरू कर दिया था l पर माँ की हालत की वजह से उसे बार-बार काम छोड़ना पड़ा l

कई अलग-अलग जगहों पर शिविका ने काम किया l  

शिविका के ऊपर काम के साथ-साथ अपनी माँ सुशीला की भी जिम्मेदारी अब और बढ़ गयी l शिविका की उम्र बढ़ती जा रही थी l 

कोई भी उसके लिए चिंतित नहीं था l सब के काम आसानी से हो रहे थे क्योंकि शिविका माँ की जिम्मेदारी संभाल रही थी l 

इसलिए बाकि सभी 8 बच्चों ने माँ की चिंता नहीं की l

जब सोहन(बड़ा बेटा) से माँ के ख्याल रखने की बात होती तो वह कहता यह जिम्मेदारी सुनील(छोटा बेटा) पर है वो ध्यान रखेगा l

सुनील हर महीने खर्चे के लिए एक रकम भेज देता और अपना फर्ज पूरा कर लेता l

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बाकि बहनें नाम के लिए आती और शिविका व अपनी मम्मी का हालचाल पूछकर चली जाती l

अगर शिविका की बहनों की बात करें तो उसकी छह बहनों में से सिर्फ सबसे बड़ी बहन सीता ही शिविका और मम्मी का ध्यान रखती थी l

सीता के दो बेटे थे l इसलिए उसका शिविका के प्रति लगाव था l  समय बदलता गया l

उसके भाइयों और बहनों ने शिविका की शादी के बारे में कभी नहीं सोचा l

शिविका को कुछ उसके दोस्तों ने और डॉक्टर्स ने सलाह दी कि अब उसे घर बसा लेना चाहियें l पर शिविका इन सब पचड़े में नहीं फंसना चाहती थी l

पापा के गुजरने के बाद 10 साल तक डिप्रेशन में रहने वाली शिविका किसी भी कीमत पर अपनी माँ से दूर नहीं होना चाहती थी l

पर जब उसको दोस्तों ने यह बताया की तेरा परिवार तुझे इस्तेमाल कर रहा है l

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वह तेरी शादी इसलिए नहीं करवाना चाहते की तुझे शादी में रूचि नहीं है बल्कि अगर तेरी शादी हो गयी तो तेरी माँ का ध्यान उन्हें रखना पड़ेगा l 

इस वजह से वह तेरी शादी नहीं करवाना चाहते l एक बार तो शिविका को विश्वास ही नहीं हुआ कि उसके भाई-बहन

जो उसकी नजर में उससे बहुत प्यार करते थे वह उसे सिर्फ मम्मी के लिए कुंवारा रखना चाहते है l

शिविका ने सोचा क्यों न मैं भाइयों को आजमां कर देखूं l उसने अपने भाइयों से शादी की बात की l

जैसे ही शिविका ने अपनी शादी की बात की वैसे ही उसके भाइयों ने कहा की तू शादी के लिए सोच भी कैसे सकती है ?

तुझे तो अपने करियर पर ध्यान देने की जरुरत है l अगर तूने शादी कर ली तो मम्मी का ध्यान कौन रखेगा…!! वगैरह-वगैरह l

यह सुन शिविका के पैरों से जमीन निकल गयी l जिन भाइयों और बहनों को उसने इतना प्यार किया वो उसके लिए ऐसा सोचेंगे उसने नहीं सोचा था l

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अब शिविका ने सच में अपने लिए लड़के की तलाश शुरू कर दी l

इस बीच एक और घिनौना चेहरा उसके सामने घर के एक ऐसे सदस्य का आया जिससे वह पूरी तरह हिल गयी l

उसकी माँ सुशीला भी नहीं चाहती थी की वह शादी कर ले l क्योंकि अगर शिविका की शादी हो गयी तो उसका ध्यान कौन रखेगा ?

स्वार्थ में शिविका के घर वाले अंधे हो गए थे l शिविका टूट गयी थी l

पर 10  साल डिप्रेशन में रहने वाली लड़की इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं थी l

उसने दिसम्बर 2015 से लड़के देखने शुरू कर दियें l अब शिविका की लाइफ में बहुत सारे प्रॉब्लम आने शुरू हो गए l

माँ चाहती थी की शिविका दिल्ली का लड़का ढूंढे और ऐसा लड़का ढूंढें जो घर जमाई बनकर  रहें l

शिविका ने काफी अच्छे लड़कों की प्रोफाइल को सिर्फ माँ की वजह से ‘ना’ कर दिया l समय ने फिर गुलाटी मारी l

शिविका जहाँ काम करती थी उस ऑफिस में उसे परेशान किया जाने  लगा l 

वह परेशान थी … इन्ही परेशानियों के बीच उसकी लाइफ में मुंबई से एक लड़के का रिश्ता आया l यह लड़का श्रवण कुमार था l

इस लड़के ने पहले आकर शिविका के ऑफिस की परेशानियों को दूर किया l

फिर शिविका से व उसके घर वालों से शिविका से शादी करने की इच्छा जताई l

मुंबई के लड़के को हाँ कैसे करें यह दुविधा शिविका के मम्मी को सता रही थी l वह इस रिश्ते को हां नहीं करना चाहती थी l

शिविका का भाई सुनील भी यह नहीं चाहता था l पर शिविका ने जैसे ठान लिया था कि इस रिश्तें को वह ‘ना’ नहीं  कहेंगी l

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उसने श्रवण से अपनी परेशानियों के बारे में और मम्मी के बारें में बताया l

श्रवण ने अपने माता-पिता से इसके बारें में बात की तो वह शादी के बाद शिविका की माँ को अपनाने को तैयार हो गए l 

शिविका  और श्रवण की  सगाई हो  l समय बिता l श्रवण ने शिविका के साथ एक नया कारोबार शुरू किया l

वह शिविका को चाहता था l इसलिए उसने अपने मुंबई के सारे काम-काज बंद कर l 

दिल्ली में शिविका के साथ एक नया कारोबार शुरू किया। 2016 से 2017 तक श्रवण दिल्ली में अपने दोस्त के यहाँ रहा।

फिर कुछ समय बाद वह शिविका की मां के आग्रह करने पर वो सगाई के बाद शिविका के घर में ही रहने लगा l श्रवण शिविका की माँ का बड़ा ध्यान रखता था l 

शिविका की माँ को श्रवण अच्छे से अच्छे डॉक्टर के पास ले जाता और एक आज्ञाकारी लड़के की तरह उनकी सेवा करने लगा l

यहाँ पर शिविका की शादीशुदा बहनों व उनके पतियों को श्रवण के रहने  की आग लगने लगी l

उन्होंने पूरे घर में यह फैला दिया की श्रवण को इस घर का लालच है और वो शिविका को बर्बाद कर देगा l

उनका सोचना भी सही था कि कोई लड़का कैसे सिर्फ सगाई करके इस कलयुग में श्रवण कुमार बनकर काम कर सकता है?

पर सच में ऐसा  ही था। एक जैन परिवार से आने वाले श्रवण के लिए इंसानियत  ज्यादा मायने रखती थी l

श्रवण ने कभी भी उनकी बहनों की इन बातों का बुरा नहीं माना l पर शिविका की माँ सुशीला अपने स्वार्थ के वशीभूत श्रवण को नहीं चाहती थी l

उसे यही लगता था की वह (श्रवण) मेरी बेटी शिविका, जो मुझे पाल रही है, उसे शादी करके ले जाएगा l

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इसी इनसिक्योरिटी की वजह से उसकी तबियत खराब होने लगी l कारोबार में पैसों की कमी आ गयी मम्मी की दवाओं के खर्चे बढ़ने लगे l

बेटे सुनील ने मां के इलाज के लिए पैसा देने से मना कर दिया l शिविका ने बैंक से लोन लेकर मम्मी का इलाज जारी रखा l

हालात बद से बदतर होते चले गए l शिविका का हौंसला टूटने लगा l मां के बिस्तर पकड़ते ही शिविका की बहने उससे प्रॉपर्टी के लिए झगड़ा करने लगी l

मम्मी की तबीयत से उन्हें कोई लेना देना नहीं था l शिविका के लिए माँ को ज़िंदा रखना जरुरी था l

सब कहते है माँ स्वार्थी नहीं होती पर शिविका की माँ न सिर्फ स्वार्थी थी बल्कि उसने शिविका से वचन माँगा की जब तक

मुझे कुछ हों नहीं जाता तब तक तू शादी मत करना l शिविका की माँ सुशीला अपने स्वार्थ में इतनी अंधी हो गयी थी की

उसे उसकी बेटी शिविका की बढ़ती उम्र की भी चिंता नहीं थी उसे इस बात की भी फ़िक्र नहीं थी कि

उसका होने वाला दामाद अपना घर बार छोड़कर सिर्फ उसकी सेवा में यहाँ लगा पड़ा है l

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शिविका के लिए हालात बेहद ही ख़राब हो गए l आर्थिक हालातों से तंग आकर शिविका व उसकी माँ ने स्वार्थी व लालची शादीशुदा बेटों-बेटियों पर मेंटेनेंस का केस कर दिया l

शिविका की बहनें उस पर व उसके पति पर गलत-गलत आरोप मढ़ने लगी l 

शिविका ने फिर भी हार नहीं मानी l कोर्ट ने शिविका के फेवर में फैसला सुनाया l शिविका की मांग को कोर्ट ने न्याय दिया l

उन्होंने शिविका व उसकी माँ को बेटे-बेटियों से मेंटेनेंस दिलवाया l शिविका ने जल्द ही शादी कर ली l

आज वह उसका पति व उसकी बुजुर्ग माँ एक ही घर में साथ-साथ रहते है l शिविका ने नया घर ले लिया था l

उसका पति 15 दिन मुंबई तो 15 दिन दिल्ली रहकर दोनों माँ-बाप की सेवा कर रहा था l 

इस पूरी सच्ची कहानी में बुजुर्ग माँ बाप के साथ उसकी बेटी खड़ी रही l एक माँ-बाप ने नौ बच्चों को पैदा किया उन्हें पाला l

पर नौ बच्चें मिलकर भी एक माँ को नहीं पाल सके l कसूर किसका? …. परवरिश का ? पर शिविका को भी तो इसी माँ-बाप ने पाला था l 

तो फिर कसूर किसका …? समाज में व्याप्त इन्ही बुराईयों का, जो बुजुर्गों के साथ सौतेला व्यवहार करते है उन्हें खुद से दूर करते है l

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शिविका के मामले में उसका भाई सुनील जो महीने के 10 लाख कमाता है

वह अपनी माँ को 10,000 भी महीने के देने को तैयार नहीं था l क्योंकि उसके लिए माँ से बढ़कर पैसा था l

शिविका के भाई और बहन जो अच्छा खासा कमा रहे थे। उन्होंने जब तक कोर्ट का आदेश नहीं आया

तब तक  वे अपनी मां को इलाज का एक रुपया भी देने को तैयार नहीं हुए …कसूर किसका..?

आज समाज में बुजुर्गो पर पैसा खर्च कोई नहीं करना चाहता l शिविका-श्रवण जैसे कोई एक आधा युवा ही मिलेंगे l 

बुजुर्गों के लिए बड़े पैमाने पर सोच को बदलना जरुरी है l उनकी केयर करना जरुरी है l आसपास अगर कोई बुजुर्ग है

तो उसकी सहायता अवश्य करें, यह जरुरी भी है l जागरूकता की पहल अपने से शुरू हो l

बुढ़ापा सबको आता है l आपको और हम सभी को बुढ़ापा तो आना ही है l

जागो दोस्तों जागो !

आपको यह आर्टिकल कैसा लगा कॉमेंट बॉक्स में जरूर हमें अपने जवाब दें। 

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