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Chandrayaan 2 संपादकीय : कभी-कभी कुछ बड़े फायदे के लिए छोटा नुकसान होता है.

न दिल हारते हम न हमें मोहब्बत मिलती..! चंद्रयान-2 की सफल लैंडिंग न होने पर संपादकीय

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नई दिल्ली, ( समयधारा ) : आज व कल पूरे देश नहीं बल्कि पूरे विश्व की निगाहें भारत के चंद्रयान मिशन की सफलता पर टिकी थी l

वो पल आया और बस  चंद सेकंड्स के फासले ने  हमारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया l 

एक तरफ पूरा देश निराशा के गहरे सागर में डूब गया तो दूसरी तरफ ISRO के चीफ देश के प्रधानमंत्री की बाहों में अपना सिर रख भावुक नजर आयें l

काफी भावुक पल था वह सभी के लिए l पर उस एक पल ने जैसे पूरी दुनिया में भारत का नाम एक बार फिर रोशन कर दिया l

यह वही इसरो प्रमुख है जिसके धुरंधरों ने अपने पहले ही वार से मंगल को फतह कर लिया था l निराशा-असफलता अविष्कार की जननी है,

यही कह गए प्रधानमंत्री मोदी इसरो के सभी वैज्ञानिकों व उनके परिवारों को l देश का हर सिपाही चाहे वो आम हो या ख़ास खडा था,

ISRO प्रमुख के साथ और देश का यही जज्बा यही ताकत दुश्मनों का मुहं तोडती है l

पूरा देश एक सुर में इसरो को उनकी इस सफलता (लैंडिंग को छोड़)  के लिए उन्हें बधाई और उनकी हौसलाअफजाई कर रहा था l

भारत-इसरो के लिए यह भी कोई कम बात नहीं है की उसका मिशन चंद्रयान 2 अपनी मंजिल के

आखरी पढ़ाव पर सिर्फ 2.1 किलोमीटर दूर रहकर संपर्क में नहीं रहा l

पर 22 जुलाई से 6 सितम्बर तक उसे चंद्रमा के कक्ष में सही सलामत स्थापित करना l

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राह में आई तमाम मुश्किलों को पार करके चद्रमा की अनजानी तस्वीरे भेजना l

आदि कई महत्वपूर्ण व सफल पढाव को चंद्रयान 2 ने पिछले दिनों सही सलामत पार करना भी अपने आप में बहुत बड़ी बात है l

अभी भी हमें निराश होने की जरुरत नहीं है क्योंकि इस मिशन में लैंडर विक्रम के भीतर 27 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ था।

सौर ऊर्जा से चलने वाले प्रज्ञान को उतरने के स्थान से 500 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर चलने के लिए बनाया गया था।

इसरो के मुताबिक लैंडर में सतह और उपसतह पर प्रयोग करने के लिए तीन उपकरण लगे थे,

जबकि चंद्रमा की सहत को समझने के लिए रोवर में दो उपकरण लगे थे। मिशन में ऑर्बिटर की आयु एक साल है

और कहा जा रहा है कि ऑर्बिटर कुछ ऐसी तस्वीरें भेज सकता है जिससे विक्रम का क्लू मिल जाए। 

सफलता और असफलता एक  ही सिक्के के दो पहलु  हैl

इतिहास गवाह है जब-जब इंसान किसी चीज के लिए असफल हुआ है तब-तब वह एक नई ऊर्जा के साथ उठा है

और उसने एक नया मुकाम हासिल किया है l हर समय हर वक्त हर किसी का अच्छा नहीं हो सकता l

सफलता-असफलता तो जीवन में आती रहती है l पर हौसला तो बनायें रखने की जरुरत है l

इस समय पूरे देश ने जिस तरह से इसरो के वैज्ञानिकों को अपना सपोर्ट दिया है वो काबिले तारीफ हैl 

पक्ष-विपक्ष क्या आम क्या ख़ास सभी ने एक सुर में इसरो की सराहना की है l

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प्रधानमंत्री मोदी ने इसरो की पीठ थपथपाई तो देश के अलग-अलग भागों से ISRO को उसकी इस बड़ी कामयाबी के लिए प्रोत्साहित भी किया l 

देश में ऐसे कम ही वाकियें होते है जिसमे सभी लोग एक सुर में किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान की सराहना करते हैl

इस असफलता के पीछे जो सबसे बड़ी सफलता मिली है वो है एकजुट और अभिन्न भारत l जीहाँ भारत देश की यही ताकत रही है और रहेगी l

इसे कोई भी व्यक्ति या राष्ट्र छिन्न-भिन्न नहीं कर सकता l बसपा की मायावती का यह ट्वीट इसरो पर परफेक्ट बैठता है

जिसमे उन्होंने एक पुरानी कहावत को इसरो को संभोधित करते हुए लिखा है,

 ’गिरते हैं शहसवार मैदान-ए-जंग में, वह तिफ्ल (बच्चा) क्या गिरे जो घुटनों के बल चले’ l 

वही मोदी की यह बातें भी दिल को छू लेती है ….

हमें सबक लेना है, सीखना है, आगे ही बढ़ते जाना है और लक्ष्य की प्राप्ति तक रुकना नहीं है। हम निश्चित रूप से सफल होंगे।

इस मिशन के अगले प्रयास में भी और आगे के हर प्रयास में भी कामयाबी हमारे साथ होगी।

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ज्ञान का अगर सबसे बड़ा शिक्षक कोई है तो वो विज्ञान है। विज्ञान में विफलता नहीं होती, केवल प्रयोग और प्रयास होते हैं।

हर प्रयोग ज्ञान के नए बीज बोकर जाता है, नई संभावनाओं की नींव रखकर जाता है और हमें अपने असीम सामर्थ्य का एहसास दिलाता है।

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चंद्रयान के सफर का आखिरी पड़ाव भले ही आशा के अनुकूल ना रहा हो,

लेकिन हमें ये भी याद रखना होगा कि चंद्रयान की यात्रा शानदार रही है। इस पूरे मिशन के दौरान देश अनेक बार आनंदित हुआ है, गर्व से भरा है।

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चंद्रमा को छूने की हमारी इच्छाशक्ति और दृढ़ हुई है, संकल्प और प्रबल हुआ है।

वही सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर का यह ट्वीट भी अपने आप में इसरो की कामयाबी को बयां करता है ..

 

केवल सम्पर्क टूटा है,संकल्प नहीं,हौसले अब भी बुलंद है.मुझे विश्वास है की सफलता अवश्य मिलेगी.सारा देश

के साथ है .हमारे वैज्ञानिकों पे हमें गर्व है।बस आप आगे बढ़िए…

 

वही बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने भी ट्वीट कर इसरो की सफलता को सलाम किया है …

Pride never did face defeat .. our pride , our victory .. Proud of you ISRO तू ना थके गा कभी ,

तू ना मुड़े गा कभी , तू ना थमे गा कभी कर शपथ कर शपथ कर शपथ अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ

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इन सबके बीच कई लोगों ने इसरो को बधाई के साथ-साथ हौसलाअफजाई की है l

हमें इस बात की ख़ुशी होनी चाहिए की लोग देश के साथ खड़े है l काश ऐसा वो हर उस अन्याय के साथ करते जो वो समाज में देखते है l

सिर्फ चंद्रयान या और कोई बड़ी वारदात को सपोर्ट करने से काम नहीं चलेगा l

अगर हमें एक उन्नत समाज का विकास करना है तो हर उन लोगों को हमें सफलता की लाइन में लाना होगा जो असफल हो चूके है ..

जैसे की हमारे देश के कई भिखारी….. जैसे की हमारे देश के वो लोग जो निराश है और निराशा में डूबकर आत्महत्या करने की कोशिश करते है

कई लोग तो मर भी जातें है l हमें ऐसे कई लोगों के लिए हाथ आगे बढ़ाना होगा जिसे हमारी जरुरत है वो लोग जिसे समाज हिन् भावना से देखता है l 

दोस्तों इसरो की तरह ही हमारे देश के ऐसे बहुत से लोग है जिन्हें देश की जरुरत है ऐसी बहुत सी संस्था है,

जिसे ISRO की तरह हमारे सहारे की जरुरत है l दोस्तों आओं आगे आयें उन सबके लिए जिन्हें आपके पैसे की नहीं आपके प्यार की जरुरत है l

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यह भी पढ़े: Breaking news : विक्रम लैंडर से संपर्क टूटा 

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धर्मेश जैन 

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन एक स्वतंत्र लेखक है और साथ ही समयधारा के को-फाउंडर व सीईओ है। लेखन के प्रति गहन रुचि ने धर्मेश जैन को बिजनेस के साथ-साथ लेख लिखने की ओर प्रोत्साहित किया।

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