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केरल आपदा: क्या सिर्फ सरकारी मदद ही सहेज पाएगी बिखरे हुए आशियानों को?

केरल बाढ़ के बाद के कुछ बर्बाद लम्हें

सुंदर नदियों, झरनों वाले प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण भारत के राज्य केरल में

पिछले सौ वर्षों में बारिश का इतना खौफनाक रूप नहीं देखा गया,

लेकिन इस वर्ष 2018 में अगस्त माह में आई बाढ़ ने सारा सौंदर्य नष्ट कर दिया।

त्राहि-त्राहि करते हुए न जाने कितने आशियाने उजड़ गए।

नदियों पर जल प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए

सभी 42 बांधों मे से 35 बांधों को भी खोलना पड़ा, जिससे समूचा राज्य ही जलमग्न हो गया।

पेरियार नदी पर बने इडुक्की बांध के सभी पांचों द्वारों को खोल दिया गया जिससे कम से कम

बीस हज़ार करोड़ की संपत्ति नष्ट हो गई और लगभग 3 लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा।

न जाने कितने ही परिवार बाढ़ की चपेट मे आकर काल का ग्रास बन गए।

केरल पर आई इस आपदा से निबटने के लिए कम से कम 350 राहत शिविर खोले गए हैं।

भूस्खलन और जगह-जगह बाढ़ का पानी भरे होने के कारण सड़क यातायात तो ठप्प पड़ ही गया है,

हवाई यातायात भी बाधित हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालयों को

बंद कर दिया गया है और पर्यटकों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है ।

रेल यातायात के साथ-साथ मेट्रो सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

सम्पूर्ण राज्य के लगभग 80% हिस्से में विद्युत आपूर्ति भी बाधित है।

भारतीय सेना तथा नौसेना की मदद से राहत तथा बचाव के दल बाढ़पीड़ितों की सहायता कर रहे हैं।

इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल भी स्थानीय पीड़ितों की मदद में तत्पर है।

लोगों को बचाकर राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री राहत कोष की वैबसाइट(सीएमडीआरएफ़) शुरू की है,

जिसके द्वारा कोई आम नागरिक भी बाढ़पीड़ितों की मदद करने मे अपना योगदान दे सकता है।

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के द्वारा 600 करोड़ की धनराशि सहायता के रूप मे देने की घोषणा की गई है।

साथ ही भविष्य में आवश्यकतानुसार और भी सहायता दिये जाने का आश्वासन दिया गया है।

इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी, जो ऐसे आपातकालीन स्थितियों में नागरिकों की सेवा करती है,

को यूरोपीय संघ की ओर से 1.53 करोड़ की धनराशि बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए दी गई है।  

भारत के अन्य राज्यों की ओर से भी ऐसे विकट संकट की घड़ी में नागरिकों

को मदद स्वरूप लगभग 211 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की गई है।

आपदा की ऐसी स्थिति को देखते हुए प्रतिवर्ष वृहद स्तर पर होने वाले ओणम

उत्सव को भी रद्द करके उस धनराशि को बाढ़पीड़ितों की सहायता के लिए खर्च कर दिया गया है।

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति तथा

प्रधानमंत्री शेख मुहम्मद बिन राशिद अल मकतूम व अबूधाबी के राजकुमार

संयुक्त अरब अमीरात की सशस्त्र सेना के उप प्रमुख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान

द्वारा 700 करोड़ की धनराशि सहायतार्थ प्रदान करने की घोषणा की है।

हालांकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने विदेश नीति का हवाला देते हुए किसी भी प्रकार की मदद लेने से इंकार कर दिया है।

केरल के मुख्य सचिव टॉम जोंस ने कहा है कि स्थिति हमारे नियंत्रण मे है और सरकार ने स्थितियों पर नज़र बनाई हुई है।

सरकारी मदद के साथ-साथ मुख्यमंत्री राहत कोष के द्वारा आम नागरिक भी सहायता के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं।

अब तक इस वैबसाइट के द्वारा 1000 करोड़ रूपए बाढ़पीड़ितों की सहायतार्थ दिये जा चुके हैं,

जो इस बात का प्रतीक है कि हमारे देश में संकट की घड़ी मे साथ देने वाले देशवासियों की कमी नहीं है।

अब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है, तो लोग अपने उजड़े हुए आशियानों की ओर

फिर से लौट रहे हैं, लेकिन गंदे पानी के कारण जगह-जगह पैदा हो गए

जहरीले कीड़ों और गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

अब केरल में अस्त-व्यस्त हुए जनजीवन को सामान्य होने में तो लंबा अरसा लगेगा,

लेकिन हमारी संवेदना और सहायता के द्वारा वो फिर से सामान्य जीवन बिताने का साहस बटोर पाएंगे।   

 आज न जाने कितने बेसहारा लोगों को हमारी थोड़ी सी मदद की सख्त ज़रूरत है।

सिर्फ सरकारी धनराशि ही नहीं बल्कि हमारी मदद की छोटी सी

राशि भी किसी का उजड़ा हुआ आशियाना फिर से बसा सकती है।

आइये हम सभी इस प्रकृतिक आपदा से निबटने में केरल वासियों का साथ दें।

डिस्क्लेमर(अस्वीकरण): इस लेख में प्रस्तुत विचार लेखिका के व्यक्तिगत है। लेख में व्यक्त किसी भी सूचना की सच्चाई,सटीकता,संपूर्णता और व्यावहारिकता के प्रति समयधारा उत्तरदायी नहीं है। इस लेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई है।लेख में प्रस्तुत कोई भी सूचना या तथ्य या व्यक्त विचारधारा समयधारा की नहीं है और समयधारा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी या जवाबदेयी नहीं है।

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Bhavana Gaur

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है और लेखन में गहन रुचि रखती है।

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