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क्या वाकई सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण हुआ है ?

blog on surgical strike Is there liberalization of surgical strike?

क्या सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण हुआ है ? ये सवाल इसलिए किया जा रहा है|

क्यूंकि कुछ ऐसा ही वाक्तव्य आया पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा का जिन्होंने कहा है कि इस देश में

कुछ ज्यादा ही शोर मचाया गया राजनीतिक दलों द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से जो कि भारतीय सेना की एक वीरगाथा है |

कुछ पीछे चलते हैं –

केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद ,भारतीय सेना नें बॉर्डर के उसपार घुसकर आतंकियों का सफाया किया था |

और इस मिशन को नाम दिया था सर्जिकल स्ट्राइक | कहीं न कहीं केंद्र सरकार नें भी

इसे अपनी एक उपलब्धि के तौर पर पेश किया था | और कहा था कि मोदी सरकार के कारण ही सर्जिकल स्ट्राइक हुई |

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कई बार विपक्ष नें इसको लेकर मोदी सरकार की आलोचना भी की है |

और इसमें  राजनीतिकरण का आरोप भी लगाया है | अब फिर से सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर बयान आया है |

पर इस बार सरकार या फिर विपक्ष नें हमला नहीं किया | बल्कि सेवानिवृत लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा नें बयान दिया है |

एक ऐसे मिशन जो भारतीय सेना का गौरव गाथा गाता हो |

उसका  अहम हिस्सा रहे पूर्व लेफ्टेनेंट जनरल डीएस हुड्डा ने कहा कि भारत में इसका जरूरत से ज्यादा हल्ला गुल्ला ,

शोर  और राजनीतिकरण किया गया| समाचार एजेंसी  से बात करते हुए डीएस हुड्डा ने कहा,

‘मैं समझता हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक का जरूरत से ज्यादा प्रचार ओर राजनीतिकरण किया गया | 

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जिसकी कोई आवश्यकता नहीं थी | लेकिन सेना की दृष्टि से देखा जाए तो स्ट्राइक की काफी जरूरत थी.

’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने उड़ी हमले में काफी सैनिकों को खोया | ये बहुत जरूरी था कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जाए|

हम पाकिस्तान को बताना चाहते थे कि यदि वे हमारे इलाके में आकर ऐसे हमले करेंगे तो

हम भी उनके इलाके में घुसकर इसे बड़े और बेहतर हमले कर सकते हैं.’|

इस स्ट्राइक के बाद विश्व को भी भारत की शक्ति का एहसास हुआ |

और पाकिस्तान को भी पता चला कि भारत अब उसकी नापाक हरकतें बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं करेगा |

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क्या हुआ था –

साल था 2016 और तारीख थी 18 सितम्बर जब पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से

सम्बंधित आतंकवादियों नें भारतीय सेना के उड़ी स्थित कैम्प पर हमला किया था |

जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो  गए थे| हमले के दस दिन बाद 28 और 29 सितंबर की रात को भारतीय सेना ने

सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए आतंकवादी संगठनों के चार लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया था|

इस साल सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने इसके वीडियो भी सार्वजनिक किए गए थे|

वैसे तो सभी सियासी दलों की नज़र चुनावों में ही होती हैं | चुनाव के समय ही लोकलुभावने वादें भी किये जाते हैं |

उपलब्धियां भी गिनाई जातीं हैं | लेकिन फिर भी सैन्य के वीर गाथा को सिर्फ सैन्य के ऊपर ही छोड़ देना चाहिए |

अगर ये बात पूर्व सैन्य अधिकारी नें कही है तो गौर तो ज़रूर करना चाहिए |

क्यूंकि किसी भी सत्ताधारी दल के अनुसार काम करना सेना  का काम नहीं होना चाहिए | 

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