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वी जी सिद्धार्थ की मौत- सफलता व असफलता दोनों जीवन के हिस्से हैं

जिन्हें हम अपनी प्रेरणा मानकर चलते हैं अगर वे ऐसा कदम उठाते हैं तो बेहद  दुखदायी व अचरज से भरा होता है

CCD founder VG Siddhartha death blog Success and failure are both parts of life

सफलताएं व असफलताएं (Success and failure) तो जीवन का अभिन्न अंग (both parts of life) हैं।कभी किसी का पलड़ा भारी तो कभी किसी का।असफलताओं से सीख कर ही इंसा आगे बढ़ता है।

सही मायने में सफलता का लुत्फ़ भी वही इंसा उठा सकता है जिसने सफल होने के लिए न जाने कितनी विपरीत स्थितियों का सामना किया हो।

हर मुश्किल आसान हो जाती है अगर हम उसको बोझ न समझ भगवान का दिया हुआ कुछ नया सीखने का अवसर समझे।

हार कर मौत को गले लगाना बुझदिली के अलावा कुछ भी नहीं। इससे हम अपनी भावी पीढ़ी के लिए सिर्फ व सिर्फ इक गलत संदेश ही छोड़ कर जाते हैं।

जिन्हें हम अपनी प्रेरणा मानकर चलते हैं अगर वे ऐसा कदम उठाते हैं तो बेहद  दुखदायी व अचरज से भरा होता है।

ऐसा ही कुछ हुआ “कैफे कॉफी डे” के संस्थापक वी जी सिद्धार्थ के साथ । 29 जुलाई 2019 की रात से लापता सिद्धार्थ का शव 31 जुलाई 2019 (CCD founder VG Siddhartha death) को पुलिस को नेत्रावती नदी से मिला।

पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के अनुसार मौके पर मिले सभी सबूत आत्महत्या की ओर संकेत करते हैं।

इस साल मार्च तक देश के 200 शहरों में कैफे कॉफी डे (Café Coffee Day) (CCD) के 1,752 कैफे थे। पहला कैफे 1996 में बेंगलुरु में ब्रिगेड रोड पर खोला था।

भारत के बाहर पहला कैफे 2005 में ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में खोला था। ऑस्ट्रिया, चेक रिपब्लिक और मलेशिया में भी कंपनी का बिजनेस है।

मरने से पहले कंपनी के नाम उन्होंने एक पत्र लिखा जिसमे अपने कर्मचारियों से माफी माँगते हुए लिखा,” मैं उधमी के तौर पर विफल रहा।

मैं एक प्रोधोगिकी कंपनी की स्थापना से एक बड़ा शेयरधारक रहा हूँ। 20000 नौकरियां सृजित करने के बाद व सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बाबजूद भी लाभ देने वाला कारोबारी मॉडल बनाने में असफल रहा हूँ।

मैं आप लोगों के भरोसे पर खरा नहीं उतर पाया।”

उन्होंने आयकर विभाग के ऊपर उत्पीड़न व सीसीडी के शेयर का अधिकार ले लेने का आरोप भी लगाया।

उनके अनुसार कंपनी के ऊपर 8000 करोड़ रूपयों का कर्ज है। लापता होने की खबर के साथ ही सीसीडी का शेयर 20% गिर गया

उन्होंने यह भी लिखा कि बहुत कोशिशों के बाद भी वे असफल रहे।

उन्होंने 5 साल पहले एक इंटरव्यू में सफलता का मंत्र बताया था कि- कुछ कर गुजरना है तो संकल्प के साथ करो और आसानी से हार मत मानो।  

इन शब्दों के बाद उनके द्वारा उठाया गया यह कदम कुछ अविश्वसनीयता पैदा करता है।

क्या इतना समझदार व मजबूत इरादे वाला इंसा इतनी बुझदिली की हरकत कर सकता है? सवाल का जवाब मिलना आसान नहीं है, तहकीकात जारी है।

अगर सचमुच में आत्महत्या का केस है तो हर इंसा एक बार सोचने पर मजबूर होगा कि क्या यह हालातों की विवशता थी या फिर असफलताओं से हार ?

लेकिन यह बात सच है कि नाकामी में भी हौंसले न खोने वाले इंसा कभी जिंदगी से हार नहीं मान सकता।

सोहनलाल द्विवेदी जी की यह रचना कभी नहीं भूलायी जा सकती—

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती

 कोशिश करने वालों की हार नहीं होती”

CCD founder VG Siddhartha death blog Success and failure are both parts of life

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Ritu Gupta

लेखिका रितु गुप्ता लोकप्रिय बुक राइटर है। लेखन में वर्षों का गहन अध्ययन और प्रत्येक मुद्दे पर बेबाक राय के लिए जानी जाती है और शुरुआत से समयधारा परिवार का हिस्सा रही है।

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