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आर्थिक मंदी के मुहाने पर युद्ध का बिगुल, सरकार है सचेत या अचेत?

आर्थिक वृद्धि दर अगर ऐसे ही गिरती रही तो देश फिर अल्पविकसित देशों की गिनती में आना शुरू हो जाएगा

During economic recession is war talk appropriate

भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी (economic recession) के दौर से गुजर रही है। इसमें कोई शक नहीं है। हमारी अर्थव्यवस्था जो विश्व स्तर पर 5वें नंबर पर पहुंच गई थी वापिस खिसक 7वें नंबर पर पहुंच गई है

आरबीआई (RBI) ने GDP ग्रोथ दर के पूर्वानुमान को घटाकर 6.9 कर दिया। जहां एक ओर देश आर्थिक संकट से गुजर (During economic recession) रहा है

तो वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने से पाकिस्तान के साथ बढ़ते युद्ध सरीखे खतरे भी

देश के सामने मुंह उठाये खड़े (During economic recession is war talk appropriate)है।

भारतीय अर्थव्यवस्था (Economy of India) के किसी भी सेक्टर की ओर देखे हर जगह सिर्फ मंदी नजर आ रही है। विमान सेवा जेट एयरवेज बंद हो चुकी। एयर इंडिया घाटे में है।

BSNL व डाक सेवा का अस्तित्व ही खतरे में है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में माँग की जबरदस्त कमी आई है।दस लाख लोगों को नौकरी से निकाला जा चुका है।

टोटल जीडीपी (Total GDP) में इस सेक्टर का 7.50% हिस्सा है। टाटा मोटर्स जैसी कंपनी भी घाटा भुगत रही है। उससे जुड़े हर उद्योग में मंदी है।छंटनी हो रही है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के कर्मचारियों ने भुगतन के लिए 15000 करोड़ का कर्ज लिया है। बैंकिंग सेक्टर NPA के साथ फ्रॉड की समस्या झेल रहे है। 2.05 लाख का घाटा हुआ है।

कृषि उद्योग व कुटीर उद्योग भी इस मंदी की चपेट में हैं। हर आर्थिक क्षेत्र घाटे में है। बेरोजगारी की समस्या बीते 45 सालों में सबसे ज्यादा इस समय हो गई है।

ये समस्याएं ऐसे ही बढ़ती रही तो माँग न होने की वजह से सकल घरेलू उत्पाद(GDP) ग्रोथ कम होती चली जाएगी। मंदी से रूपये का अवमूल्यन हो रहा है।

राजकोषीय (fiscal policy) और मौद्रिक नीति (monetary policy) दोनों ने माँग को कम ही किया है और यह सब घरेलू consumption में कमी,export और सरकारी खर्च में कमी है।

सीएसओ CSO(central statistical organisation) के आंकडों के मुताबिक पाँच साल में न्यूनतम इकोनॉमिक ग्रोथ 5.8% रही है।

जो विश्व बैंक के अनुसार 7.5% थी। CSO ने सारी पोल खोल कर रख दी। अब आर्थिक वृद्धि सरकारी व्यय पर निर्भर है।

सरकार को विनिर्माण उद्योगों में निवेश अधिक से अधिक करना चाहिए। कश्मीर में 370 हटने के बाद वहाँ आर्थिक वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

पर यह बात सच है कि इस आर्थिक मंदी में सरकारी खर्च की बढ़ोतरी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर सरकारी निवेश बढ़ता है तो निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलता है।

पाँच ट्रिलियन डॉलर की भारतीय अर्थव्यवस्था का सपना तभी पूरा हो सकता है। वरना अगर युद्ध जैसी स्थिति आती है तो अनुमानित अर्थव्यवस्था दस साल पीछे चली जाएगी।

बेरोजगारी बढ़ती रही तो प्रतिव्यक्ति आय व आर्थिक वृद्धि की दर में गिरावट आ जाएगी। कहीं ऐसा ना हो कि देश महामंदी की चपेट में आ जाये।

इसलिए वर्तमान सरकार से हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि इस वक्त देश की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है

सब शांतिपूर्ण मुद्दों के साथ हो। शांति बनाये रखने के लिए आर्थिक मुद्दा भी बहुत महत्वपूर्ण व जरूरी है।

आर्थिक समस्याओं के साथ कोई भी देश कभी शांति के साथ नहीं रह सकता।

पाकिस्तान इसका सबसे बड़ा प्रमाण है जिसने कभी आर्थिक वृद्धि की ओर नहीं बल्कि हमेशा युद्ध और आतंकवाद वृद्धि की ओर ही ध्यान दिया (During economic recession is war talk appropriate) है।

आर्थिक वृद्धि दर अगर ऐसे ही गिरती रही तो देश फिर अल्पविकसित देशों की गिनती में आना शुरू हो जाएगा।

इसका सीधा-सीधा लाभ चीन और पाकिस्तान को मिलेगा जो हमेशा से एशिया में भारत की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के खिलाफ रहे है।

1930 की विश्व व्यापक मंदी के दौरान स्थिति से निपटने के लिए अर्थशास्त्रियों ने सरकार को सुझाव दिया था

कि लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से गड्ढों को खुदवाकर गड्ढे फिर से भरवाये। ताकि लोगों को रोजगार मिले,उपभोग बढ़े व इसके साथ माँग।

उससे फिर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) व निवेश (Investment) में वृद्धि होगी। इसलिए सरकारी व्यय का बढ़ना आर्थिक मंदी से निपटने में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण व जरूरी उपाय है।

हर आर्थिक सेक्टर में संतुलित निवेश व ग्रोथ अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाये रखने के लिए जरुरी है।

क्योंकि हर उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं। शुद्ध विदेशी आय को बढ़ना भी जरूरी है ।

इसके लिए टूरिज्म व निर्यात को बढ़ावा देना पड़ेगा। उसके लिए सरकार को कस्टम ड्यूटी वगैरह में रिहायत देनी पड़ेगी।

विदशी सैलानियों की रक्षा की जिम्मेदारी का खास ध्यान रखना चाहिए।

इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है देश में शांति,सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाएं रखने में सरकार के सकारात्मक प्रयास।

हमें पूरा विश्वास है सरकार जल्द ही सचेत हो इस ओर ज्यादा ध्यान देगी।

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