breaking_newsअन्य ताजा खबरेंदेशदेश की अन्य ताजा खबरेंब्लॉग्सविचारों का झरोखासंपादक की कलम से
Trending

क्या यह बजट मोदी सरकार के अंतरिम बजट(चुनाव पूर्व) किये गएँ वादों पर खरा उतरेगा

समयधारा की नजर से 'बजट 2019' - जानियें क्या था ख़ास और क्या होगा ख़ास

Editor Opinion on Budget 2019

नई दिल्ली, 4 जुलाई : पिछले दिनों चुनाव से पहले मोदी सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था l

वह बजट सभी को चुनावी-जूमला लग रहा था l अब मोदी सरकार फिर से आ गयी क्या मोदी सरकार के

पहले कार्यकाल के अंतिम बजट में जो वादें किये गए थे क्या उसे पूर्ण करेगी मोदी सरकार,

देश में आज और कल सभी जगह इसी बात की चर्चा है l

निर्मला सीतारमण आज मोदी सरकार के दूसरें कार्यकाल का पहला बजट पेश करेगी l 

चलियें हम ले चलते है,  आपको 1 फरवरी 2019 के उस बजट के करीब जिसमे पियूष गोयल ने अरुण जेटली की जगह पेश किया था l   

आज पियूष गोयल ने मोदी सरकार का आखरी बजट 2019 पेश किया l

इस बजट में मोदी सरकार ने सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बजट पेश किया l

वही लोकसभा चुनाव 2019 की छाया इस बजट पर देखी जा सकती है l

पर इन सब से परे सच्चाई यही है की मोदी सरकार ने अपना चुनावी बजट पेश कर दिया l

विपक्ष इसे मोदी सरकार का चुनावी घोषणापत्र बता रही है l वह एक और ‘मोदी जुमला’ का नाम देने से भी पीछे नहीं हट रही l 

टैक्स में बड़ी छूट देकर मोदी सरकार ने सीधे छक्का मारा l वही किसानों, गायों व पेंशन को लेकर उसने चौकों की बौछार कर दी l

कुल मिलाकर मोदी सरकार ने देशवासियों की जो नाराजगी उनसे चल रही थी उसे दूर करने की कोशिश की है l जिसमे वह सफल भी हुए है l 

Editor Opinion on Budget 2019

पर सबसे बड़ा सवाल यही है की क्या यह बजट मोदी सरकार की तमाम नाकामियों को भुलाने वाला होगा l

 नोटबंदी फिर GST व किसानों को लेकर लापरवाही क्या यह सभी देशवासी भूल जायेंगे l 

मोदी सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में देश का विकास तो किया पर साथ-साथ कई जगहों पर विफल भी रही है l

नोटबंदी से कालेधन के खात्मे को लेकर जो मोदी ने कहा था लोग आसानी से उसे भूलने वाले नहीं है l

जीएसटी को लेकर भी व्यापारी वर्ग में काफी रोष व्याप्त है l 

वही आरक्षण भी एक बड़ा मुद्दा है l मोदी सरकार के लिए एक तरफ कुआं तो एक तरफ खाई वाले हालात है l  

Editor Opinion on Budget 2019

देश को चलाने वाले नेता होते है, तो उनको चलाने वाली जनता होती है l

हमें यह नहीं भूलना चाहियें की नेता हमारे वोटों से ही चुनकर आते है,

और जुमलों से या वादों से आप ज्यादा दिन तक जनता को बेवकूफ नहीं बना सकते l  देश में जो आज हालात है वह पहले कभी नहीं थे l 

किस पर विश्वास किया जाएँ किस पर नहीं….? 

एक तरफ कांग्रेस प्लस का गठबंधन तो दूसरी तरफ बीजेपी प्लस का गठबंधन

वही राज्यों पर मजबूत स्थिति में रहने वाली क्षेत्रीय पार्टियों का महागठबंधन….

विकल्प तीन है और इसमें किसे चुने किसे नहीं यह जनता के लिए किसी बड़ी उलझन से कम नहीं l 

अब बात करते है मोदी सरकार के आखरी बजट की जिसे सही मायनों में मोदी सरकार का चुनावी बजट ही कहा जा सकता है l 

किसानों को साल भर में 6000 रुपये मतलब की हर रोज का सिर्फ 17 रुपये देना..? यह एक मजाक है..? 

Editor Opinion on Budget 2019

विपक्ष इसे लेकर सरकार पर वार करने से चुक नहीं रहा है l 

वही सरकार इस पर अपना बचाव करते हुए कहा की इससे पहले किसी सरकार ने किसानों के लिए इतना भी नहीं सोचा l 

वही सरकार ने 5 लाख तक की टैक्स छूट को लेकर मोदी सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया तो

विपक्ष ने कहा की जब नौकरी होगी तभी तो टैक्स में छूट मिलेगी l

विपक्ष देश में बेरोजगारी(unemployment) को लेकर मोदी सरकार पर अपने हमले जारी रखें है l

हमें, मोदी सरकार के चुनावी बजट(Budget) से अलग हटकर, एक सही दिशा में अपने वोट के अधिकार को चुनाव करना होगा l 

क्या हमें फिर 5 साल मोदी सरकार को मौक़ा देना चाहियें ..?

क्या हमें एक बार फिर कांग्रेस को मौक़ा देना चाहियें …?

या फिर क्षेत्रीय पार्टियों के महागठबंधन को मौका देना चाहियें ..?

किसे चुनना है यह एक बड़ा सवाल है पर अपने विवेक का सही उपयोग करके हम अपने हित के बारे में सोचना होगा

और देश को मजबूत सरकार देनी होगी l जो देश के विकास के साथ-साथ हर एक की सरकार हो l  

Editor Opinion on Budget 2019

Tags

Dharmesh Jain

धर्मेश जैन एक स्वतंत्र लेखक है और साथ ही समयधारा के को-फाउंडर व सीईओ है। लेखन के प्रति गहन रुचि ने धर्मेश जैन को बिजनेस के साथ-साथ लेख लिखने की ओर प्रोत्साहित किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: