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भूल जाओ ‘बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ’, अब चिंता सताएं ‘कैसे बचेगी बेटी,कैसे पढ़ेगी बेटी’

रेवाड़ी गैंगरेप- यौन हिंसा के अपराधियों को मिले कठोर से कठोर सजा

Rewari Gang Rape: रेवाड़ी की एक प्रतिभावान छात्रा के साथ सामूहिक दुराचार की घटना ने एकबार फिर से दिल झकझोर के रख दिया।

उस को देखकर लगता है कि इस पुरूष प्रधान समाज में महिलाओं का कड़े परिश्रम व लगन से आगे बढ़ना इतना आसान नहीं है।

लड़कियों के साथ यौन हिंसा के मामलों मे लगातार बढ़ोत्तरी होती जा रही है। हरियाणा की धरती से जन्मा नारा ‘बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ’ लग रहा है अब चिंता का विषय लिए हुए इस नारे में तब्दील हो चुका है ‘कैसे बचेगी बेटी,कैसे पढ़ेगी बेटी’।  

यह सिर्फ़ हरियाणा ही नहीं संपूर्ण देश के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन चुका है।

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देश का रक्षक एक फौजी नौजवान अन्य चार लोगों के साथ मिल कर इस घटना को अंजाम दे जाता है वह भी जानने वाला।

haryana-rewari-gangrape-case in Haryana: Criminals should convicted death penalty
रेवाड़ी गैंगरेप का मुख्य आरोपी पंकज जोकि फौजी है (बाएं) मनीष(बीच में) और दाएं नीशू (दाएं)

इससे शर्मसार घटना और क्या हो सकती है। वैसे भी हमारे आर्मी के नौजवानों के लिए यह बात बेहद शर्मनाक घटना है इसने यह साबित कर दिया है—

रक्षक कब बन जाए भक्षक अब तो यह कह नहीं सकते

कौन अपना कौन पराया इस झूठे भ्रम में रह नहीं सकते।

समाज में जब तक इन भेड़ियों को कठोर सजा नहीं मिलती बेटी कहीं भी सुरक्षित नहीं है।

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निर्भया कांड के बाद ऐसे अपराधियों के लिए फांसी की सजा का प्रवाधान है। पर वक्त रहते तत्काल केस व तुरंत कार्रवाई न होने से मामले ढीले पड़ जाते है और

गुनहगार को बच निकलने का अवसर मिल जाता है।

उधर किसी की आबरू का सवाल होता है,इधर इतने दुख की बात है कि ऐसे में भी हमारे नेता गुटबाज़ी व राजनीति करने से नहीं चूकते।

अस्पताल में भी डॉक्टर सारी छानबीन के बाद ही पीड़िता को हाथ लगाता है।

ऐसी कौनसी जगह रह गई है जहाँ लड़की सुरक्षित समझी जा सकती है,हर जगह ऐसे कुछ दरिंदे मिल जायेंगे जो इंसानियत के नाम पर कलंक साबित हो जाते हैं।

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सौतले बाप व भाई के द्वारा यौन शोषण के मामले भी सामने आये हैं ऐसे भेड़ियों ने समाज को दूषित कर दिया है।

लड़कियों का पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर अपने को मॉडर्न साबित करने की होड़ ने भी इन मामलों को बढ़ावा दिया है।

आजकल लड़कियों का तंग व छोटे कपड़े पहनना व देर रातों तक अकेले घर से बाहर रह क्लबों व पार्टियों में घूमना नशे की हालत में घर में घुसना यह सब भी कई बार इन दुराचारों के होने का एक अन्य कारण भी बन जाता हैं।

लेकिन सोचने की बात यह है कि इन घटनाओं से भविष्य में बचा कैसे जाए? बेटियों को इस दरिंदगी से बचाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

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अपराधियों को साथ के साथ सजा कैसे मिले ताकि उनको बचने का मौका ही न मिले? दिन-प्रतिदिन बढ़ती हुई इन घटनाओं से यह लगने लगा है—

कब समझेंगे वो इज्जत के भक्षक?

कब सुधरकर वो भेड़िये बनेंगे रक्षक?”

यौन हिंसक अपराधों से बचने के लिए जरूरी है कि इन अपराधों की हर पुलिस चौकी में तुरंत शिकायत दर्ज होनी चाहिए।

तत्काल केस होने से व तुरंत कार्रवाई होने से अपराधी को बचने का मौका ही नहीं मिल पाएगा।

लड़कियों के लिए स्कूल के वक्त से ही सेल्फ डिफेंस की क्लासेज होनी चाहिए। कम अंतराल पर अधिक से अधिक महिला संरक्षण केंद्र स्थापित किये जाने चाहिए।

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वहाँ महिलाएं अपने हक में अपील कर सकती हैं। अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपनी लड़कियों से दोस्ताना व्यवहार रखे ताकि वक्त पड़ने पर परिवार वालों से अपने साथ होने वाली यौन हिंसा के बारे में खुल कर बता पायें।

जब अपराधी पकड़ा जाए उसे कठोर से कठोर सजा मिले ताकि भविष्य में कोई भी ऐसा गलत कदम उठाने से पहले अंजाम की सोचने पर मजबूर हो जाए।

यह बात भी सबको समझ जानी चाहिए कि ऐसे गुनहगारों का साथ देने वाला खुद भी गुनहगार होता है। इसलिए बिना किसी देरी के अपराधी को पुलिस के हवाले कर देना चाहिए।

अगर हमें महिलाओं को यौनहिंसक अपराधों से बचाना है तो सबको मिलकर इन अपराधों का विरोध करना होगा।

औरत के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए इन भेड़ियों को कठोर सजा देनी ही होगी।

 

 

 

डिस्क्लेमर(अस्वीकरण): इस लेख में प्रस्तुत विचार लेखिका के व्यक्तिगत है। लेख में व्यक्त किसी भी सूचना की सच्चाई,सटीकता,संपूर्णता और व्यावहारिकता के प्रति समयधारा उत्तरदायी नहीं है। इस लेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई है।लेख में प्रस्तुत कोई भी सूचना या तथ्य या व्यक्त विचारधारा समयधारा की नहीं है और समयधारा इसके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी या जवाबदेयी नहीं है।

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