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जुर्म, अन्याय और जालिम जब हदें करें पार… तब लगाएं इन-इन कोर्ट में गुहार 

जब जुर्म देगा दस्तक..कब...कैसे...कहां...किस कोर्ट में मांगे मदद..?

जी हां! जब जुर्म देता है दस्तक तब आप कितने जागरूक हैं ?

एक लड़के को 4 लोगों ने मारपीट कर लहू लुहान कर दिया।

कसूर बस इतना था कि उसने बस स्टॉप पर खड़ी लड़की के साथ छेड़छाड़ करते उन 4 लड़कों को समझाने की कोशिश की थी।

एक पत्नी के मायके जाने पर कामवाली ने झूठे इल्जामों की धमकी देकर पति से मोटी रकम वसूल ली।

दबंग लोगों के घर मे बेटी की शादी करके फंस गई विधवा माँ।

झूठे कागजात बनवाकर हड़प ली पुरखों की जायदाद…

ऐसे किस्से हम समाचारों की सुर्खियों में रोज़ पढ़ते होंगे,

लेकिन कभी सोचा है कि यदि हमें ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़े तो हम क्या करेंगे?

आइये आज हम आपको बताते हैं हमारे देश की न्यायव्यवस्था के बारे में।

हमारे देश की न्याय प्रणाली इतनी सुदृढ़ है कि यदि आपको सही जानकारी है,

तो आप अन्याय सहने को कभी मजबूर नहीं हो सकते।

सबसे पहले तो बात करते हैं व्यक्तिगत स्तर की। व्यक्तिगत यानि परिवार के आपस की बात।

पति पत्नी और परिवार के सदस्यों के बीच होने वाले अपराध।

मान लीजिये आप घर की चारदीवारी में भी चैन की सांस नहीं ले पा रहे।

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अपने ही परिवार के सदस्य आप को प्रताड़ित कर रहे हैं और आपको सुरक्षा का कोई रास्ता नज़र नहीं आता।

ऐसे में हताश होने की ज़रूरत नहीं है, फैमिली कोर्ट यानि पारिवारिक न्यायालय आपके मसले सुलझाने में आपकी मदद करेंगे।

कोई भी व्यक्ति आपके साथ तभी तक अन्याय कर सकता है, जब तक आप चुपचाप अन्याय सहते हैं।

आपके साथ मारपीट हुई हो, आप को ताने और अपशब्दों से मानसिक आघात दिया जाता हो,

ऐसी कोई भी स्थिति जिसमे आपके मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो, आप कोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज़ कराइये।

हाँ, इतना ज़रूर याद रखिएगा कि सिर्फ सबक सिखाने के लिए किसी पर झूठे इल्ज़ाम नहीं लगने चाहिए,
क्योंकि आगे की छानबीन में सच्चाई सामने आ जाएगी और तब झूठे केस के लिए आपको सज़ा भी भुगतनी पड़ सकती है।

यदि आपको परिवार के सदस्यों से कोई शिकायत नहीं,

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लेकिन आपको किसी और वजह से अन्याय झेलना पड़े, यानि कि ऐसे केस जो किसी अपराध से जुड़े हों,

तो उनके लिए होती है सेशन कोर्ट। आपके घर मे कोई ज़बरदस्ती घुसकर लूटपाट करे,

कोई राह चलते मारपीट करे और आपसे ज़बरदस्ती आपका वाहन तक छीन ले जाए,

इस तरह की कोई भी ज़ोर ज़बरदस्ती होने पर आप सेशन कोर्ट में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

यदि राजस्व से जुड़े मामले हैं, जैसे सरकारी संपत्ति से जुड़े विवाद,

उनके लिए आप राजस्व न्यायालय की शरण ले सकते हैं।

वकीलों की मदद से आप अपना पक्ष बेहतर ढंग से न्यायाधीश के सामने रख सकते हैं।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला हमेशा न्याय के पक्ष में ही होगा।

ये तो रही जिला स्तर पर न्याय की बात। उपरोक्त सभी न्यायालय डिस्ट्रिक्ट कोर्ट यानि जिला न्यायालय के अंतर्गत आते हैं।   

अब मान लीजिये कि आप जिला न्यायालय के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं, तो फिर भी निराश होने की ज़रूरत नहीं है।

आप ऐसी स्थिति में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के फैसले के विरोध में हाई कोर्ट यानि उच्च न्यायालय में गुहार लगा सकते हैं।

आपकी बात कानून के नियमों के अनुसार सही होनी चाहिए।

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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जिला गवर्नर और राष्ट्रपति की सहमति से चुने जाते हैं,

जो ऐसी स्थिति मे आपका साथ देंगे जब आपकी बात कानूनी नियमों के अनुसार पूरी तरह सही हो,

फिर भी आपको समुचित न्याय न मिल पा रहा हो।

 अगर आप अब भी कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और किसी को फांसी की सज़ा हो रही है,

तब भी आप फांसी की सजा रुकवाने के लिए उच्चतम न्यायालय यानि हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

यहाँ के न्यायाधीश केंद्र सरकार एवं राष्ट्रपति की सहमति से चुने होते हैं, जो आपको पूरी तरह से निष्पक्ष न्याय दिलाने मे मदद करते हैं।

ज़रूरत पड़ने पर गवर्नर और राष्ट्रपति की सलाह से ये न्यायालय नए नियम भी बना सकता है।

तो अब बताइये क्या आप अपराध होने की स्थिति में अपराधियों को सजा दिलवाने के लिए न्यायालयों का सहारा लेंगे,

या फिर चुपचाप अपराध सहते रहेंगे?

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और हाँ, यदि आप किसी केंद्र शासित प्रदेश में रहते हैं,

तो जिला न्यायालय की जगह केंद्रीय न्यायालयों में अपनी शिकायत दर्ज़ करा सकते हैं। अपराधी को सज़ा तो मिलकर ही रहेगी।

क्या कहा? आप गाँव में रहते हैं ? तो भी आपको हताश होने की ज़रूरत नहीं है।

ग्राम पंचायत आपको ही न्याय दिलाने के लिए बनी है। तो अब उठ खड़े होइए।

कब तक जुल्म सहते हुए खुद को बदकिस्मत मानते रहेंगे?

किसी भी तरह के अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाइये।

हमारे भारत देश की अदालतें आपको न्याय दिलाने में आपके साथ हैं।

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समयधारा 

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Bhavana Gaur

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है और लेखन में गहन रुचि रखती है।

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