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बुराड़ी खबर: ललित की आँखों ने क्या देखा

बुराड़ी कांड: “स्प्लिट पर्सनैलिटी” नामक बीमारी का शिकार हो गया था ललित

यदि किसी परिजन की अचानक ही मृत्यु हो जाये, तो परिवार के सदस्यों को आघात लगता है और मृत व्यक्ति के फिर से लौट आने की चाह बढ़ती है। ऐसे मे कोई भी ऐसी स्थिति जिससे उस मृत व्यक्ति की कमी पूरी होती हुई लगे, परिवार के सदस्यों को बरबस ही आकर्षित करती है।

मृत्यु के बाद होने वाली घटना के प्रति मनुष्य की उत्सुकता स्वाभाविक है। लेकिन यह उत्सुकता इतनी बढ़ जाये कि व्यक्ति मानसिक रोगों का शिकार हो जाए,तो परिवार और समाज के लोगों का कर्तव्य बनता है कि व्यक्ति की ऐसी मानसिक परेशानी से उबरने में मदद की जाये।

दिल्ली के बुराड़ी में हुए सामूहिक मृत्युकाण्ड में परिवार का छोटा बेटा ललित अपने पिता की मृत्यु के पश्चात ऐसे ही सदमे से गुजर रहा था। जानकार सूत्रों के अनुसार ललित के पिता की मृत्यु 2007 में हुई थी,जिसका ललित पर गहरा मानसिक आघात लगा था। उसके बाद किसी दुर्घटनावश उसकी आवाज़ भी चली गई थी।

ऐसे में मानसिक दबावों के चलते वह “स्प्लिट पर्सनैलिटी” नामक बीमारी का शिकार हो गया। ये एक ऐसी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति का अनुमस्तिष्क (सब कांशियस माइंड) स्वयं को किसी और व्यक्तित्व से जोड़कर देखने लगता है।

इस बीमारी का ज़िक्र दक्षिण भारतीय फिल्म “अपरिचित” में भी किया गया है। इस बीमारी के कारण व्यक्ति स्वयं को कोई और व्यक्ति मानकर उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है। ललित भाटिया पहले तो इस बीमारी का शिकार हुआ, जिसके चलते वह स्वयं को अपने पिता की आत्मा बताकर परिवार के सदस्यों से अपनी बातें आदेश के रूप में कहने लगा।

उसके आदेशों का पालन न किए जाने पर परिवार के सदस्यों को सजा देने और भविष्य में कोई अनिष्ट होने की आशंका की बात भी रजिस्टर में लिखी गई थी। परिवार के बाकी के सदस्य जो खुद भी परिवार के मुखिया की मृत्यु से दुखी थे, जीवन-मृत्यु के अनसुलझे रहस्यों में फँसकर धीरे-धीरे ललित की बातों से प्रभावित होने लगे।

Hindi article on Burari Kaand: BurariDeathMystery- Burari deaths latest news
विश्वास या अन्धविश्वास-बुराड़ी में 11लोगों की मौत से क्या हुआ हासिल..? (तस्वीर,साभार-सोशल मीडिया)

संयोगवश, आदेशरूप में कहे गए ललित के वाक्यों पर अनुसरण करके जब परिवार की कुछ समस्याओं का समाधान होने लगा, तो उन्हें ये यकीन हो गया कि ललित के पिता की आत्मा उनकी सभी परेशानियों को दूर कर देगी।

ऐसे में स्प्लिट पर्सनैलिटी का शिकार ललित धीरे-धीरे परिवार पर अपना प्रभुत्व कायम करने लगा। ललित की बीमारी धीरे-धीरे बढ़ते हुए साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर का रूप लेने लगी और परिवार के बाकी के सदस्य भी उसकी चपेट मे आकर कम्बाइन साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर का शिकार हो गए।

पड़ोसियों और बाकी के रिश्तेदारों के अनुसार, उन्हें इस बात की कोई भनक भी नहीं लगी कि पिता की आत्मा का अपने अंदर प्रवेश करने का दावा करने वाला ललित पूरे परिवार की मौत का कारण बनेगा।

मृत्युकाण्ड की घटना के बाद घर से बरामद रजिस्टर में ये बात साफ तौर पर लिखी गई है कि सबको आदेश का पालन करते हुए एक साथ क्रिया आरंभ करनी है।

रजिस्टर मे मिली जानकारी के अनुसार परिवार के सभी सदस्यों को साथ मिलकर खुद को फंदे पर लटकाना है, लेकिन साथ ही साथ यह भी लिखा गया है कि तुम मरोगे नहीं।

यदि तथाकथित भविष्यवाणी करते हुए रजिस्टर की बातों को सच माना जाए तो, उन सबको मरना नहीं था बल्कि सामूहिक पूजा करनी थी, जिसके बाद उन्हें एक दूसरे के हाथ खोलने मे मदद करनी थी।

रजिस्टर मे लिखी बातों के अनुसार यह भी कहा गया कि तथाकथित आत्मा अकेली नहीं बल्कि चार और आत्माओं सज्जन सिंह, हीरा, दयानन्द और गंगा देवी की आत्माओं के साथ भटक रही है।

उन चारों नामों के बारे मे पूछताछ करने पर यह तथ्य सामने आया कि चार अन्य आत्माओं के नाम उनके परिवार के ही पूर्व मृतक सदस्यों के नाम हैं।

जीवन मृत्यु के अनसुलझे रहस्यों के चलते हमारे देश में इस कदर अंधविश्वास कायम हैं कि ललित की मानसिक दशा की जानकारी के बावजूद किसी रिश्तेदार या परिचित ने उसका इलाज करवाने की कोई कोशिश नहीं कि बल्कि उसकी बातों को सच मानकर परिवार के 11 सदस्य एकसाथ अपनी जान से हाथ धो बैठे।   

    

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Bhavana Gaur

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है और लेखन में गहन रुचि रखती है।

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