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‘अलवर कांड’ पर सियासत कर रहे मोदी ने ‘बिहार बालिकागृह यौन शोषण कांड’ पर क्यों साधी चुप्पी?

पीएम मोदी अलवर दुष्कर्म कांड पर इतनी बयानबाजी कर रहे है और बिहार बालिकागृह यौन-शोषण कांड पर आजतक चुप्पी साधकर क्यों बैठे है?

नई दिल्ली, 13 मई: PM Modi politics on Alwar gangrapeमहिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म,यौन-शोषण या रेप...ये केवल शब्द नहीं है बल्कि उनके शरीर और आत्मा पर लगा वो अमिट और दर्दनाक जख्म है जिसे दुनिया की कोई ताकत भर नहीं सकती,लेकिन जब दुष्कर्म या रेप जैसी घटनाओं पर देश का प्रधानमंत्री ही सियासत करने लगे (PM Modi politics on Alwar gangrape) तो फिर देश को कोई नहीं बचा सकता।

पीएम मोदी ने उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए सीधे-सीधे बीएसपी सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधा है कि राजस्थान में एक दलित महिला के साथ हुए गैंगरेप पर वे कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार से समर्थन वापस क्यों नहीं लेती?

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भले ही मोदी समर्थकों को लगे कि वे देश की महिला के साथ न्याय की बात कर रहे है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है! चूंकि यदि पीएम मोदी को देश की महिला या बालिकाओं के प्रति होने वाले दुष्कर्मों या रेप की वारदातों की चिंता होती तो वे खुद अपने गठबंधन के सहयोगी नीतीश कुमार से भी उस समय समर्थन वापस ले लेते जब बिहार में 34 बालिकाओं के साथ जघन्य बालिकागृह यौन-शोषण की खबर सामने आई थी।

ये बहुत ही शर्मनाक है कि न केवल पीएम मोदी बल्कि सभी दल महिला सुरक्षा या बालिकाओं की सुरक्षा की केवल बात ही करते है लेकिन रेप के आरोपियों को पनाह देने में ये सब के सब एक जैसे ही है।

बिहार के मुजफ्फरपुर बालिकागृह यौन शोषण कांड (Bihar shelter home rape case) ने पूरे देश को उस समय हिलाकर रख दिया जब ये खबर सामने आई कि बिहार के बालिकागृह में 42 में से 34 बच्चियों का यौन-शोषण किया गया।

इस बालिकागृह को बिहार सरकार की फंडिंग प्राप्त थी और यह मुजफ्फरपुर के साहू रोड पर चल रहा था। 34 बच्चियों से रेप या यौन-शोषण की पुष्टि होने पर एनजीओ के संचालक ब्रजेश ठाकुर को हिरासत में ले लिया गया था।

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बिहार शेल्टरहोम रेप केस (Bihar shelter home rape case) पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती बरतते हुए स्वत: संज्ञान लिया था और तब जाकर इस मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर की गिरफ्तारी हुई थी जिसकी नीतीश कुमार सरकार से नजदीकियों की खबर सामने आई थी।

ब्रजेश ठाकुर को बिहार सरकार और केंद्र सरकार से फंडिंग मिलती रहती थी। इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस हैवानियत के बाद से ये सभी बच्चियां आजतक सदमें में है और शारीरिक उत्पीड़न से भी इनकी रूह कांप रही है। इस जघन्य अपराध की खबरों ने मीडिया की सुर्खियां भी बटोरी और बिहार में सुशासन बाबू के नाम से मशहूर नीतीश कुमार की कैबिनेट में सामाजिक कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को भी इसी अपराध में संलिप्तता के चलते कुर्सी गंवानी पड़ी।चूंकि उनके पति चंद्रशेखर वर्मा की मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से नजदीकियां जांच में सामने आई।

गौरतलब है कि फरवरी 2018 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की टिस टीम ने पहली बार बिहार बालिकगृह कांड पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी और समाज कल्याण विभाग को सौंपी थी। इसमें बताया गया था कि कैसे बालिकागृह की आड़ में बच्चियों के साथ सालों से यौन-शोषण हो रहा है।

रसूखदार लोगों को ये बच्चियां सप्लाई की जाती है और इस बालिकागृह यौन-शोषण का अड्डा बन चुका है। इस मामले के खिलाफ पहली बार 31 मई 2018 में एफआईआर दर्ज की थी और तब से अबतक सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर केंद्र,राज्य और मीडिया को लताड़ लगा चुका है,जिन्होंने इस खबर को गैरजिम्मेदाराना तरीके से रिपोर्ट किया। 29 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के दबाव के चलते ये मामला सीबीआई को सौंपा गया और सीबीआई ने मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और अन्य आरोपियों पर मामला दर्ज किया।

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लेकिन हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) जी लालकिले की प्राचीर से जब देश को संबोधित करते हुए अपनी फर्जी उपलब्धियां गिना रहे थे तो बहुत ही चतुराई से बिहार बालिकागृह यौन शोषण कांड पर चु्प्पी साध गए और गोदी मीडिया ने भी इस बाबत पीएम मोदी से कोई सवाल नहीं किया कि प्रधानमंत्री जी की पार्टी के समर्थन से चल रही बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार से समर्थन वापस क्यों नहीं लिया जा रहा?

और क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से पूरे देश की महिलाओं और बच्चियों को ये आश्वासन नहीं दिया कि वे इस प्रकार की निर्मम घटनाओं की सख्त निंदा करते है? ठीक जैसा कि आजकल पीएम मोदी उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए राजस्थान के अलवर दुष्कर्म कांड पर मायावती और अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को घेर रहे है।

बलात्कार चाहे किसी भी राज्य की महिलाओं या बच्चियों के साथ हो उस पर सियासत नहीं संवेदना होनी चाहिए और ऐसे अपराधों में लिप्त सरकारी तंत्र और आरोपियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। न कि कोई बयानबाजी।

बच्चियों या महिलाओं से बलात्कार पर कम से कम प्रधानमंत्री को तो राजनीति नहीं करनी चाहिए। अच्छा होता अगर पीएम मोदी जो समर्थन वापसी की सलाह मायावती को दे रहे है ठीक ऐसा ही कार्य वे खुद नीतीश कुमार सरकार के साथ करते

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बिहार में भाजपा के समर्थन से ही नीतीश कुमार की सरकार चल रही है और उनकी कैबिनेट मंत्री मंजू वर्मा के पति की नजदीकियां खुद बिहार बालिकागृहकांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर से देखी गई है।

इतना ही नहीं, पीएम मोदी तब भी कुछ क्यों नहीं बोले जब खुद सीबीआई ने 4 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर और उसके अन्य आरोपी सहयोगियों ने कथित रूप से 11 बच्चियों की हत्या भी कर दी है। शमशान घाट से इनकी हड्डियां भी प्राप्त हो गई है।

ठीक इसी तरह बीते 26 अप्रैल 2019 को राजस्थान के अलवर में एक दलित महिला के साथ 5 लोगों ने गैंगरेप (Alwar gangrape case) करके हैवानियत का जो नंगा नाच किया गया, उसकी भी जितनी निंदा की जाए कम है।

क्या है अलवर गैंगरेप केस? (Alwar gangrape case)

अलवर में आरोपियों ने बाइक पर जा रहे एक दंपत्ति को रोककर महिला के पति को बंधक बनाया और पीड़ित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने महिला का वीडियो बनाकर उसे वायरल भी कर दिया। अब आरोप है कि पीड़िता की शिकायत को राज्य की पुलिस ने राजस्थान में चुनाव (6 मई) के कारण सामने नहीं आने दिया और दबाकर रखा था। फिर राजस्थान में जैसे ही दलित संगठनों को इसकी भनक लगी उन्होंने अलवर और जयपुर में राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को दबाकर रखने के कथित पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया और आरोपी भी पकड़े गए।

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गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को बसपा का समर्थन प्राप्त है। इसलिए पीएम मोदी अब अलवर दुष्कर्म कांड पर इस चुनावी गंगा में हाथ धो रहे है और इस जघन्य अपराध पर जमकर सियासत कर रहे है। जबकि बिहार बालिकागृह दुष्कर्म कांड पर मासूम बच्चियों के लिए आजतक पीएम मोदी ने एक शब्द नहीं बोला है और न ही उन्नाव गैंगरेप केस में मुख्य आरोपी रहे भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर भी कोई बयानबाजी की और न ही इस पीड़िता के दर्द ने उनकी आत्मा को झकझोरा (PM Modi politics on Alwar gangrape)। 

लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि इस देश की महिला और बच्चियां चाहे भाजपा शासित राज्यों की हो या फिर विपक्षी पार्टियों के राज्यो की…सभी की अस्मिता देश के प्रधानमंत्री की नजर में एक समान होनी चाहिए। फिर पीएम मोदी अलवर दुष्कर्म कांड पर इतनी सियासत कर रहे (PM Modi politics on Alwar gangrape) है और बिहार बालिकागृह यौन-शोषण कांड पर आजतक चुप्पी साधकर क्यों बैठे (why keep silence on Bihar Shelter home rape case) है?

क्या इस देश के विभिन्न राज्यों की महिलाओँ और बच्चियों के बलात्कार,रेप व यौन-शोषण भी अब देश के प्रधानमंत्री को चुनावी मुद्दा लगने लगे है?

क्या एक प्रधानमंत्री का अपनी समर्थित सरकार में दुष्कर्म पर चुप्पी साध लेना और विपक्षी समर्थित सरकार के राज्य के अपराध पर वोट की रोटियां सेंकना न्यायसंगत है?

सभी को न्याय और नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले यदि पीएम मोदी खुद के गिरेबां में झांक लें तो सच में देश में सकारात्मक बदलाव हो जाए। दलित बेटी का दर्द देखने वाले पीएम मोदी को बिहार बालिकागृह में 34 बच्चियों के साथ की गई हैवानियत और 11 मासूमों की निर्मम हत्या आजतक क्यों नहीं दिखी? सोचिएगा जरूर!

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वैसे भी 2018 में एनसीआरबी (National crime record bureau) के आंकड़ों से स्पष्ट हो चुका है कि 2014 से 2016 के दौरान भाजपा या उसके सहयोगी शासित राज्यों में सबसे ज्यादा दलित उत्पीड़न के मामले हुए है।जिसमें उत्तर प्रदेश (10,426) ही टॉप पर रहा और यहां दलित महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले 1065 दर्ज हुए। अब सवाल यह है कि इस रिपोर्ट के बाद भी पीएम मोदी (PM Modi) ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा क्यों नहीं लिया? या इन दलित बेटियों का दर्द क्यों नहीं दिखा? जवाब साफ है- बेटियों की इज्जत तो है बहाना सभी को वोटों की रोटियां है खाना।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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