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लोकप्रिय शिवराज को मिल सकती है भाजपा में बड़ी ज़िम्मेदारी,मोदी-शिवराज की जोड़ी आ सकती है नज़र

कल अपने एक बयान से कि टाइगर अभी जिन्दा है। शिवराज ने ये दिखा दिया कि उनके अन्दर अभी राजनीतिक संभावनाएं बहुत बची हुईं हैं

Modi-Shivraj- एक तरफ कमलनाथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे। दूसरी तरफ शिवराज सिंह चौहान उसी आत्मीयता के साथ अपनी विदाई देख रहे थे और उन्होंने लोकतंत्र का सम्मान करते हुए, बड़ा दिल दिखाते हुए मंच पर मौजूद रह कर नयी सरकार का इस्तकबाल भी किया|

इतनी आत्मीयता के साथ कमलनाथ का स्वागत किया कि कांग्रेस भी खुद शिवराज की तारीफ करने से खुद को रोक ना सकी।

उस दिन भी एक तस्वीर बहुत चर्चा में रही। एक तरफ कमलनाथ, एक तरफ सिंधिया और बीच में शिवराज और तीनों ने हाथ उठाकर लोकतंत्र का स्वागत किया।

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यही तो प्रजातंत्र है।  इसको बताते हुए शिवराज ने अपनी राजनीतिक शख्सियत दिखायी और इसकी तारीफ़ ना सिर्फ कांग्रेस ने की बल्कि कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह तक ने की। इसी के साथ शिवराज का राग राजधानी भोपाल से लेकर घाटी तक पहुँच गया।

कल अपने एक बयान से कि टाइगर अभी जिन्दा है। शिवराज ने ये दिखा दिया कि उनके अन्दर अभी राजनीतिक संभावनाएं बहुत बची हुईं हैं। अगर अब भाजपा के अन्दर की बात की जाए तो एक झुण्ड ये चाहता है कि शिवराज को मध्यप्रदेश से निकालकर केंद्र की राजनीति में लाया जाए।

वो भी बहुत देर करके नहीं बल्कि इसी लोकसभा के चुनाव के आसपास। क्यूंकि शिवराज के पास एक बहुत बड़ा जन समूह है और शिवराज ज़मीनी नेता होने के साथ साथ जन प्रिय नेता भी हैं | उनके अन्दर भविष्य के और बड़े कद्दावर नेता होने के गुण छुपे हुए हैं |

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राजधानी भोपाल में जो हुआ उसका सीधा असर दिल्ली के बीजेपी कार्यालय में हुआ। क्यूंकि कहीं न कहीं बीजेपी के अन्दर भी एक विकल्प की तलाश तो चल ही रही है  कि अमित शाह के बाद कौन पार्टी की ज़िम्मेदारी संभालेगा।

इस चर्चा की धुरी में मूलत: तीन प्रकार के लोग हैं। पहले, संघ के वे नेता और पदाधिकारी जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सर्वशक्तिमान होने से रोकना चाहते हैं और भाजपा में ‘पावर बैलेंस’ करने की वकालत करते हैं।

दूसरे, भाजपा के वे नेता जो लालकृष्ण आडवाणी के करीबी थे  और बाद में सुषमा स्वराज को उनकी उत्तराधिकारी मानने लगे|

तीसरे, वे पत्रकार जो भाजपा से संबंध रखते हैं या रखना चाहते हैं लेकिन इस वक्त के दिल्ली दरबार में ऐसा संभव नहीं है।

संघ से जुड़े एक नेता बताते हैं कि भाजपा की सबसे ताकतवर कमेटी संसदीय बोर्ड में दिल्ली की राजनीति करने वाले नेताओं के अलावा सिर्फ शिवराज सिंह चौहान ही ऐसे हैं जिनका अपना जनाधार है। ऐसे में वे भी खुद को दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं रख पाएंगे|

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शिवराज पिछड़ी जाति के लोकप्रिय नेता हैं। ये बात उनके पक्ष में जाती है। जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि भविष्य में उन्हें केंद्र में महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी मिल सकती है। हो सकता है हमें मोदी–शिवराज की जोड़ी भी देखने को मिल निकटतम आम चुनाव में। पर अभी शिवराज इन अटकलों से बचते हुए नज़र आते हैं।

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