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ट्रैफिक के बदले नियम:आम जनता की सहूलियत या मुसीबत

पुलिस वालों ने ड्राइविंग लाइसेंस देखा और गाड़ी के कागज़ देखे।

Traffic Rules Change

“पता नहीं कब तक तृषा को अस्पताल में रहना पड़ेगा। पिछले एक हफ्ते से अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टर ने अभी दस हजार और जमा करने को बोला है।”

वह मन ही मन सोच – सोच कर परेशान हो रहा था। उसकी थोड़ी सी जमा पूंजी तो पहले ही खत्म हो गई। आज कुछ दोस्तों की मदद से उसने पैसों की व्यवस्था की थी, जिन्हें लेकर वह अस्पताल जा रहा था।

पता नहीं तृषा की तबियत कैसी होगी। यह कार उसे तृषा के बिना सूनी-सूनी लगती थी। यूँ तो वह कार दोनों ने अपने पैसे मिलाकर खरीदी थी लेकिन कार की देखभाल उससे ज्यादा तृषा किया करती थी।

सुबह वह दोनों इसी कार से साथ-साथ ऑफिस जाते थे। उस दिन भी दोनों साथ ही निकले थे लेकिन दोपहर में उसे अचानक तृषा के ब्रेन स्ट्रोक की खबर मिली।

उसके ऑफिस वालों ने उसे अस्पताल में भर्ती करवाने की औपचारिकता तो पूरी कर दी थी लेकिन आगे डॉक्टरों की मोटी फीस का इंतजाम उसे स्वयं ही करना था।

अस्पताल में एक दिन रहने का ही खर्चा इतना ज्यादा था, फिर दवाइयों के खर्चे, रूम चार्ज, विजिटिंग चार्ज और भी न जाने कौन-कौन से टेस्ट करवाने में वह लगभग कंगाल हो चुका था।

“ए गाड़ी रोको।” अचानक एक रेड लाइट पर पुलिस वाले ने उसकी गाड़ी रुकवाई।

इतनी परेशानी की हालत में वह भूल ही गया था कि एक सितंबर से देश भर में नए ट्रैफिक नियम(Traffic Rules Change) शुरू हो रहे हैं।

वह सोचने लगा कि वह गाड़ी बहुत तेज तो नहीं चला रहा था और न ही उसने रेड लाइट पर गाड़ी चलाई । लाइसेंस भी उसके पास है तो फिर भला पुलिसवालों ने उसकी गाड़ी क्यों रुकवाई?

पुलिस वालों ने ड्राइविंग लाइसेंस देखा और गाड़ी के कागज़ देखे। फिर जब प्रदूषण नियंत्रण के कागज देखे तो उसे 500 रुपए जुर्माना देने को कहा।

इतने दिनों की भागदौड़ में वह ये भूल ही गया था कि गाड़ी में पॉल्यूशन कंट्रोल की समय सीमा खत्म हो चुकी है।उसके लिए इस समय एक-एक पैसा कीमती था।

वह पुलिसवालों के सामने गिड़गिड़ाने लगा, “जाने दो न साहब, बीवी अस्पताल में बीमार पड़ी है। उसके इलाज के पैसे बड़ी मुश्किल से जुटा पाया हूँ।”

“अच्छा, पुलिसवालों को बेवकूफ बना रहा है। कौन सा अस्पताल है, बताना जरा।” पुलिसकर्मी उसकी किसी बात पर विश्वास नहीं कर रहे थे।

“साहब आप चाहो तो पता कर तो, अपोलो अस्पताल में वार्ड नम्बर 5 में मेरी पत्नी तृषा भर्ती है।” वह प्रार्थना कर रहा था, लेकिन पुलिसवाला उसकी एक नहीं सुन रहा था।

उसने खुद को इतना असहाय पहले कभी महसूस नहीं किया था। अगर पुलिस वाले को अभी पैसे देने पड़ गए तो अस्पताल में डॉक्टर के पूरे पैसे कैसे भर पाएगा। अब किससे उधार माँगने जाएगा।

यह सब सोचते-सोचते उसकी आंखें भर आईं। तभी बगल में खड़ी पुलिस की गाड़ी से एक पुलिस वाला उतरकर नीचे आया और आदेशात्मक स्वर में बोला कि उसे जाने दिया जाए।

उस पुलिसवाले ने चुपचाप उसे जाने दिया और साथ ही हिदायत दी कि आगे चौराहे से न जाकर बीच के रास्तों से जाए जिससे दुबारा चेकिंग में न पकड़ा जाए।

इस एहसास से उसका दिल भर आया कि अब भी इंसानियत खत्म नहीं हुई। पुलिसवाले ने इतने सख्त कानून बनने के बाद भी उसे जाने दिया।

गाड़ी स्टार्ट करते समय उसे गाड़ी में बैठे दूसरे पुलिसवाले की आवाज सुनाई दी। हम पुलिसवाले कोरी भावुकता में बहकर कोई निर्णय नहीं लेते। हमने अपोलो अस्पताल में फोन करके पता कर लिया है कि तुम्हारी बीवी सचमुच वहां भर्ती है।

उसने ध्यान से देखा तो सचमुच उसके साथ बैठे दूसरे पुलिसवाले ने किसी से बात करके अभी अभी फोन रखा था। पुलिसवाला मुस्कुराते हुए बोला, “हमारा मकसद गलती करने वाले को सजा देना है। मजबूर व्यक्ति पर जुल्म करना नहीं।”

Traffic Rules Change

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Bhavana Gaur

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है और लेखन में गहन रुचि रखती है।

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