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Valentine day special: वैलेंटाइन डे पर ढूंढ रहे है अपना सच्चा प्यार? यहां मिलेगा जवाब

उसकी आँखों के सामने बार बार कमल का चेहरा आ रहा था।कमल यानि कमलेश, पिछले साल ही तो उसने सुमि से अपने प्यार का इज़हार किया था और आज...

 Valentine day special: Hindi Opinion on Valentines Day 

“डिंग-डाँग,डिंग-डाँग ” दरवाजे की घंटी लगातार बजती जा रही थी।

“हे भगवान ! ये लड़की तो आफत कर देती है।” मधु जी ने बड़बड़ाते हुए दरवाजा खोला।

“कितनी देर से घंटी बजाए जा रही है।आते आते टाइम लगता है ना।” मधु जी ने उसे फटकार लगाई, लेकिन उनकी बात को अनसुना करती हुई सुमि अपने कमरे में जाने लगी।

“अरे, अब खाना तो खा ले, ऊपर कहाँ जा रही है?” मधु जी ने पीछे से आवाज़ लगाई, तो उसने उत्तर दिया,”मुझे अभी भूख नहीं है। प्रैक्टिकल फ़ाइल में कुछ डायग्राम बनाने हैं। काम पूरा करके थोड़ी देर में आती हूँ।”

सुमि के उत्तर से मधु जी संतुष्ट हो कर अपने काम में लग गई। आखिर कॉलेज का आखिरी साल है। पढ़ाई पर तो ध्यान देना ही है।

     सुमि पढ़ाई का बहाना करके अपने कमरे में आ गई लेकिन इस वक़्त वो पढ़ाई करने नहीं आई थी बल्कि कुछ देर वह अकेली रहना चाहती थी। उसने अपना बैग  पटक दिया और पलंग पर ही बैठ गई।

उसकी आँखों के सामने बार बार कमल का चेहरा आ रहा था।कमल यानि कमलेश, पिछले साल ही तो उसने सुमि से अपने प्यार का इज़हार किया था और आज कॉलेज से वापस आते समय वही कमल उसे पार्क में एक दूसरी लड़की के साथ दिखा, चॉकलेट खिलाते हुए। 

“खूब मनाओ चॉकलेट डे (Chocolate Day), मैं भी कल टेडी डे (Teddy Day) पर प्रसून को टेडी बियर उपहार में देकर अपना बॉयफ्रेंड बना लूंगी।” सोचते हुए सुमि का मन थोड़ा शांत हुआ। 

बैग रखने के लिए उसने जैसे ही अलमारी खोली, सामने एक बड़ा सा टेडी बियर उसे नज़र आया। वो टेडी बियर देखकर हैरान हो गई। 

“कहीं कमल ने तो उसके लिए टेडी बियर नहीं भिजवाया?” वो सोच में पड़ गई।”अरे वह भी क्या सोचने लगी। भला कमल उसके घर पर कोई गिफ्ट क्यों भिजवाने लगा। ज़रूर ये उसका छोटा भाई ललित लाया होगा। लेकिन ललित तो अभी छोटा है। इसी साल तो उसने कॉलेज में एडमिशन लिया है।

“कॉलेज में आ गया है। ज़रूर कोई गर्लफ्रेंड बना ली होगी।” खुद ही सवालों के घेरे  में उलझते, सुलझते उसने माँ को आवाज़ लगाई, “माँ, मैंने कितनी बार मना किया है ललित को, फिर भी वह अपना सामान मेरी अलमारी में रख देता है।”

उसकी आवाज़ माँ के साथ-साथ ललित तक भी पहुंची और प्रत्युत्तर में उसका भी तुनकता हुआ जवाब आया, “मैं क्यों रखूंगा अपनी चीज़ें तुम्हारी अलमारी में। मेरी खुद की अलमारी है।”

“अच्छा, तो फिर यह टेडी बियर कहां से आया?” कहते हुए वह टेडी बियर नीचे ले आई।

“मुझे क्या पता?” ललित ने कुछ आश्चर्य से बोला। 

“एक तो झूठ बोलता है, ऊपर से अकड़ दिखाता है।” सुमि को गुस्सा आ गया।

“अरे, अब झगड़ा बंद भी करो बच्चों, आओ खाना खा लो। इसे मेरे कमरे में रख दो। जिसका भी हो ले लेना। वैसे ये बहुत प्यारा है। गुलाबी और सफेद।” दादी ने दोनों को समझाया।

दोनों बच्चों को ज़ोरों की भूख लगी थी इसलिए दादी की बात मानकर दोनों खाना खाने आ गए।

       “अरे, देखो तो बच्चों, तुम्हारे सुनील चाचू ने तुम्हारे लिए कितनी सारी चॉकलेट भिजवाई है।”शाम को दादाजी चाचू के घर से आते ही बोले।

“वाह!चाचू को याद था कि आज चॉकलेट डे (Chocolate Day) है।” चाचू के उपहारों को हर बार बच्चों के खेलने की चीज बोलने वाली सुमि ने जब लपककर चॉकलेट ली, तब सब मुस्कुरा पड़े। 

रात हो गई थी। सुमि लेटी हुई थी लेकिन उसे नींद नहीं आ रही थी। वह कभी कमलेश के बारे में सोचती, तो कभी प्रसून के बारे में। उसे रह-रह कर कमलेश के ऊपर गुस्सा आ रहा था।

तभी उसकी नज़र दरवाजे पर एक पुरूष की परछाई पर पड़ी। एक पल को वो सहम सी गई। “क्या कमलेश आया होगा?” खुद से ही सवाल पूछती चुपचाप लेटकर वो उस परछाई पर नज़र रखने लगी।

कोई उसकी आलमारी खोल रहा था। “कहीं चोर तो नहीं?”, सोचकर उसने शोर मचाते हुए उठकर झटके से लाइट जला दी।

“दादाजी!!” सामने दादाजी को देखकर वह हैरान रह गई। 

“अरे, चुप कर पगली, मैं यहाँ अपना कुछ सामान लेने आया था।” दादाजी ने बोला, लेकिन तब तक शोर सुनकर मम्मी-पापा ऊपर आ गए थे।

“यहाँ क्या चश्मा ढूंढ रहे हैं पिताजी, आपका चश्मा तो यह रहा।” कहते हुए जब सुमि के पापा ने दादाजी को उनका चश्मा पकड़ाया, तो दादाजी ने कोई उत्तर नहीं दिया।

तब तक दादी भी ऊपर आ गईं थीं। 

“मुझे एक मिनट में आने को बोलकर यहां क्यों आ गए आप। कुछ ढूंढना हो तो बच्चों से बोल दिया करिए।”दादी की बात पर दादाजी चुपचाप वापस जाने लगे, तब तक पीछे से ललित की आवाज आई, “दादाजी, कहीं आप इसे तो नहीं ढूंढ रहे थे।” उसके हाथ में वो गुलाबी टेडी बियर था। उसे देखते ही दादाजी का चेहरा खिल गया।

उन्होंने लपककर उसके हाथ से वो टेडी बियर ले लिया, फिर कुछ झेंपते हुए से बोले, “कल टेडी डे (Teddy Day) है ना। तुम्हारी दादी को टेडी बियर बहुत पसंद हैं। अब बच्चों के सामने ये बात कैसे कहती, तो मैंने सोचा कि मैं उनके लिए उपहार में टेडी बियर दे दूं।

यहां छुपाकर रखा था कि कल दादी को सरप्राइज दूंगा, लेकिन तुम लोगों ने सब किये कराए पर पानी फेर दिया।”

“अरे, दादाजी, घड़ी देखिये, 12 बज गए हैं। टेडी डे  (Happy Teddy Day 2019)  शुरु हो गया है। आप दादी को अपना सरप्राइज गिफ्ट दे सकते हैं।” सुमि के कहने पर सबने घड़ी की ओर नज़र डाली, तभी दादाजी ने आगे बढ़कर “हैप्पी टेडी डे” (Happy Teddy Day)  कहते हुए दादी को वो गुलाबी टेडी बियर दिया तो आधी रात में सुमि के कमरे में तालियां बजने लगी।

अपने प्यार भरे घर को देखकर सुमि सोच रही थी कि क्या कमल या प्रसून में से कोई उम्र भर उसे यूँ ही प्यार करेगा जैसा उसके दादाजी दादीजी से करते हैं। अपने सवालों के जवाब ढूंढते हुए वो वैलेंटाइन डे (valentines day) के मीठे सपने में खो गई।

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Bhavana Gaur

लेखिका स्वतंत्र पत्रकार है और लेखन में गहन रुचि रखती है।

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