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पहले परिवार और अब नमक, क्या सपा को दिला पायेगी राजनीतिक चमक

नमक की चोट या वोट

भारत एक ऐसा देश जहां चाणक्य जैसे चतुर और बहुत प्रभावशाली राजनीतिज्ञ ने जन्म लिया। चाणक्य नीति सम्पूर्ण विश्व में सर्वाधिक कुशल व प्रभावशाली मानी जाती है। ठीक ऐसे ही जब आज के परिप्रेक्ष्य में राजनीति का आंकलन करें तो चाणक्य की नीति के गुर इनमें स्पष्ट नजर आते है। हमारे आज के राजनेता व उनकी राजनीति उतनी ही विविध है जितना की  हमारा भारत। हमारा देश बहुधर्मी होने के कारण विविध प्रकार के राजनीतिक हालत में विकसित हुआ है। देश की राजनीति में उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूर्व से लेकर पश्चिम तक सभी तरह के लोगों का अपना एक अलग ही राजनीतिक स्थान है और अगर राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कुछ  राज्यों का नाम  लिया जाएं, जिन्होंने देश को बहुत सारे प्रधानमंत्री दिए है, तो उनमे उत्तर प्रदेश का नाम सबसे पहले आता है । यह भूमिका जो मैंने उत्तर प्रदेश के लिए तैयार की है उसका एक अलग ही कारण है। देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले प्रदेश में उत्तर प्रदेश का नाम हमेशा सबसे ऊपर रखा जाता है और हो भी क्यों न हो, देश के बहुत से महत्वपूर्ण लोग इसी राज्य से आते हैl शायद इसीलिए इस प्रदेश पर सत्ता का सुख और इस पर राज हर राजनीतिक पार्टी करना चाहती है । कहते है देश की सत्ता  का रास्ता यही से होकर जाता है l जिसने यहाँ विजय पा ली, यहाँ के लोगों का मन जीत लिया, वो देश में सत्ता का सुख  भोगने का अधिकार पा जाता है l हम बात कर रहे है अभी के यहां के राजनीतिक माहौल की l यहां सियासत हमेशा गर्म रहती है और अगर 2017 का चुनाव नजदीक हो तो सियासत हमेशा उफान पर ही मिलेगी l

अभी कुछ दिनों पहले आपने उतर प्रदेश की सत्ता में काबिज़ समाजवादी पार्टी के आपसी वाद- विवाद को देखा होगा l किस तरह से एक ही परिवार के लोग आपस में लड़ रहे है …? और लगातार दो दिनों तक यह देश में चर्चा का विषय बन गया थाl हर कोई यह जानने को उत्सुक था की क्या होगा उत्तर प्रदेश का …? आप और हम भी यही सोच कर परेशान थे कि सच में क्या होगा यूपी का?… पर हुआ कुछ नहीं …. सुबह का भुला शाम को घर लौट आये तो उसे भुला नहीं कहते …..! और यही कहावत को चरितार्थ किया हमारी आपकी समाजवादी पार्टी ने।ऐसा क्या हुआ की अचानक अखिलेश यादव ने अपनी नयी पार्टी बनाने की सोची ….? सब तरफ चर्चा पिता मुलायम और अखिलेश में अलगाव की रही ….? चाचा भतीजे के बीच दुश्मनी ….? पर इन सब के बीच जो सबसे बड़ा सवाल था …वह कही खो गया … कहां हम थे और कहां हम है …? क्या सच में यह एक आपसी परिवार का विवाद था ? या यह एक सोची समझी राजनीतिक चाल थी….? अगर आप गौर करे तो कुछ  प्रश्नों के जवाब में जानना चाहता हूं।

इस विवाद की मुख्य वजह क्या थी ..?

इस विवाद का सबसे बड़ा फायदा किसे हुआ ..?

क्या सच में चाचा भतीजे के बीच सबकुछ ठीक नहीं था…?

अपनी राजनीतिक ताकत कौन बताना चाहता था …?

समाजवादी पार्टी या अन्य पार्टी किसने इस विवाद को जन्म दिया …?

2017 के चुनाव का इस विवाद से क्या लेनादेना है ….?

क्या यह एक राजनीतिक चाल नहीं थी …..?

अपने सभी कामों को किस प्रकार सिर्फ एक ही चाल में लोगों तक पहुंचा दिया समाजवादी पार्टी ने और आप व हम बस देखते ही रह गए l ऊपर लिखे सवालों का जब आप जवाब खुद से जानना चाहेंगे, तो आप खुद ब खुद समझ जायेंगे कि हम आपसे क्या कहना चाहते है l

हाल ही के दिनों में एक अफवाह ने फिर सुर्खिया बटोरी थी कि नमक 300 से 500 रुपये किलो हो गया l और इसकी शुरूवात कहां से हुई थी पता नहीं  लेकिन दिल्ली, मुंबई के साथ -साथ उतरप्रदेश में भी इस अफवाह ने जोर पकड़ा था l यह जांच का विषय है कि यह अफवाह किसने और क्यों उडाई थी l पर रातों रात इस खबर ने सुर्खियां तो बहुत बटोरी …और अब समाजवादी पार्टी के नमक का लांच होना…क्या नमक का रातों रात ऊंचे दामों पर बिकना और  सपा का नया चुनावी नमक आना… दोनों बातों में एक इत्तेफाकन समानता या साजिश की तरफ इशारा नहीं करता है …? या यह महज एक संयोग है …? न इस बारे हम इतना जानते है, न आप पर। लेकिन हां इसका फायदा बखूबी समाजवादी पार्टी ने उठाया । समय की यही मांग है मिले मौक़ा तो लगा दो चौका l

राजनीति में सबकुछ जायज है l यहां सत्ता पाने या सत्ता में रहने के लिए सारे दावपेंच अपनाने पड़ते हैl सही या गलत कोई नहीं सोचता बस उससे होने वाले फायदे के बारे में ही सोचा जाता है और यही किया हर राजनीतिक पार्टी ने अपने -अपने तरीके से। किसी ने राम के नाम का सहारा लिया, तो किसी ने अल्लाह का, तो किसी ने आम जनता का, लेकिन सबका मकसद एक ही था सत्ता और सत्ता में आने के बाद सारे वादे खोखले …! आश्चर्य है न कि आज 21 वीं में भी सबसे ज्यादा अगर कुछ बिकता है तो वह है सपना…! ‘सपना’ बेचना जिसे आ गया वो राजा l  आज मैं एक आम – आदमी की तरह सोच कर देखता हूं तो अपने आप को सबसे ज्यादा ठगा हुआ महसूस करता हूं। किसी ने कभी राम के नाम पर लूटा, तो किसी ने महंगाई के नाम पर, तो किसी ने डर दिखाकर, तो किसी ने हमारा फायदा दिखाकर ….. मुझे(जनता) को लूटने के लिए लोगों ने चेहरे बदले, चोले बदले और  तरह -तरह के प्रलोभन दिये .. और सबकुछ जानते हुए भी अनजान बन मैं  हर पल लूटता रहा।

 

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समय धारा

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