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फायदे-नुकसान से इतर है भारत और चीन के रिश्ते: विदेश सचिव

नई दिल्‍ली: भारत और चीन के संबंधों के बारे में विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के संबंध किसी एक को फायदा या दूसरे को नुकसान की अवधारणा से परे हैं और दोनों देशों को सामरिक परिपक्‍वता के साथ एक-दूसरे से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के द्विपक्षीय संबंध ‘जटिल’ हैं लेकिन संबंधों के सहयोगपूर्ण और सम्मिलित पक्ष की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।

जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि चीन से भारत के हितों का ध्यान रखने की उम्मीद की जाती है, खासकर तब जब उनका चीन के हितों से टकराव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद से मुकाबला इसमें आता है और जाने-पहचाने आतंकवादियों और संगठनों पर प्रतिबंध लगाना भिन्‍नता का मुद्दा नहीं होना चाहिए। ना ही विकास से जुड़े मुद्दों पर आपत्ति होनी चाहिए जैसे कि असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग और निवेश तक भारत की प्रत्याशित पहुंच।’

विदेश सचिव चीन द्वारा पाकिस्तानी आतंकी और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को अल-कायदा या इस्लामिक स्टेट से संबद्ध समूहों की संयुक्त राष्ट्र की काली सूची में डलवाने की भारत की कोशिश को नाकाम करने और परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत का प्रवेश रोकने की तरफ इशारा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। इसका एक कारण दोनों के कंधों पर इस खास संबंध के इतिहास का भार होना है।

जयशंकर ने कहा, ‘पिछले तीन दशकों में हमारे संबंधों का रिपोर्ट कार्ड अनुमान से ज्यादा मजबूत है।’ उन्होंने कहा कि भारत-चीन के संबंध आज असामान्यता की स्थिति से बाहर निकल चुके हैं और इसके लिए दोनों देशों की क्रमिक सरकारों को श्रेय दिया जाना चाहिए जिन्होंने बातचीत में गतिरोध जारी रहने के बावजूद सीमा पर शांति सुनिश्चित की है।

विदेश सचिव ने कहा, ‘संप्रभुता से संबंधित मुद्दों सहित मुश्किल समस्याओं को दरकिनार नहीं किया गया है।’ विदेश सचिव ने कहा कि विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर वैश्विक मंचों पर साथ काम करने की दोनों देशों की क्षमता भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा, ‘ईएएस (पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन), जी-20 और एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) से लेकर ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) और बेसिक (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन) तक विभिन्‍न मंचों पर हमारा मिलना और सहयोग

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