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जब तक कश्मीर का हल नहीं तब तक आतंकवाद ख़त्म नहीं: फारुख अब्दुल्ला

श्रीनगर, 14 अक्टूबर : जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला ने शुक्रवार को यहां कहा कि भारत और पाकिस्तान बातचीत के जरिए कश्मीर मुद्दे को सुलझाएं, ताकि इलाके में आतंकवाद खत्म हो। विपक्षी दलों के साथ बैठक के बाद उन्होंने कहा कि अलगाववादियों सहित सभी से बात की जाए, ताकि घाटी में करीब तीन महीने से अधिक समय से जारी आशांति खत्म हो, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित है।

अब्दुल्ला ने राज्य के विपक्षी दलों की भारत-पाकिस्तान के बीच गतिरोध, इसके कश्मीर घाटी के अशांत स्थिति पर प्रभाव और दोनों देशों की सीमा पर तनाव की स्थिति पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई थी।घाटी में अशांति के बाद अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी में फारूख ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियां राज्य और भारत और पाकिस्तान के बीच शांति चाहती हैं। कश्मीर में जुलाई के शुरुआत से जारी अशांति में करीब 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।बैठक के बाद अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, “दोनों देशों को बैठना चाहिए और कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए। आतंकवाद को खत्म करने का यही एकमात्र हल है, वर्ना यह बढ़ता जाएगा।” नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा, “हम सभी आगे की तरफ देख रहे हैं और पीछे नहीं देख रहे कि क्या घटित हुआ है। यदि हम पड़ोसियों के साथ शांति से रहेंगे, तो हम सभी समृद्ध होंगे। यदि हम टकराव का रास्ता अपनाएंगे तो उनका विकास बाधित हो सकता है, लेकिन हमारा भी प्रभावित होगा।” यह पूछे जाने पर कि उनकी यह टिप्पणी आतंकवादियों को प्रोत्साहित करेगी? अब्दुल्ला ने कहा, “यदि हम कश्मीर मुद्दे का हल करते हैं तो आतंकवाद नहीं रहेगा। यदि दोनों देश इस मुद्दे का समाधान करें तो आतंकवाद खुद खत्म हो जाएगा।”नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ बातचीत ही एक जरिया है, जिससे कश्मीर की समस्या खत्म हो सकती है और उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से अलगाववादियों को साथ लेकर संवाद करने का आग्रह किया और राजनीतिक मुद्दे का एक राजनीति समाधान खोजने को कहा।उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं कि इसे हल करने की जरूरत है और यह सत्तारूढ़ पीडीपी का हुर्रियत कांफ्रेंस सहित सभी हितधारकों से संवाद एजेंडे का हिस्सा है।”अब्दुल्ला ने कहा, “बातचीत के जरिए हमारा कश्मीर मुद्दा भी हल होगा। युद्ध कोई हल नहीं है। जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति के लिए पाकिस्तान जा सकते हैं तो हम अपने लोगों से बातचीत क्यों नहीं कर सकते।”अब्दुल्ला ने हाल में करीब तीन महीने से हिंसा के दौरान जेल में बंद या अपने घरों में नजरबंद सभी अलगाववादी नेताओं की जल्द रिहाई की मांग की। जुलाई में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उपजी हिंसा से हजारों लोग घायल हो चुके है।विपक्षी दलों की यह बैठक उनके गुपकर रोड निवास पर कड़ी सुरक्षा के बीच हुई। कई विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा कि उन्होंने कश्मीर के हालात और राज्य और केंद्र सरकार के निपटने के तरीके पर चर्चा की।बैठक में भाग लेने वालों में कांग्रेस के प्रमुख जी.ए. मीर और माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद युसूफ तारिगामी शामिल रहे।

(आईएएनएस)

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