भारत,चीन अनावश्यक युद्ध से बचें, दोनों देशों के राजनयिक प्रतिकार करें-चीनी विशेषज्ञ की नसीहत

बीजिंग, 24 जुलाई : भारत और चीन के बीच डोकलाम सीमा को लेकर चल रहा तनाव दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है और दोनों देशों के राजनयिकों को सश संघर्ष का प्रतिकार करना चाहिए। चीन के एक विशेषज्ञ ने ये बातें कहीं।

चारहार इंस्टीट्यूट में शोधकर्ता और चाइना वेस्ट नॉर्मल यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज के निदेशक लोंग शिंगचुन ने कहा है कि ‘दोनों देशों के बीच इससे पहले अनावश्यक युद्ध हो चुका है’ और फिर से पनपी युद्ध की परिस्थिति दोनों देशों के लिए हानिकारक होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सोचना गलत है कि चीन डोकलाम सीमा पर उपजे तनाव का इस्तेमाल इसी वर्ष होने वाले कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए कर रहा है।

समाचार पत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ में लिखे अपने लेख में लोंग कहते हैं, “युद्ध की संभावना असंभव नहीं है। इससे पहले भी गलत समय और गलत जगह अनावश्यक युद्ध हो चुका है। इसलिए, दोनों पक्षों के राजनयिकों का यह सर्वोपरि लक्ष्य होना चाहिए कि युद्ध का प्रतिकार करें, जिसे कोई नहीं चाहता।”

उल्लेखनीय है कि भारत, भूटान और चीन की तिहरी सीमा से लगे डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं महीने भर से अधिक समय से तनातनी की स्थिति में हैं।

भारत मामले का समाधान कूटनीतिक स्तर पर चाहता है, लेकिन चीन ने बातचीत के लिए भारत पर सेना वापस बुलाने की शर्त रख दी है।

लोंग अपने लेख में कहते हैं, “इस मामले में उन्हें झांसा नहीं देना चाहिए। भारत की फॉरवर्ड नीति के चलते 1962 का युद्ध भड़का, जिसके कारण दशकों तक भारतीय, चीन का विरोधी बना रहा। लेकिन आज उससे वृहद स्तर का युद्ध होता है तो दोनों देशों के बीच सदियों तक शत्रुता बन जाएगी।”

लोंग ने चीन में मौजूद भारतीय पत्रकारों और भारत के चीन विशेषज्ञों की भी तनाव के लिए बीजिंग और चीन की सरकारी मीडिया पर आरोप लगाने के लिए आलोचना की।

चीन की मीडिया और चीनी विशेषज्ञों ने लगातार भारत पर तीखे हमले किए हैं और युद्ध भड़काने में लगे रहे हैं।

उन्होंने लिखा है, “चीन युद्ध नहीं चाहता। भारत के कई मीडिया समूह और विशेषज्ञ मौजूदा तनाव के लिए चीन पर आरोप लगाते रहे हैं और कहते रहे हैं कि चीन ने अपनी अंदरूनी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए सीमा पर तनाव की स्थिति पैदा की है। कई रिपोर्ट में तो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की 19वीं नेशनल कांग्रेस से इसे जोड़ दिया गया है। यह अव्यावहारिक विश्लेषण बताता है कि कुछ भारतीय मीडिया और कुछ भारतीय विशेषज्ञों के पास चीन की कितनी कम जानकारी है।”

लोंग कहते हैं कि भारत में 200 से ज्यादा चीन के विशेषज्ञ नहीं हैं और उनमें से भी सिर्फ 10 फीसदी ही चीनी भाषा बोल सकते हैं।

वह लिखते हैं, “हां, चीन में कुछ अंदरूनी समस्याएं हैं, लेकिन उनमें से कोई भी इतनी गंभीर नहीं है, जितनी भारत को अपने यहां झेलनी पड़ रही हैं। वास्तव में 19वीं नेशनल कांग्रेस की तैयारियों के लिए चीन को घरेलू माहौल के सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय वातावरण की जरूरत है। और इसे समझना भारतीयों के लिए बेहद मुश्किल है।”

–आईएएनएस

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