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न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री व इटली के प्रधानमंत्री का इस्तीफा

इटली 5 दिसंबर:  वेलिंगटन, 5 दिसम्बर: न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार सुबह इस्तीफे की घोषणा करते हुए पारिवारिक कारणों को इसकी वजह बताया। वह आठ वर्षो से इस पद पर थे। समाचार एजेंसी एफे ने की के हवाले से बताया, “यह मेरा अब तक का सबसे मुश्किल फैसला है और मुझे नहीं पता कि मैं आगे क्या करूंगा।”

की ने नेशनल पार्टी के नेता के तौर पर भी इस्तीफा दिया। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में अपने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि ‘इस पद के लिए उनसे बड़े बलिदान की जरूरत थी, जो मेरे करीब हैं।’

वही दूसरी और इटली में संविधान संशोधन पर हुए जनमत संग्रह में हारने के बाद इटली के प्रधानमंत्री मैटियो रेंजी ने इस्तीफा दे दिया है जिससे इटली के यूरोपियन यूनियन से बाहर होने का खतरा बढ़ गया है। इस इस्तीफे के बाद इटली में आई राजनीतिक अस्थिरता के असर के चलते यूरो 20 महीने के निचले स्तर पर फिसल गया है।

समाचार पत्र ‘न्यूजीलैंड हेराल्ड’ के मुताबिक, जॉन की पत्नी ब्रोनाग ने उनसे पद से इस्तीफा देने को कहा है। इसका कारण उनके दोनों बच्चों बेटी स्टीफनी और बेटे माक्स के जीवन में अत्यधिक दखलअंदाजी को बताया जा रहा है।

नेशनल पार्टी नए नेता और नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए 12 दिसंबर को विशेष कॉकस का आयोजन करेगा। मौजूदा वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री बिल इंग्लिश पद्भार संभाल सकते हैं।

वाणिज्य मंत्री स्टीवन जॉयस नए वित्त मंत्री बन सकते हैं।

देश में नवंबर 2017 में चुनाव होने की संभावना है।गौरतलब है कि इटली यूरोजोन की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है। इटली यूरोपियन यूनियन के 6 संस्थापक सदस्य देशों में से एक है। इटली बाहर हुआ तो यूरोपियन यूनियन के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा और ईयू टूटा तो ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता बढ़ेगी। फिर ग्लोबल इकोनॉमी में अनिश्चितता से बाजार में घबराहट बढ़ेगी।

जनमत संग्रह में 59 फीसदी लोगों ने संविधान संशोधन के खिलाफ वोट किया। जिसके बाद पीएम मैटियो रेंजी ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। इस जनमत संग्रह के लिए इटली के पीएम का प्रस्ताव था कि सीनेटर्स की संख्या 315 से घटाकर 100 कर दी जाए। राजनीतिक पार्टियों के खर्चों में कटौती की कोशिश की जाए और कानून बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। लेकिन इटली की जनता ने जनमत संग्रह में 59 फीसदी मतों के साथ इन प्रस्तावों को नकार दिया।

 

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