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पहले शारीरिक संबंध बनाना, फिर शादी का वादा, रेप नहीं!

नई दिल्ली, 5 फरवरी:आजकल शादी के नाम पर शारीरिक संबंध बनाने को कानून एक्सपर्ट्स के मुताबिक रेप जैसा जघन्य अपराध माना गया है,लेकिन देखने में यह भी आया है कि अधिकतर रेप के मामलों में आपसी सहमति से संबंध बनाने को भी शादी का झांसा देकर रेप करना करार दे दिया जाता है और इसी आधार पर अक्सर केस दर्ज होते है। इस तरह इस कानून का मिसयूज ज्यादा होता है।

दो बालिग लोग आपसी सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित करते है, फिर किन्हीं वजहों से अलग हो जाते है तो बदले स्वरूप रेप कानून को हथियार बनाया जाता है। इसी कड़ी में दिल्ली की एक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है।

दरअसल केस यह है कि चाणक्यपुरी की एक एंबेसी में रहने वाले युवक पर एक युवती से शादी का झांसा देकर जबरन शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगा और केस की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने आदेश दिया कि युवती से संबंध जबरन बनाए गए या झूठा शादी का वादा किया गया…ऐसे कोई ठोस सुबूत पेश नहीं किए गए। बल्कि युवती के बयान से स्पष्ट होता है कि आरोपी और उसके बीच शारीरिक संबंध पहले बने, बाद में अभियुक्त पर शादी का दबाव बनाया गया। ऐसे में शादी का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप बेबुनियाद है।

ये है केस

10 फरवरी 2015 में आरोपी युवक पर बाबा हरिदास नगर थाने में केस दर्ज हुआ कि उसने युवती के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाएं और शादी का झांसा दिया। आरोपी युवक एंबेसी के स्टाफ क्वार्टर में अपने परिवार समेत रहता था। बकौल युवती उसकी मुलाकात आरोपी से एक कॉल सेंटर के लिए दिए गए इंटरव्यू में हुई। पहचान आगे बढ़ी, फोन पर बातें होने लगी। आरोपी ने नया घर खरीदने के बहाने नवंबर 2014 में उसे बुलाया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए। फिर वादा किया कि शादी कर लेगा। इसके  बाद जनवरी 2015 में दोबारा शारीरिक संबंध बनाए, फिर शादी का वादा किया। युवती के अनुसार उसने बहुत बार आरोपी से गुहार लगाई कि शादी कर लें लेकिन वह टालता रहा। तब 5 फरवरी 2015 को युवती ने पुलिस स्टेशन में आरोपी पर केस दर्ज कर दिया। तब आरोपी ने अपने परिजनों के समक्ष शादी का वादा किया कि वह अगली 10 फरवरी को कोर्ट में शादी कर लेगा। इसलिए पुलिस ने आगो कार्रवाई नहीं की,लेकिन आरोपी फिर मुकर गया। इन तथ्यों को आधार मान अदालत ने कहा कि नवंबर 2014 से जनवरी 2015 के बीच दोनों के बीच शारीरिक संबंध बनें,लेकिन शादी का वादा 5 फरवरी 2015 में किया गया तो जबरन शारीरिक संबंध और शादी के वादे का आरोप साबित ही नहीं होता।

(इनपुट एजेंसी से भी)

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