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हिंदुत्व की व्याख्या नहीं करनी: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली 26 अक्टूबर:  उच्चतम न्यायालय ने इस बात को साफ किया है कि इस समय हिंदुत्व या धर्म का मुद्दा नही है। 1995 में शीर्ष अदालत ने जो निर्णय लिया था, उसपर पुर्नविचार नहीं किया जा सकता कि हिंदुत्व धर्म है या जीवनशैली।

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यों की बेंच इस समय हिंदुत्व पर फैसले के नाम से लोकप्रिय सुप्रीम कोर्ट के 1995  के फैसले से जुड़े चुनावी भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहा है और संविधान पीठ इसमें धर्म के मसले पर ध्यान नहीं देंगे।
संविधान पीठ ने मंगलवार सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि हम इस समय केवल विचाराधीन मामले को देखेंगे और इसमें हिंदुत्व शब्द का कोई जिक्र नहीं है। अगर किसी ने दिखाया कि इसमें हिंदुत्व का जिक्र है तो ही हम इस मुद्दे को सुनेंगे।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही तीस्ता सीतलवाड़ ने एक अनुमति के लिए एक अर्जी दायर की थी जिसमें कहा गया था कि धर्म और राजनीति को एक नहीं करना चाहिए और धर्म को राजनीति से अलग रखने के निर्देश दें। तभी संविधान पीठ ने आज सुनवाई शुरू होते ही यह बात कही।

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