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#Economic Survey 2019-20 : मोदी के सपनों के भारत की तस्वीर, जानियें क्या

Economic Survey of India 2018-19 in Parliament

नई दिल्ली, 4 जुलाई (समयधारा) : इकनॉमिक सर्वे 2018-19 को गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में पटल पर रखा।

आर्थिक सर्वे दरअसल बजट से ठीक पहले देश की आर्थिक दशा की तस्वीर होती है।

इसमें पिछले 12 महीने के दौरान देश में विकास का ट्रेंड क्या रहा, योजनाओं को किस तरह अमल में लाया गया,

इस बारे में विस्तार से बताया जाता है। इस बार के आर्थिक सर्वे में वित्त वर्ष 2019-20 में

देश की विकास की रफ्तार 7 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया गया है।

आर्थिक सर्वे में में 2019-20 में GDP की वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

पिछले वित्त वर्ष में GDP की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत पर थी। सर्वे में आर्थिक वृद्धि के लिए अच्‍छी संभावनाओं की भविष्‍यवाणी भी की गई है।

Economic Survey of India 2018-19 in Parliament

देश को 2024-25 तक 5,000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की

वृद्धि दर को निरंतर 8 प्रतिशत पर रखने की जरूरत होगी। समीक्षा कहती है कि 2024-25 तक

भारत को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टारगेट को हासिल करने के लिए

भारत को अपनी वास्‍तविक वृद्धि दर को 8 प्रतिशत पर बनाए रखने की जरूरत होगी।

2018-19 में राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जाहिर किया गया है। 2018 में यह 6.4% था।

इसका संशोधित बजट अनुमान 3.4 प्रतिशत का था। देश की आय की तुलना में ज्यादा खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है।

Economic Survey of India 2018-19 in Parliament

इसका सीधा सा मतलब है कि आपकी आमदनी अट्ठन्नी है और खर्चा रूपया हो रहा हैl

 मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन ने अर्थव्यवस्था की चुनौतियों और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया है।

आर्थिक सर्वे का एक मुख्य मुद्दा भारत को 5 ट्रिल्यन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक देश को 5 ट्रिल्यन डॉलर यानी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों में इन्सॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्ट्सी कोड जैसे बड़े सुधारों के कारण

हमारी अर्थव्यवस्था अब उड़ान भरने को तैयार है। हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा कामकाजी उम्र का होने के कारण

हमें अपनी अर्थव्यवस्था को पंख देने में मदद मिलेगी।

निवेश में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन की उम्मीद जताते हुए कहा गया है कि ढांचागत सुधार जारी हैं,

जीडीपी (GDP) वृद्धि को बचत, निवेश और निर्यात के अच्छे चक्र से ही बनाए रखा जा सकता है।

Economic Survey of India 2018-19 in Parliament

निवेश, विशेषकर निजी निवेश ‘मुख्य प्रेरक’ है, जो मांग, क्षमता, निर्माण, श्रम उत्पादकता में वृद्धि करता है। 

पांच ट्रिल्यन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की रणनीति की रूपरेखा बनाने के बाद भी,

इस लक्ष्य के लिए नीतियों में बार-बार सुधार करना आवश्यक होगा।

(इनपुट एजेंसी से )

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Dharmesh Jain

धर्मेश जैन एक स्वतंत्र लेखक है और साथ ही समयधारा के को-फाउंडर व सीईओ है। लेखन के प्रति गहन रुचि ने धर्मेश जैन को बिजनेस के साथ-साथ लेख लिखने की ओर प्रोत्साहित किया।

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