Trending

कांवड़ियों की गुंडागर्दी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त- SP व्यक्तिगत तौर पर बनें जवाबदेह तो ही लगेगी रोक

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, "जो दूसरे की संपत्ति जलाते हैं, वे अपने घरों को क्यों नहीं जलाते, आप अपने घर जलाएं"

नई दिल्ली, 11 अगस्त :Supreme Court angry on Kanwariya violence-महान्यायवादी के.के. वेणुगोपाल ने कांवड़ियों द्वारा गत दो दिनों में किए गए उत्पात के बारे में उल्लेख किया,

जिसमें हमला करने की घटनाएं और वाहनों को पटलने के हिंसक कार्य शामिल हैं।

वेणुगोपाल ने कहा कि इस गुंडागर्दी पर तबतक रोक नहीं लगाया जा सकता,

जबतक जिला पुलिस अधीक्षक(एसपी) को निजी या सरकारी संपत्ति को,

जानबूझकर बर्बाद करने के प्रयास से निपटने के लिए व्यक्तिगत तौर,

पर जवाबदेह नहीं बनाया जाएगा।

कांवड़ियों के उत्पात के खिलाफ आम जनता के गुस्से ने,

सर्वोच्च न्यायालय में भी दस्तक दी। न्यायालय ने विरोध प्रदर्शन और,

धार्मिक समूहों के उत्पात और कानून तोड़ने की घटनाओं पर गहरी,

चिंता व्यक्त की है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति,

ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने मामले पर चिंता जताई। 

वेणुगोपाल कांवड़ियों की हरकतों का उल्लेख कर रहे थे, तभी न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा,

कि इलाहाबाद को वाराणसी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को इन शिव भक्तों ने,

बाधित कर दिया था। घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रधान न्यायाधीश ने कहा,

“जो दूसरे की संपत्ति जलाते हैं, वे अपने घरों को क्यों नहीं जलाते। आप अपने घर जलाएं।”

शीर्ष न्यायालय के 2009 के दिशानिर्देश के अनुसार विरोध प्रदर्शन के दौरान,

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रदशर्नकारी के नेता को,

जवाबदेह बनाने के आदेश दिए गए थे।

इस आदेश की ओर इशारा करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि,

उन्होंने गौरक्षक समूहों द्वारा लिंचिंग की घटना से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं,

और किसी के भी द्वारा तोड़-फोड़ की घटना के लिए भी ऐसे ही दिशानिर्देश लागू होंगे।

अदालत ने कहा कि वह भीड़ या जिस भी प्रतीक के हैं, उनसे निपटने के लिए,

ऐसे ही दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे।

फैसले को सुरक्षित रखते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ता,

कोडुनगल्लौर फिल्म सोसायटी और महान्यायवादी से इन,

घटनाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देश के लिए सुझाव मांगे।

अदालत में जिन घटनाओं का जिक्र हुआ, उनमें मुंबई में मराठा आंदोलन,

एससी/एसटी अधिनियम को कमजोर करने के आदेश के खिलाफ,

एससी/एसटी समूहों द्वारा हिंसा, ‘पद्मावत’ की रिलीज के समय करणी सेना के प्रदर्शन शामिल हैं।

महान्यायवादी ने कहा, “भारत में हर सप्ताह कुछ न कुछ बड़ी घटनाएं होती हैं।

इन घटनाओं को अंजाम देने वालों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं होती।”

उन्होंने कहा कि क्या कोई भी सभ्य समाज इन चीजों को सहन करेगा।

जिन्होंने इस तरह का डर फैलाया है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील पी.वी. दिनेश ने कहा, “कुछ भी नहीं हो रहा है,

इसलिए यह इस तरह की छवि बन रही है कि यहां पूरी तरह से अराजकता है।

आम लोगों का कहना है कि देश में कहीं भी कानून-व्यवस्था नहीं है।”

–आईएएनएस

देखें कैसे कांवड़ियों ने मोतीनगर में गुंडागर्दी की हदें पार की-

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error:
Close