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बिग न्यूज: राजनीतिक घमासान के बाद माल्या ने लिया यू-टर्न, कहा-जेटली से अनौपचारिक मुलाकात थी

माल्या ने कहा- मैं एक राजनीतिक फुटबॉल हूं, जिसे भाजपा-कांग्रेस पसंद नहीं करती....

लंदन, 12 सितम्बर : Mallya Jaitley meeting controversy takes U-turn- भगोड़े कारोबारी विजय माल्या (Mallya)  ने कल कहा था कि वे भारत छोड़ने से पहले वित्तमंत्री जेटली (Jaitley) से मिले थे और तब जेटली ने सफाई दी कि ये एक अनौपचारिक (unofficial meeting) मुलाकात थी। इससे उपजे राजनीतिक घमासान के चलते माल्या ने अब अपने कल के बयान से यू-टर्न लिया है और कहा है कि उनकी जेटली से मुलाकात अनौपचारिक थी। 

दरअसल, मोदी सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पहले बैंक धोखाधड़ी के लिए पूर्व आरबीआई गवर्नर राजन का खुलासा और अब करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी करने वाले माल्या का सनसनीखेज बयान कि वे भारत छोड़ने से पहले वित्तमंत्री अरुण जेटली से मिले थे और बताया था कि वे लंदन जाने वाले है और वे बैंकों के साथ मामला निपटाना चाहते है।

माल्या का कहना है कि वे एक राजनीतिक फुटबॉल है जिसके साथ भाजपा-कांग्रेस दोनों खेलती है।

माल्या के इस बयान के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है और जेटली ने सफाई पेश करते हुए कहा है कि यह एक अनौपचारिक मुलाकात थी जोकि संसद में हुई थी। कल तक माल्या भी अपने बयान पर अड़े थे कि उन्होंने जेटली को बताया था कि वे देश छोड़ सकते है इसलिए लंदन जाने से पहले मामले का निपटारा चाहते है।

उन्होंने जेटली से मुलाकात की थी लेकिन अभी थोड़ी देर पहले सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि माल्या ने कहा है कि उनकी मुलाकात जेटली के साथ हुई थी लेकिन ये अनौपचारिक थी।

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क्या है मामला

करोड़ों रुपये की बैंक धोखाखड़ी के मामले में वांछित भगोड़े शराब व्यापारी विजय माल्या ने बुधवार को दावा किया कि 2016 में भारत छोड़ने से पहले उसने वित्तमंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी। माल्या ने वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट के बाहर पत्रकारों से कहा, “मेरी जेनेवा में एक बैठक प्रस्तावित थी। भारत छोड़ने से पहले मैंने वित्तमंत्री से मुलाकात की थी..बैंकों के साथ मामला निपटाने का अपना प्रस्ताव मैंने दोहराया था। यह सच है।”

माल्या इस अदालत में भारतीय अधिकारियों द्वारा दाखिल प्रत्यर्पण मामले का सामना कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि माल्या ने दो मार्च, 2016 को भारत छोड़ दिया था। उसने दावा किया कि भारत की दो बड़ी पार्टियां भाजपा और कांग्रेस उसे पसंद नहीं करती हैं।

उसने कहा, “मैं एक राजनीति फुटबॉल हूं..जहां तक मेरा सवाल है, मैंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष समग्र अदायगी प्रस्ताव दिया है। मुझे उम्मीद है कि सम्मानीय न्यायाधीश इसपर ध्यान देंगे।”

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यह पूछे जाने पर कि क्या वह अपने बकाए राशि को चुकाएंगे? माल्या ने कहा, “निश्चित तौर पर, इसलिए समाधान प्रस्ताव दिया गया है।”

उसने कहा कि बैंकों ने उसके समाधान प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

9000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में वांछित माल्या ने कहा कि उसने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष कोई दया याचिका दाखिल नहीं की है।

माल्या ने कहा, “मैंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष लगभग 15,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। मैं बलि के बकरे जैसा महसूस कर रहा हूं। दोनों राजनीतिक पार्टियां मुझे पसंद नहीं करती हैं।”

माल्या के इस बयान के बाद विपक्ष जेटली पर तेज हो गया और मामले की जांच की मांग की तो जेटली ने खुलासा किया कि वे माल्या से मिले जरुर थे  लेकिन वे संसद में ही मिले थे और ये एक अनौपचारिक मुलाकात थी।

–आईएएनएस

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