नोटबंदी एक अशुभ कदम, अर्थव्यवस्था के लिए ‘काला दिवस’, क्या मोदी इसके लिए माफी मांगेंगे : विपक्ष

नोटबंदी जनता के साथ धोखा, नोटबंदी एक अक्षम्य और निरंकुश फैसला : ममता

नई दिल्ली, 8 नवंबर : नोटबंदी एक अशुभ कदम, अर्थव्यवस्था के लिए ‘काला दिवस’ – विपक्ष 

विपक्ष ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर उसके 2016 नोटबंदी कदम से भारत के

प्रत्येक नागरिक को ‘तबाह’ करने के लिए हमला बोला। विपक्ष ने कहा कि इससे केवल

प्रधानमंत्री के घनिष्ठ मित्रों को ही मदद मिली। नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र

और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘काला दिवस’ करार दिया जबकि मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

(माकपा) ने इसे ‘इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला’ बताया।

कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा, “नोटबंदी की कीमत और तबाही को इस देश के प्रत्येक नागरिक ने झेला है,

सिवाए प्रधानमंत्री मोदी के कुछ घनिष्ठ पूंजीवादी मित्रों के।

नोटबंदी हमारे लोकतंत्र और हमारी अर्थव्यवस्था के लिए काला दिवस है।”

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केंद्र से अपनी

आर्थिक नीतियों में विश्वसनीयता व पारदर्शिता बहाल करने का आग्रह किया।

पूर्व वित्त मंत्री ने एक बयान में वर्तमान राजग सरकार से आगे किसी प्रकार के ऐसे अपरंपरागत,

अल्पकालिक आर्थिक उपायों को स्वीकृति नहीं देने को भी कहा जो अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में

और अधिक अनिश्चितता का कारण बन सके।

उन्होंने कहा, “मोदी सरकार द्वारा 2016 में बिना सोच-समझकर उठाए गए अशुभ कदम,

नोटबंदी के आज दो साल पूरे हो गए हैं। इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था

और समाज में जो विध्वंस हुआ, उसके सबूत आज सभी के सामने हैं।”

सिंह ने बयान में कहा, “नोटबंदी ने हर व्यक्ति पर प्रभाव डाला। इसमें हर उम्र, लिंग, धर्म, समुदाय और क्षेत्र के लोग शामिल थे।”

पूर्व संप्रग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि ‘क्या मोदी अर्थव्यवस्था के विध्वंस, नौकरियों  

और जिंदगियों को तबाह करने के लिए माफी मांगेंगे।’

उन्होंने कहा, “भारत के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 86 फीसदी नोटों को बंद करने के

एक असंवेदनशील और लापरवाही भरे फैसले के दर्द और उससे जूझने को याद कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “आरबीआई के पास 99 फीसदी नोट वापस आ गए। कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद

और नकली नोट पर काबू; ये चार मकसद बताए थे। चारों में कोई पूरा नहीं हुआ। क्या मोदी इसके लिए माफी मांगेंगे?”

उन्होंने कहा, “नोटबंदी के अक्षम्य और निरंकुश फैसले, जिसने भारत की करीब दो फीसदी जीडीपी को खत्म कर दिया,

के दो साल बाद मोदी भारतीय रिजर्व बैंक से और 3 लाख 60 हजार करोड़ रुपये चाहते हैं। इसे रोका जाना चाहिए।”

माकपा ने आठ नवंबर 2016 को ‘हमारे राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़े घोटाले’ के रूप में याद किया। 

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने ‘मोदी को अर्थव्यवस्था, जिंदगियों

और आजीविका को तबाह करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।’

उन्होंने कहा, “मोदी ओर उनके मित्रों ने दावा किया था कि नोटबंदी से काला धन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद समाप्त होगा

और सिर्फ डिजीटल लेन-देन होगा। दो साल बाद मोदी चुप हैं।

सच तो यह है कि उन्होंने खुद ही अर्थव्यवस्था, जिंदगियों और आजीविका को तबाह किया है।”

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने

इसे भारतीय अर्थव्यवस्था पर एक गहरा घाव करार दिया।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “मोदी सरकार के वित्तीय घोटाले की सूची असंख्य है,

नोटबंदी भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्व-प्रेरित एक गहरा घाव है,

जो दो साल बाद भी एक रहस्य बना हुआ है कि देश को क्यों एक आपदा की ओर धकेला गया था?”

लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने बढ़ती बेरोजगारी के लिए केंद्र पर निशाना साधा।

उन्होंने ट्वीट कर कहा, “अब प्रत्येक नागरिक को समझ आ गया है कि यह कोई ऐतिहासिक गलती नहीं थी,

जिसने हर घर को बर्बाद किया बल्कि एक ऐसा फैसला था जो केवल

भाजपा के कुछ पूंजीवादी मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया था।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस काला दिवस करार दिया।

उन्होंने कहा, “सरकार ने इस बड़े नोटबंदी घोटाले से हमारे देश के साथ धोखा किया है।

इसने अर्थव्यवस्था और लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया। जिन लोगों ने ऐसा किया है, लोग उन्हें दंडित करेंगे।”

कोलकाता :  नोटबंदी की दूसरी वर्षगांठ पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर नोटबंदी ‘घोटाले’ के जरिए राष्ट्र के साथ धोखा करने को लेकर निशाना साधा।

नोटबंदी के दिन को काला दिवस करार देते हुए बनर्जी ने ट्वीट कर कहा,

“सरकार ने इस बड़े नोटबंदी घोटाले से हमारे देश के साथ धोखा किया है।

इसने अर्थव्यवस्था और लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया। जिन लोगों ने ऐसा किया है लोग उन्हें दंडित करेंगे।”

केंद्र ने 8 नवंबर, 2016 को रात आठ बजे अचानक 500 और 1000 रुपये के

नोट पर प्रतिबंध की घोषणा की थी, जिसे सभी लोग हैरान रह गए थे।

बनर्जी ने कहा, “नोटबंदी आपदा की आज ‘डार्कडे’ दूसरी वर्षगांठ है। जिस क्षण इसकी घोषणा हुई

तब भी मैंने ऐसा ही कहा था। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, आम लोग और विशेषज्ञ अब सभी सहमत हैं।”

–आईएएनएस

 

Tags

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error:
Close