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भारत में लांच होने से पहले ही पीएम मोदी ने कर लिया था ईमेल-डिजिटल कैमरा का इस्तेमाल! नए दावे पर उबला सोशल मीडिया

मोदी द्वारा 1987-88 में ही ईमेल और डिजिटल कैमरा इस्तेमाल करने के बयान पर कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया कि ' दोबारा मत पूछना कि कांग्रेस ने 60 सालों में क्या किया

नई दिल्ली,14 मई:PM Modi claim on Balakot Air Strike cloud cover radar use digital camera,emails – पीएम मोदी (PM Modi) को सोशल मीडिया ने फेंकू की उपाधि दी है और कहीं न कहीं अब पीएम मोदी ने इसे साबित भी कर दिया है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि उनका न्यूज नेशन दिए इंटरव्यू को देखकर सोशल मीडिया यूजर्स,राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवी कह रहे है।

पीएम मोदी (PM Modi) ने इस चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot Air Strike) पर उन्होंने भारतीय सेना और एक्सपर्ट्स को सलाह दी थी कि ‘खराब मौसम के कारण इसे टालना ठीक नहीं है। बादल होने के कारण भारतीय सेना के विमान पाकिस्तानी रडार की पकड़ में आने से बच सकते है। डेट को टाला न जाएं। बारिश- बादल होने से रडार से बचा जा सकता है। 

पीएम मोदी के इस बयान से सोशल मीडिया पर उनका जमकर मजाक बन रहा है और लोग इस इंटरव्यू की  क्लिप शेयर करके पीएम मोदी को रडार क्या है और कैसे काम करता है…इसका ज्ञान दे रहे है।

मोदी जी अपनी गरीबी को हमेशा भुनाते रहते है और ऐसे में उनके द्वारा गरीबी में डिजिटल कैमरा के इस्तेमाल पर शाहिद सिद्धीकी ने ट्वीट करके तंज कसा कि “जिस गरीब के पास एक कुर्ता-पायजामा था। वो भी बिना आस्तिन का,उसने क्या-क्या पापड़ बेले होंगे डिजिटल कैमरा लेने के लिए? वो भी ब़ड़ा वाला,जब किसी को पता भी नहीं था ये डिजिटल होता क्या है। हैट्स ऑफ मोदी जी और उनकी गरीबी।

इतना ही नहीं, पीएम मोदी के इस दावे पर विपक्षी भी खूब चुटकी ले रहे है। हालत ये हो गई की भाजपा आईटी सेल को पीएम मोदी की ओर से दिए गए इस बयान के ट्वीट को डिलीट भी करना पड़ा लेकिन तब तक लोग इसका स्क्रीनशॉट ले चुके थे।

इतना ही नहीं, अब इसी इंटरव्यू की एक ओर क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी दावा कर रहे है कि उन्होंने 1987-88 में डिजिटल कैमरा और ईमेल का इस्तेमाल किया था।

क्या कहा मोदी ने ?- PM Modi claim on Balakot Air Strike cloud cover radar use digital camera,emails 1987-88

मोदी ने कहा कि “शायद मैंने पहली बार डिजिटल कैमरा का उपयोग किया था। 1987-1988 में की बात है। उस समय डिजिटल कैमरा इतना बड़ा होता था (हाथ से साइज बताते हुए) और काफी कम लोगों के पास ईमेल रहता था। मेरे यहां पर वीरमगाम तहसील में आडवाणी जी की रैली थी,मैनें डिजिटल कैमरा पर उनकी फोटो खींचकर दिल्ली ट्रांसमिट की और अगले दिन अखबार में अपनी रंगीन फोटो देखकर आडवाणी जी बहुत सरप्राइज हुए।“

https://twitter.com/chulbulThurram/status/1127609027419095042

बस मोदी के इस दावे को सोशल मीडिया पर लोग, बुद्धिजीवी और राजनीतिज्ञ फैक्ट चेक करने लगे और तब पता चला कि ईमेल सर्विस 1995 से पहले थी ही नहीं। तो ऐसे में मोदी 1988 में इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते है?(PM Modi claim on Balakot Air Strike cloud cover radar use digital camera,emails 198-88)

पीएम मोदी के इस दावे पर अर्थशास्त्री रूपा सुब्रमण्या ने ट्वीट करते हुए कहा कि  ‘1988 में पश्चिमी देशों में भी कुछ ही वैज्ञानिकों के पास ही ईमेल था, लेकिन पीएम मोदी ने 1988 में ही हिंदुस्तान में ईमेल का इस्तेमाल कर लिया था। जबकि बाकी देश के लिए 1995 में इसका इस्तेमाल लागू हुआ।‘

इसके साथ ही रूपा सुब्रह्मण्या ने मोदी समर्थकों के उस दावे को भी करारा झूठा साबित कर दिया जिसके तहत वे दावा कर रहे थे कि मोदी जी गलती से डेट गलत बोल गए उनका मतलब 1997/1998 ही था। तब रूपा ने ट्वीट करके कहा कि मोदी जी ईमेल भेजने की बात अहमदाबाद के विरमगाल तहसील से कर रहे है। क्या उस समय कोई ऐसी संस्था थी जोकि 1988 में वहां से ईमेल भेजने की सुविधा प्रदान करती थी? हमने भी पीएम मोदी के इस इंटरव्यू में पाया कि वे वीरमगाम की ही बात कर रहे है न कि विश्व के किसी अन्य हिस्से की।

इतना ही नहीं पीएम मोदी के इन दावों पर सोशल मीडिया में लोग जमकर उनका मजाक उड़ा रहे है और फैक्ट चेक करके उन्हें एक नंबर का झूठा बता रहे है।

https://twitter.com/Nehr_who/status/1127797322778169344

एक यूजर ने तो यहां तक लिखा कि ‘पहला डिजिटल कैमरा Nikon कंपनी ने साल 1987 में बेचा था और कमर्शियल ईमेल 1990-95 में शुरू की गई थीं।‘

https://twitter.com/Nehr_who/status/1127878040036372482

केवल सोशल मीडिया ही नहीं बल्कि विपक्षी दल भी मोदी के इस बयान पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे है।

मोदी द्वारा 1987-88 में ही ईमेल और डिजिटल कैमरा इस्तेमाल करने के बयान पर कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए ट्वीट किया कि ‘ दोबारा मत पूछना कि कांग्रेस ने 60 सालों में क्या किया।’

कांग्रेस की IT सेल की प्रमुख दिव्या स्पंदना ने भी ट्वीट करके कहा कि कांग्रेस ने ट्वीट करके कहा कि‘क्या आप सोच सकते है कि ‘1988 में नरेंद्र मोदी की ईमेल आईडी क्या थी? मुझे लगता है dud@lol.com इतना ही नहीं स्पंदना ने आगे ट्वीट करके यह भी कहा कि ‘सवाल यह है कि अगर 1988 में उनकी ईमेल आईडी थी, जबकि पूरे विश्व में नहीं थी। तो ऐसे में उन्हें ईमेल कौन भेजता था।’

https://twitter.com/divyaspandana/status/1127657132696846336

इतना ही नहीं, शाहिद सिद्दीकी जोकि पूर्व राज्यसभा सांसद रहे है ने ट्वीट करके कहा कि ‘’मोदी ने नाले से गैस बनाने और रडार से बचने वाले बादलों की तरह डिजिटल कैमरा, ईमेल का इजाद किया है।’

गौरतलब है कि शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूज नेशन को अपना एक इंटरव्यू दिया था और इसी इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने दावा किया था कि बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot Air Strike) के समय उन्होंने ही भारतीय सेना प्रमुखों को सुझाव दिया था कि बादल और बारिश होने के कारण भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के विमान पाकिस्तानी रडार में आने से बच सकते है। सीताराम येचुरी ने भी पीएम मोदी के एयरस्ट्राइक और डिजिटल कैमरा वाले बयान पर ट्वीट करके नाराजगी जताई।

बस तभी से पीएम मोदी के ज्ञान और उनके दावों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और यूजर्स, बुद्धिजीवी और विभिन्न राजनेता उनके जरूरत से ज्यादा बिना फैक्ट चेक करके बोलने पर उन्हें आड़े हाथों ले रहे है।

ध्यान दें कि बालाकोट एयरस्ट्राइक, ईमेल और डिजिटल कैमरों के इस्तेमाल के बारे में टिप्पणी केवल न्यूज नेशन के इंटरव्यू में मोदी को ट्रोल करने के लिए की जा रही बातें नहीं हैं।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस इंटरव्यू से स्क्रीनशॉट्स प्रसारित किए है जो बताते हैं कि पीएम मोदी ने इन सवालों का क्या जवाब दिया है।

https://twitter.com/divyaspandana/status/1127640428327591936

स्पंदना ने एक स्क्रीनशॉट और वीडियो क्लिप साझा किया, जिसमें दावा किया गया था, “वीडियो को 3 सेकंड पर रोकें और एक अच्छी नज़र डालें, इसमें प्रश्न और उत्तर भी अहम हैं! अब आप जानते हैं कि @RahulGandhi के साथ कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस या बहस क्यों नहीं हुई”।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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