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CBI डायरेक्टर पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने इस्तीफा दिया,कहा-झूठे,अप्रमाणित आरोपों पर मेरा तबादला किया

आलोक वर्मा ने कहा कि स्वाभाविक न्याय से टाल-मटोल किया गया और पूरी प्रक्रिया को पलट दिया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि अधो हस्ताक्षरी को सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया जाए

नई दिल्ली, 11 जनवरी : #Removed Cbi director Alok Verma resigns- सीबीआई निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने शुक्रवार को सरकारी सेवा से इस्तीफा दे दिया। 

वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा गुरुवार को पद से हटा दिया गया।

इस तरह से आलोक वर्मा व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की लड़ाई पर विराम लग गया।

कार्मिक सचिव चंद्रमौली सी. को लिखे पत्र में आलोक वर्मा ने कहा कि चयन समिति ने फैसले पर पहुंचने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया।

चयन समिति ने गुरुवार की रात आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाने का फैसला लिया था।

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आलोक वर्मा ने कहा कि स्वाभाविक न्याय से टाल-मटोल किया गया और पूरी प्रक्रिया को पलट दिया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि अधो हस्ताक्षरी को सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया जाए।

आलोक वर्मा ने पत्र में कहा, “चयन समिति ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि पूरी सीवीसी रिपोर्ट एक शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है, जिसकी वर्तमान में सीबीआई जांच कर रही है। उल्लेखनीय है कि सीवीसी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित बयान को आगे बढ़ा दिया। शिकायतकर्ता कभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए.के.पटनायक (जांच की निगरानी करने वाले) के समक्ष नहीं आया।”

आलोक वर्मा (62) ने कहा कि संस्थान भारतीय लोकतंत्र के मजबूत प्रतीकों में से एक है और यह अतिशयोक्ति नहीं है कि सीबीआई देश के सबसे महत्वपूर्ण संस्थानों में से एक है।

उन्होंने कहा, “बीते रोज लिया गया फैसला सीबीआई प्रमुख के कामकाज पर असर डालेगा बल्कि इससे यह भी पता चलता है कि कोई भी सरकार सीवीसी के जरिए सीबीआई से कैसे व्यवहार करती है। सीवीसी का गठन सत्ताधारी सरकार के बहुमत वाले सदस्यों द्वारा किया जाता है। यह हम सबको खुद के अंदर झांकने का समय है।”

वर्मा का गुरुवार को अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड्स के महानिदेशक के पद पर तबादला किया गया था।

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उन्होंने कहा कि नौकरशाही के करियर में उनके अखंडता के विचार ने चार दशकों तक प्रेरित किया है।

आलोक वर्मा ने कहा, “मैंने भारतीय पुलिस सेवा की बेदाग रिकॉर्ड के साथ सेवा की है और मैंने अंडमान व निकोबार द्वीप समूह, पुडुचेरी, मिजोरम, दिल्ली में पुलिस बल का नेतृत्व किया है। मैंने दो और संगठनों का नेतृत्व किया, जिसमें दिल्ली जेल व सीबीआई शामिल है। मैं भाग्यशाली हूं कि मैं जिन बलों का प्रमुख रहा हूं कि उनका बहुमूल्य समर्थन मिला, जिससे उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल हुई। मैं भारतीय पुलिस सेवा व खास तौर जिन संगठनों में मैंने सेवा दी है, उनका आभार प्रकट करता हूं।”

आलोक वर्मा ने कहा कि वह पहले ही 31 जुलाई 2017 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वह सिर्फ सीबीआई निदेशक के तौर पर इस साल 31 जनवरी तक सरकार की सेवा कर रहे थे, यह एक तय कार्यकाल वाली भूमिका थी।

वर्मा ने सरकार को लिखे एक पत्र में कहा, “अधोहस्ताक्षरी अब सीबीआई निदेशक नहीं है और वह अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होमगार्ड की सेवानिवृत्त उम्र पहले ही पार कर चुका है। इसके अनुसार, अधोहस्ताक्षरी को आज से सेवानिवृत्त समझा जाए।”

उन्होंने गुरुवार की रात जारी एक बयान में कहा कि सीबीआई भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है, एक ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा, “इसे बिना किसी बाहरी प्रभावों यानी दखलअंदाजी के कार्य करना चाहिए। मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की है, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

आलोक वर्मा ने कहा, “मैंने संस्थान की अखंडता कायम रखने की कोशिश की है, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि इसे केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी अधिकार क्षेत्र के दिए गए थे।

विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए अरोपों का जिक्र करते हुए आलोक वर्मा ने कहा, “यह दुखद है कि मेरे विरोधी सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए झूठे, अप्रमाणित, हल्के आरोपों के आधार पर मेरा तबादला कर दिया गया।”

आलोक वर्मा को 23-24 अक्टूबर की रात को छुट्टी पर भेज दिया गया था, जिसे उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सरकार के फैसले को दरकिनार करते हुए वर्मा की सीबीआई निदेशक के तौर पर फिर बहाली की थी, लेकिन नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं दिया था। शीर्ष अदालत ने उच्च स्तरीय समिति से वर्मा के मामले पर नए सिरे से विचार करने को कहा था।

–आईएएनएस

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