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#RepublicDay2019: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन- भारत की बहुलता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है

उन्होंने कहा कि देश इस समय एक ऐसे महत्वपूर्ण मुकाम पर है, जहां आज के निर्णय और कार्यकलाप 21वीं सदी के भारत का स्वरूप निर्धारित करेंगे

नई दिल्ली, 25 जनवरी : #RepublicDay2019 President’s address to the nation- राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा,“भारत की बहुलता, हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमारी विविधता, लोकतंत्र और विकास पूरी दुनिया के सामने एक मिसाल है।”

“राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से आज का यह समय हम सबके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना हमारे देशवासियों के लिए स्वतंत्र भारत का शुरुआती दौर था।”

उन्होंने कहा कि देश इस समय एक ऐसे महत्वपूर्ण मुकाम पर है, जहां आज के निर्णय और कार्यकलाप 21वीं सदी के भारत का स्वरूप निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में एकजुट होकर, अपने प्रयासों के बल पर, इस सदी को भारत की सदी बनाने का अवसर सबके सामने है। 

उन्होंने कहा, “इसी वर्ष दो अक्टूबर को हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे। गांधीजी ने भारत ही नहीं अपितु एशिया, अफ्रीका तथा दुनिया के कई अन्य देशों में साम्राज्यवाद को खत्म करने के लिए, लोगों में आत्मविश्वास एवं प्रेरणा का संचार किया और उन्हें आजादी की राह दिखाई। बापू, आज भी, हमारे गणतंत्र के लिए नैतिकता के प्रकाश-पुंज हैं।” 

कोविंद ने कहा, “26 नवंबर को हम सब अपने ‘संविधान दिवस’ की 70वीं वर्षगांठ मनाएंगे। हमारा संविधान, हमारे गणराज्य की आधारशिला है। यह एक दूरदर्शी और जीवन्त दस्तावेज है। गणतन्त्र दिवस के अवसर पर, संविधान की रचना के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का योगदान विशेष रूप से स्मरणीय है।” 

उन्होंने कहा, “17वीं लोकसभा के निर्वाचन के लिए होने वाले आम-चुनाव में हम सब अपने मताधिकार का इस्तेमाल, अपनी लोकतान्त्रिक मान्यताओं और मूल्यों के प्रति पूरी निष्ठा के साथ करेंगे। यह चुनाव, इस मायने में विशेष होगा कि 21वीं सदी में जन्म लेने वाले मतदाता, पहली बार, मतदान करेंगे और नई लोकसभा के गठन में अपना योगदान देंगे।” 

उन्होंने कहा, “आज हम, अपने सतत प्रयासों से गरीबी का अन्त करने के निर्णायक दौर में हैं। देशव्यापी प्रयासों के बल पर, गरीब परिवारों को आवास, पीने के पानी, बिजली और टायलेट की सुविधा मिल रही है। गांवों को शहरों से जोड़ने वाली सड़कें और पुल बन रहे हैं। शहरों में आवास तथा आधुनिक जन-सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। हर घर तक बिजली पहुंच रही है।” 

राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे युवा, हुनरमन्द होकर, रोजगार की नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं। व्यवसाय के लिए ऋण की सुविधा सुलभ कराई जा रही है। लोगों को जन-औषधि केन्द्रों में, सस्ती दरों पर, दवाइयां मिल रही हैं। हृदय रोग के उपचार के लिए ‘स्टेंट’ जैसी जीवन-रक्षक मेडिकल डिवाइसेज की, तथा घुटने के इम्प्लांट की कीमतों में काफी कमी की गई है। रियायती दरों पर डायलिसिस की सुविधा प्राप्त हो रही है।” 

उन्होंने कहा, “डिजिटल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आया है। बन्दरगाहों, अंतर्देशीय जलमार्गो, बेहतर रेल सेवाओं, आधुनिक मेट्रो सुविधाओं, राष्ट्रीय राजमार्गो, गांव की सड़कों और देश के अंदरूनी इलाकों में किफायती हवाई यात्रा की सुविधाओं से कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है। नवीनतम टेक्नॉलॉजी से किसान अधिक समर्थ और हमारे जवान अधिक सशक्त हो रहे हैं। टेक्नॉलॉजी और नई सोच के बल पर हमारे उद्यमी, विकास की नई इबारत लिख रहे हैं। आज दुनिया की निगाहें, हमारे युवा उद्यमियों और हमारी अर्थ-व्यवस्था पर टिकी हुई हैं।”

राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद ने शुक्रवार को यहां कहा कि समावेशी भावना, भारत के विकास का मूल-मंत्र है। उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों पर सभी का बराबर का हक है, चाहे कोई किसी भी समूह का हो, किसी भी समुदाय का हो, या किसी भी क्षेत्र का हो। 

उन्होंने कहा, “इसी माह संविधान-संशोधन के द्वारा, गरीब परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सामाजिक न्याय और आर्थिक नैतिकता के मानदंडों पर जोर देकर, समावेशी विकास के कार्य को और भी व्यापक आधार दिया गया है। टेक्नॉलॉजी और नई सोच के बल पर, समाज के हर वर्ग के लोग विकास की यात्रा में शामिल हो रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हमने अभाव को प्रचुरता में बदला है। आज देश में खाद्यान्न का प्रचुर उत्पादन हो रहा है। रसोई गैस आसानी से मिल रही है। फोन कनेक्शन लेना हो या पासपोर्ट बनवाना हो, बैंक में खाता खुलवाना हो या दस्तावेजों को प्रमाणित करना हो, इन सभी क्षेत्रों में सुधार और बदलाव दिखाई दे रहे हैं। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में हो रहे सामाजिक बदलाव, अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। हमारी बेटियां शिक्षा, कला, चिकित्सा और खेल-कूद जैसे क्षेत्रों के अलावा तीनों सेनाओं और रक्षा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में भी अपनी विशेष पहचान बना रही हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “21वीं सदी के लिए, हमें अपने लक्ष्यों और उपलब्धियों के नए मानदंड निर्धारित करने हैं। अब हमें गुणवत्ता पर और अधिक ध्यान देना होगा। हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जिसमें हर बेटी-बेटे की विशेषता, क्षमता और प्रतिभा की पहचान हो।”

उन्होंने कहा, “पारस्परिक सहयोग और साझेदारी के आधार पर ही समाज का निर्माण होता है। सहयोग और साझेदारी की यह भावना ही, पूरे विश्व को एक ही परिवार मानने वाले, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के आदर्श का भी आधार है।”

–आईएएनएस

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