सुशील मोदी की तरह हम बेरोजगार नहीं; जो फालतू आरोपों पर बार-बार सफाई देते फिरे: तेजस्वी यादव

पटना, 7 जुलाई : बिहार के उपमुख्यमंत्री राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव  के बेटे तेजस्वी यादव ने बीजेपी नेता सुशील मोदी को लालू यादव पर बेनामी संपत्ति मामले में बार-बार आरोप लगाने और जवाब तलब करने पर आड़े हाथ लिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि- हम सुशील मोदी की तरह बेरोजगार नही है जो बार-बार प्रेस-कांन्फ्रेंस करते रहें और उनके आरोपों का जवाब देते फिरे।

गौरतलब है कि बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुशील कुमार मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद को एक बार फिर चुनौती देते हुए कहा कि लालू दान में मिली सभी जमीनों को वापस करें। 

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद 1,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की बेनामी संपत्ति के मालिक हैं। 

मोदी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “लालू प्रसाद दान में मिली सभी जमीनें लौटा क्यों नहीं देते हैं? अगर मेरे आरोपों में दम नहीं है, तो लालू मेरे आरोपों से इनकार क्यों नहीं करते हैं?”

उल्लेखनीय है कि बुधवार को लालू प्रसाद ने सुशील कुमार मोदी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा था कि रमादेवी द्वारा तेजप्रताप को जमीन दान देने की उन्हें कोई सूचना नहीं थी। 

उन्होंने कहा, “रमा देवी के पति स्वर्गीय वृजबिहारी प्रसाद ने हमलोगों की सहमति के बिना ही 23 मार्च 1992 को 13 एकड़ जमीन का दान पत्र निबंधित कर दिया था। नियम के अनुसार दान पत्र पर लेने वाले और देने वाले दोनों की सहमति अनिवार्य है।”

लालू ने दावा किया कि जब उन्हें इस जमीन के दान होने की जानकारी मिली थी तब नाराजगी प्रकट करते हुए इसे जल्द वापस करने को कहा। बाद में 30 जून 1993 को ही वह दान पत्र मुजफ्फरपुर की एक अदालत में रद्द किया गया। लालू ने मोदी पर मानहानि का मुकदमा करने की भी बात कही। 

लालू के बयान पर सुशील मोदी ने पलटवार करते हुए सवालिया लहजे में कहा, “लालू रघुनाथ झा, कांति सिंह, ललन चौधरी, हृदयानंद चौधरी, प्रभुनाथ सिंह सहित कई लोगों द्वारा दान में दी गई जमीन को भी क्यों नहीं रद्द करते हैं?”

उन्होंने लालू पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, “लालू ने भ्रष्टाचार किया है। ऐसे में भ्रष्टाचारी को भ्रष्टाचारी कहना मानहानि है क्या? मैं मानहानि के मुकदमे की परवाह नहीं करता।” 

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि अगर रमा देवी द्वारा मिले दान पर सहमति नहीं थी या अधूरा था तो इसे रद्द करने की जरूरत ही क्या थी या फिर इस दान को रद्द करने में 15 महीने का समय क्यों लग गया। 

उन्होंने संभावना जताते हुए कहा, “ऐसा भी हो सकता है कि सस्ती जमीन पसंद नहीं आई, इस कारण इसे रद्द कर दिया गया। जबकि अन्य दान में मिली जमीन शहरों में थी और वह कीमती थीं, इसलिए इन्हें रद्द नहीं किया गया।” 

उल्लेखनीय है कि मोदी पिछले करीब दो महीने से लालू प्रसाद और उनके परिवार व रिश्तेदारों की बेनामी संपत्ति को लेकर खुलासे कर रहे हैं।

(इनपुट आईएएनएस से भी)

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