किसानों का हाल हुआ बेहाल,मध्य प्रदेश में आत्महत्याओं का फैला खुनी जाल,क्या सरकार बदलेंगी अपनी चाल

भोपाल 5 जुलाई :  मध्य प्रदेश में बीते 24 घंटों में कर्ज और सूदखोर से परेशान होकर तीन और किसानों ने आत्महत्या कर ली है। इसके साथ ही राज्य में बीते 24 दिनों में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 42 हो गई है। सागर जिले के राहतगढ़ क्षेत्र के मनेशिया गांव के बुजुर्ग किसान परशुराम साहू (70) ने कथिततौर पर मंगलवार को कर्ज और सूदखोरों से परेशान होकर कीटनाशक पदार्थ खा लिया था। उसे सागर के चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहां देर शाम उसकी मौत हो गई। 

परिजनों के अनुसार, साहू पर लगभग ढाई लाख रुपये का रिश्तेदारों और सूदखोरों का कर्ज था। कर्ज न चुका पाने के कारण वह तनाव में थे, और उसी के कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।

राहतगढ़ के थाना प्रभारी शिवप्रताप सिंह बघेल ने कहा, “परशुराम बीमार रहता था और उसी के चलते उसने सल्फास खा लिया। जहां तक कर्ज आदि की बात है तो ग्रामीण इलाकों जरूरत पड़ने पर आपस में लेन-देन सामान्य प्रक्रिया है।”

इसी तरह शिवपुरी जिले के पिछोर थानांतर्गत हिम्मतपुरा चौकी के राधापुर गांव में किसान गोविंद दास (70) ने जमीन विवाद के चलते मंगलवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। 

चौकी प्रभारी प्रताप सिंह गुर्जर ने बुधवार को बताया, “उसने कुछ साल पहले पट्टे की जमीन खरीदी थी, मगर बेचने वाले के बेटों ने उस पर आपत्ति दर्ज करा दी, और मामला न्यायालय में चला गया। गोविंद मुकदमा हार गया और जमीन उसके हाथ से चली गई। इसी के चलते उसने खुदकुशी कर ली है।”

एक अन्य मामला रायसेन जिले के उदयपुरा थाना क्षेत्र के शाहपुरा गांव का है, जहां मंगलवार देर शाम संजीव राय नामक किसान ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी। गांव वाले आत्महत्या की वजह कर्ज बता रहे हैं, जबकि थाना प्रभारी नरेश सिंह परिहार का कहना है कि आत्महत्या का कारण पता नहीं चल सका है, और मामले की जांच की जा रही है। 

राज्य में किसानों की आत्महत्या का दौर जारी है। औसतन एक दिन में लगभग दो किसान आत्महत्या कर रहे हैं। बीते 24 दिनों में 42 किसानों ने कर्ज और सूदखोरों से परेशान होकर जान दे दी है। जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य में खेती को फायदे का धंधा बनाने के दावों और वादों से पीछे नहीं हट रहे हैं। 

–आईएएनएस

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