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Dahi Handi: आज देशभर में दही हांडी की धूम, ऐसे हुई शुरू, गोविंदा आला रे…मटकी संभाल…

इस वर्ष दही हांडी का त्यौहार 25 अगस्त 2019, रविवार को पूरी धमाचौकड़ी के साथ मनाया जा रहा है।

 नई दिल्ली,25 अगस्त: Dahi handi- आज देशभर में दही हांडी (Dahi handi) का त्यौहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। जन्माष्टमी (Janmashtami)के अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है।

चूंकि जन्माष्टमी (Janmashtami 2019)24 अगस्त की थी इसलिए इस वर्ष दही हांडी (Dahi handi 2019) का त्यौहार 25 अगस्त 2019, रविवार को पूरी धमाचौकड़ी के साथ मनाया जा रहा है।

कैसे मनाया जाता है दही हांडी का उत्सव? Dahi handi celebration today

यह तो सर्वविदित है कि भगवान श्रीकृष्ण (Shree Krishna) के जन्मोत्सव के रूप में भद्र मास की अष्टमी तिथि में आधी रात को जन्माष्टमी (Janmashtami) का पर्व मनाया जाता है।

कृष्ण भगवान की बाल नटखट अदाओं और बाल-लीलाओं को समर्पित दही हांडी (Dahi handi) का त्यौहार जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami) के अगले दिन मनाया जाता है।

मुख्य रूप से इस त्यौहार की धूम देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात में देखी जाती है।

दही हांडी (Dahi handi) के अवसर पर गोविंदा (Govinda) (दही हांडी तोड़ने वाले लोग) एक-दूसरे के ऊपर चढ़ते है

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और एक मानव पिरामिड सरीखी श्रृंखला बनाते है और एकदम ऊंचाई पर रस्सी से बंधी दही से

लबरेज हांडी तक पहुंचते है और उसे फोड़ देते है। इस हांडी में दही या फिर मक्खन रखा जाता है।

महाराष्ट्र और मुंबई की दही हांडी (Dahi handi) प्रतियोगिता पर पूरे देश की नजर रहती है और इस दिन माहौल भी देखते ही बनता।

क्यों मनाया जाता है दही हांडी का त्यौहार, जानें महत्व

Dahi handi 2019 time-importance-significance 

श्रीकृष्ण (Krishna) के जन्मदाता अभिभावक देवकी और वासुदेव कंस के अत्याचारों के कारण सालों तक जेल में बंद रहे।

पुराणों के अनुसार, वासुदेव और देवकी की आठवीं संतान के द्वारा ही कंस का वध नियति ने लिखा था। कंस को जब इस बात का पता चला तो उसने अपनी बहन देवकी और अपने बहनोई वासुदेव को जेल में कैद कर लिया।

जेल में देवकी की जितनी भी संतान होती कंस उनकी हत्या कर देता था। जब देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान हुई तो वासुदेव उसे दैवीय शक्तियों के माध्यम से नंदजी और यशोदा के पास वृंदावन ले गए।

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यह आठवीं संतान ही श्रीकृष्ण थी। कृष्ण की बाल लीलाओं का आरंभ मां यशोदा के पास आकर ही शुरू हो गया था। श्रीकृष्ण अपनी नटखट अदाओं से सभी का मनमोह लेते थे।

बाल कृष्ण को दही और मक्खन खाने का बहुत शौक था। यही कारण है कि कृष्ण गांवभर में लोगों के घर जाकर चुपके से उनका मक्खन चुरा लेते थे।

उनकी इन नटखट हरकतों से परेशान होकर गांववालों ने मक्खन और दही को बचाने हेतु मटकी में भरकर ऊंचाई पर टांगना शुरू कर दिया था।

किंतु कृष्ण तो ठहरे शरारती। इसलिए वे बेहद ऊंचाई पर रखी उस मटकी में से मक्खन अपने दोस्तों के ऊपर चढ़कर चुरा लेते थे।

बस तभी से जन्माष्टमी के अगले दिन देशभर में दही हांडी का उत्सव (Dahi handi) धूमधाम से मनाया जाने लगा।

इसे मूलत: बाल कृष्ण की लीलाओं को समर्पित किया जाता है।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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