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जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसीं आज, राहुल गांधी शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे

नई दिल्ली,13 अप्रैल: #JallianwalaBaghCentenarytoday: भारतीय इतिहास के काले पन्नों में से एक स्याह दिन आज (13 अप्रैल) जलियांवाला बाग हत्याकांड को पूरे 100 साल (#JallianwalaBaghCentenarytoday) हो गए है। इस अवसर पर राष्ट्र शहीदों को श्रद्धासुमन देकर स्मरण कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने (Rahul Gandhi and nation pay tribute to martyrs )अमृतसर पहुंच गए है। राहुल गांधी ने शनिवार प्रात: 8 बजे शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

जलियांवाला बाग हत्याकांड की बरसी (#JallianwalaBaghCentenary) पर आज एक खास कार्यक्रम भी अमृतसर में होने जा रहा है। इस प्रोग्राम में पंजाब के राज्यपाल और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।

गौरतलब है कि राहुल गांधी शुक्रवार देर रात ही अमृतसर पहुंच गए। यहां उन्होंने श्री अकाल तख्त गोल्डन टैम्पल में माथा टेका। राहुल गांधी के साथ इस मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी थे।

आज यानि शनिवार को जलियांवाला बाग हत्याकांड (#JallianwalaBagh) में निर्मम मौत का शिकार हुए शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शताब्दी समारोह का आयोजन होने जा रहा है। इस अवसर पर शहीदों का स्मरण करते हुए डाक टिकटें और सिक्के जारी किए जाएंगे।

शुक्रवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैंडल मार्च निकालकर जलियांवाला बाग हत्याकांड में शहीद हुए लोगों को कैंडल मार्च करके श्रद्धांजलि दी।

इस कैंडल मार्च में राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, कैबिनेट मंत्री सुखबिंदर सिंह सुखसरकरिया, सुनील जाखड़, ओम प्रकाश सोनी, आशा कुमारी, सुनील दत्ती, इंदरबीर बुलारिया, राजकुमार वेरका और गुरजीत औजला के अतिरक्त छात्रों ने भी भाग लिया।

शताब्दी समारोह के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए है। बीएसएफ जवानों को भी पंजाब पुलिस के साथ-साथ जलियांवाला बाग में सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब , कैसे और क्यों हुआ था?- #JallianwalaBagh why,when happen?

आज 13 अप्रैल 2019 से सौ साल पहले 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग नरसंहार हुआ था। उस दिन बैसाखी का पर्व था। जलियांवाला बाग में तकरीबन 15 से 20 हजार भारतीय एकत्र हुए थे।

सभी लोग बेहद शांति से सभा कर रहे थे। बैसाखी के दिन ये सभा पंजाब के दो फेमस नेताओं को हिरासत में लिए जाने के विरोध में और रोलेट एक्ट के विरोध स्वरूप में रखी गई थी,लेकिन इससे दो दिन पहले अमृतसर और पंजाब में कुछ घटनाएं हुई थी जिसके कारण ब्रिटिश सरकार बेहद गुस्से में थी।

बस इसी गुस्से के कारण ब्रिटिश सरकार के हैवान अफसर जनरल डायर ने अमृतसर ने 90 सैनिकों को लेकर तकरीबन शाम चार बजे जलियांवाला बाग में पहुंचकर शांतिपूर्ण जनसभा कर रहे लोगों पर गोलियां चलवा दी।

ताबड़तोड़ निर्मम तरीके से निर्दोष हिंदुस्तानियों पर गोलियां चली तो वे जान बचाने के लिए कुएं में कूदे। कहते है कि 120 लाशें केवल उस कुएं से ही बाहर निकाली गई थी। कहा जाता है कि जनरल डायर ने 1650 राउंड गोलियां मात्र 10 मिनट में चलवा दी और गोलियां चलवाना तब बंद हुआ जब उसके सैनिकों की गोलियां खत्म हो गई। ब्रिटिशों के आंकड़े बताते है कि जलियांवाला बाग हत्याकांड में 379 लोग इस निर्मम नरसंहार का शिकार हुए।

लेकिन असलियत यह है कि उस दिन जलियांवाला बाग में एक हजार से काफी ज्यादा लोग अकाल मौत का शिकार हुए थे और तकरीबन 2000 गोलियों से जख्मी हो गए थे।

इस हत्याकांड के बाद पूरे भारतवर्ष में ऐसा जनसैलाब फूटा था कि ब्रिटिश हुकूमत का सूरज ढ़ल गया था,लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसीं के बावजूद भी आजतक ब्रिटिश सरकार ने इस हत्याकांड के लिए माफी नहीं मांगी। बस अफसोस जरूर व्यक्त किया।

जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसीं पर ब्रिटिश हाई कमीशनर सर डॉमिनिक असक्विथ ने भारत में अमृतसर आकर अपना मैसेज विजिटर बुक में लिखा।

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Reena Arya

रीना आर्य एक ज्वलंत और साहसी पत्रकार व लेखिका है। वे समयधारा.कॉम की एडिटर-इन-चीफ और फाउंडर भी है। लेखन के प्रति अपने जुनून की बदौलत रीना आर्य ने न केवल बड़े-बड़े ब्रांड्स में अपने काम के बल पर अपनी पहचान बनाई बल्कि अपनी काबलियत को प्रूव करते हुए पत्रकारिता के पांच से छह साल के सफर में ही अपने बल खुद एक नए ब्रैंड www.samaydhara.com की नींव रखी।रीना आर्य हर मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने पर विश्वास करती है और अपने लेखन को लगभग हर विधा में आजमा चुकी है

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