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नागालैंड : NPF के टी. आर. जेलियांग ने राज्य के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

कोहिमा,19 जुलाई :  नागालैंड में बुधवार को तेजी से बदले घटनाक्रम के बीच राज्यपाल पी.बी. आचार्य ने मुख्यमंत्री शुरहोजेली लीजित्सु की सरकार को बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के वरिष्ठ नेता टी. आर. जेलियांग ने राज्य के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल आचार्य ने एनपीएफ के ही नेता लीजित्सु की सरकार को विधानसभा में बहुमत नहीं साबित कर पाने के कारण बर्खास्त किया। लीजित्सु शक्ति परीक्षण के लिए बुधवार को आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में उपस्थित ही नहीं हुए।

लीजित्सु की सरकार को बर्खास्त करने के बाद राज्यपाल ने एनपीएफ के नेता व राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जेलियांग को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। राज्यपाल आचार्य ने जेलियांग (65) को राजभवन में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए 22 जुलाई तक का समय दिया गया है।

मुख्यमंत्री जेलियांग विधानसभा में बहुमत साबित करने के बाद मंत्रिमंडल की घोषणा करेंगे।

जेलियांग दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। उन्हें निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित किए जाने पर जनजातीय समूहों के हिंसक विरोध के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद लीजित्सु (80) मुख्यमंत्री बने थे।

इस बीच, एनपीएफ दो धड़ों में बंट गई और एक खेमा जेलियांग को फिर से मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करने लगा। इन सबके बीच राज्यपाल ने 11 और 13 जुलाई को लीजित्सु से 15 जुलाई तक बहुमत साबित करने को कहा, जिसे एनपीएफ नेता ने अदालत में चुनौती दी। पर इस मामले में लीजित्सु की रिट याचिका गुवाहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ से खारिज हो गई।

न्यायमूर्ति लानुसुंगकुम जमीर ने कहा कि लीजित्सु के पास सदन का बहुमत नहीं है और राज्यपाल बिना किसी सहायता व सलाह के अपने विवेक से फैसले ले सकते हैं। इसके बाद राज्यपाल आचार्य ने मंगलवार रात को बुधवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की थी। पर लीजित्सु बुधवार को विधानसभा के विशेष सत्र में नहीं पहुंचे, जिसके बाद सदन के अध्यक्ष ईम्विापांग एइर ने यह कहते हुए सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी कि मुख्यमंत्री द्वारा बहुमत साबित करने का प्रस्ताव नहीं रखा जा सका, क्योंकि वह सदन में मौजूद नहीं हुए।

हालांकि जेलियांग इस दौरान उन्हें समर्थन देने वाले पार्टी के 35 विधायकों, चार भाजपा विधायकों और सात निर्दलीय विधायकों के साथ सदन में मौजूद थे।

एइर सदन की कार्यवाही की रिपोर्ट पहले ही राज्यपाल को सौंपी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने लीजित्सु की सरकार को संविधान के अनुच्छेद 164 के खंड (1) के तहत बर्खास्त कर दिया।

राज्यपाल ने कहा, “(विधानसभा अध्यक्ष सहित) 48 विधायकों ने सत्र में हिस्सा लिया। इसलिए यह स्पष्ट है कि लीजित्सु कई बार अवसर दिए जाने के बावजूद विश्वास प्रस्ताव लाने में विफल हुए।”

लीजित्सु को 60 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ एनपीएफ के 10 विधायकों और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन हासिल है।

एनपीएफ के लीजित्सु खेमे के प्रवक्ता यिताचु ने विधानसभा में अनुपस्थिति पर कहा, “हमें इसके (बहुमत साबित करने) के लिए समय नहीं दिया गया। हम विधानसभा सत्र में कैसे भाग ले सकते हैं, जब हम में से ज्यादातर सदस्य कोहिमा में मौजूद नहीं हैं और विधानसभा सत्र बुलाने की सूचना भी मंगलवार आधी रात को दी गई।”

यिताचू ने आईएएनएस को फोन पर कहा, “हम विधानसभा सत्र को अचानक बुलाने का कारण नहीं समझ पा रहे हैं, क्योंकि एनपीएफ पार्टी के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल आंतरिक मामला है और इसे सदन के बाहर सुलझाया जाना चाहिए।”

वहीं, जेलियांग खेमे के एनपीएफ के प्रवक्ता तोखेहो येप्तोमी ने आईएएनएस से कहा कि लीजित्सु को सदन में बहुमत साबित करने से बचने की बजाय सम्मानजनक तरीके से इस्तीफा दे देना चाहिए था।

राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा में से एक सीट रिक्त है। सत्तारूढ़ नागालैंड लोकतांत्रिक गठबंधन में एनपीएफ के 47 विधायक, भाजपा के चार विधायक और आठ निर्दलीय विधायक हैं।

सत्तारूढ़ गठबंधन में कलह की शुरुआत एनपीएफ के एक धड़े द्वारा लीजित्सु पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाए जाने के बाद हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि लीजित्सु ने अपने बेटे क्रिहू लीजित्सु को कैबिनेट दर्जे के साथ अपना सलाहकार नियुक्त किया। हालांकि क्रिहू ने इससे इनकार किया।

लीजित्सु ने एनपीएफ के उम्मीदवार के तौर पर 29 जुलाई को होने वाला उपचुनाव नॉदर्न अंगामी-1 विधानसभा क्षेत्र से लड़ने के लिए नामांकन-पत्र भी दाखिल किया है।

–आईएएनएस

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समय धारा

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